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Daily Business Newspaper | A Knowledge Powerhouse in Hindi

11-05-2026

अकेलेपन से बढ़ रही है मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं की व्यापकता

  •  इंडियन एसोसिएशन ऑफ सोशियल साईकेट्री की मिड टर्म सीएमई 2026, जयपुर के झालाना स्थित आरआईसी में आयोजित हुई। सीएमई का उद्घाटन एसएमएस मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य एवं नियंत्रक डॉ. दीपक माहेश्वरी ने किया। इस अवसर पर राजस्थान हॉस्पिटल एवं स्वास्थ्य कल्याण गु्रप के चेयरमैन डॉ. एसएस अग्रवाल गेस्ट ऑफ ऑनर के रूप में उपस्थित रहे। उन्होंने कहा कि शहरीकरण, डिजिटल निर्भरता और सामाजिक अलगाव ने मानसिक स्वास्थ्य पर गहरा प्रभाव डाला है, जिससे आधुनिक समाज में चिंता, अवसाद और अकेलेपन जैसे मानसिक स्वास्थ्य विकारों की बढ़ती व्यापकता में योगदान हुआ है। मानसिक रूप से, मजबूत सामाजिक बंधन तनाव, चिंता और अवसाद के स्तर को कम करने, नींद में सुधार लाने और जीवन की चुनौतियों का सामना करने की क्षमता को बढ़ाना जरुरी हैं। इसके अलावा, खुशी, आत्म-सम्मान, सहानुभूति, स्वस्थ खानपान और शारीरिक गतिविधि सभी संतोषजनक सामाजिक संबंधों में पनपते हैं। विशेषज्ञों ने कहा कि मानसिक विकार ऐसी स्थितियां हैं जो आपके विचारों, भावनाओं और व्यवहार को प्रभावित करती हैं। अवसाद, चिंता और सिज़ोफ्रेनिया जैसे 200 से अधिक प्रकार के विकार हैं। आपको मनोदशा में उतार-चढ़ाव, भूख में परिवर्तन, मतिभ्रम या रुचि की कमी जैसे लक्षण हो सकते हैं।  आयोजन समिति के चेयरमैन डॉ. ललित बत्रा और सचिव आरएचएल साइकेट्रिक सेन्टर के चेयरमैन डॉ. राघव शाह ने बताया कि यह ज्वलंत मुद्दा है और इस पर चर्चा करना जरूरी है। सोसायटी के राष्ट्रीय अध्यक्ष पीजीआई चंढीगढ के पूर्व मनोरोग विभागाध्यक्ष डॉ. देवाशीष बसु, वरिष्ठ साइकेट्रिस्ट डॉ. नितिन गुप्ता तथा एम्स नई दिल्ली के पूर्व विभागाध्यक्ष मनोरोग विभाग डॉ. राकेश चड्ढा विशेष स्पीकर रहे।

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अकेलेपन से बढ़ रही है मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं की व्यापकता

 इंडियन एसोसिएशन ऑफ सोशियल साईकेट्री की मिड टर्म सीएमई 2026, जयपुर के झालाना स्थित आरआईसी में आयोजित हुई। सीएमई का उद्घाटन एसएमएस मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य एवं नियंत्रक डॉ. दीपक माहेश्वरी ने किया। इस अवसर पर राजस्थान हॉस्पिटल एवं स्वास्थ्य कल्याण गु्रप के चेयरमैन डॉ. एसएस अग्रवाल गेस्ट ऑफ ऑनर के रूप में उपस्थित रहे। उन्होंने कहा कि शहरीकरण, डिजिटल निर्भरता और सामाजिक अलगाव ने मानसिक स्वास्थ्य पर गहरा प्रभाव डाला है, जिससे आधुनिक समाज में चिंता, अवसाद और अकेलेपन जैसे मानसिक स्वास्थ्य विकारों की बढ़ती व्यापकता में योगदान हुआ है। मानसिक रूप से, मजबूत सामाजिक बंधन तनाव, चिंता और अवसाद के स्तर को कम करने, नींद में सुधार लाने और जीवन की चुनौतियों का सामना करने की क्षमता को बढ़ाना जरुरी हैं। इसके अलावा, खुशी, आत्म-सम्मान, सहानुभूति, स्वस्थ खानपान और शारीरिक गतिविधि सभी संतोषजनक सामाजिक संबंधों में पनपते हैं। विशेषज्ञों ने कहा कि मानसिक विकार ऐसी स्थितियां हैं जो आपके विचारों, भावनाओं और व्यवहार को प्रभावित करती हैं। अवसाद, चिंता और सिज़ोफ्रेनिया जैसे 200 से अधिक प्रकार के विकार हैं। आपको मनोदशा में उतार-चढ़ाव, भूख में परिवर्तन, मतिभ्रम या रुचि की कमी जैसे लक्षण हो सकते हैं।  आयोजन समिति के चेयरमैन डॉ. ललित बत्रा और सचिव आरएचएल साइकेट्रिक सेन्टर के चेयरमैन डॉ. राघव शाह ने बताया कि यह ज्वलंत मुद्दा है और इस पर चर्चा करना जरूरी है। सोसायटी के राष्ट्रीय अध्यक्ष पीजीआई चंढीगढ के पूर्व मनोरोग विभागाध्यक्ष डॉ. देवाशीष बसु, वरिष्ठ साइकेट्रिस्ट डॉ. नितिन गुप्ता तथा एम्स नई दिल्ली के पूर्व विभागाध्यक्ष मनोरोग विभाग डॉ. राकेश चड्ढा विशेष स्पीकर रहे।


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