जीवन में सफलता पाने के लिये केवल बुद्धिमता या प्रतिभा ही पर्याप्त नहीं है बल्कि कड़ी मेहनत और निरंतर अभ्यास भी अनिवार्य है। परिश्रम मनुष्य को अपने लक्ष्यों की ओर बढ़ाने में मदद करता है जबकि निरंतर अभ्यास मनुष्य को सफलता प्रदान करता है। कठिन परिश्रम ही सफलता का मूलमंत्र है। जीवन में कोई भी बड़ा लक्ष्य बिना कठिन परिश्रम के हासिल नहीं किया जा सकता। कठिन परिश्रम ही सफलता की कुंजी है। परिश्रम वह शक्ति है जो कठिनाईयों को भी अवसर में बदल देती है तथा निरंतर प्रयास से असम्भव लगने वाला कार्य भी सम्भव हो जाता है। ज्ञातव्य है कि कठिन परिश्रम का न तो कोई अन्य विकल्प है और न ही कोई स्थानापन्न और लघु-पथ ही है। कठोर परिश्रम न केवल सम्बंधित व्यक्ति को सफलता दिलाता है बल्कि यह मनुष्य के जीवन में अनुशासन, जिम्मेदारी और ध्यान जैसे गुण भी विकसित करता है।