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02-10-2026

ओवरनाइट ट्रैवल में रिलीजियस ट्रिप का 50% योगदान

  •  देश में ओवरलाइट ट्रैवल (रातभर की यात्राओं) में तीर्थयात्रा और धार्मिक यात्राओं की हिस्सेदारी करीब आधी है। सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय के घरेलू पर्यटन खर्च सर्वेक्षण के अनुसार, देश में होने वाली कुल रातभर की यात्राओं में करीब 48 प्रतिशत यात्राएं तीर्थयात्रा और धार्मिक उद्देश्य से जुड़ी हैं। वहीं स्वास्थ्य और चिकित्सा से जुड़ी यात्राओं की हिस्सेदारी करीब 30 प्रतिशत रही। सर्वेक्षण के अनुसार ग्रामीण इलाकों में स्वास्थ्य और चिकित्सा से जुड़ी यात्राओं की हिस्सेदारी 38.4 प्रतिशत रही, जबकि छुट्टियां बिताने, मनोरंजन और घूमने-फिरने से जुड़ी यात्राओं की हिस्सेदारी 36.4 प्रतिशत रही। यह सर्वेक्षण जुलाई, 2025 से जून, 2026 के दौरान लोगों की रातभर की यात्राओं, यात्रा की अवधि, यात्रा के उद्देश्य, आने-जाने के साधन और ठहरने पर होने वाले खर्च के आधार पर तैयार किया गया। खर्च के लिहाज से स्वास्थ्य और चिकित्सा से जुड़ी यात्राएं सबसे महंगी रहीं। गत 365 दिनों में पूरी की गई यात्राओं में स्वास्थ्य और चिकित्सा के उद्देश्य से की गई एक रातभर की यात्रा पर औसत खर्च 32,167 रुपये रहा। इसके बाद खरीदारी से जुड़ी यात्राओं पर औसत खर्च 18,981 रुपये, छुट्टियां और मनोरंजन से जुड़ी यात्राओं पर 11,723 रुपये तथा तीर्थयात्रा और धार्मिक यात्राओं पर 7,694 रुपये रहा। गत 30 दिनों में पूरी की गई यात्राओं में कारोबारी यात्रा पर औसत खर्च सबसे ज्यादा 5,949 रुपये रहा। इसके बाद शिक्षा और प्रशिक्षण से जुड़ी यात्राओं पर 3,953 रुपये, अन्य उद्देश्यों से की गई यात्राओं पर 3,873 रुपये और सामाजिक उद्देश्यों से जुड़ी यात्राओं पर 2,543 रुपये का औसत खर्च हुआ। सर्वेक्षण में ग्रामीण और शहरी इलाकों के खर्च में भी बड़ा अंतर सामने आया। ग्रामीण इलाकों में स्वास्थ्य और चिकित्सा से जुड़ी यात्राओं पर औसत खर्च अधिकतम 29,454 रुपये रहा, जबकि शहरी इलाकों में यह खर्च बढक़र 41,649 रुपये तक पहुंच गया। वहीं कारोबारी यात्राओं में ग्रामीण इलाकों में औसत खर्च 5,179 रुपये और शहरी इलाकों में 6,934 रुपये रहा। सर्वेक्षण से देश में पर्यटन और यात्रा के बदलते रुझान की तस्वीर सामने आती है। धार्मिक यात्रा जहां ओवरनाट डोमेस्टिक ट्यूरिज्मका बड़ा हिस्सा बनी हुई है, वहीं स्वास्थ्य और चिकित्सा से जुड़ी यात्राएं लोगों के घरेलू यात्रा खर्च में सबसे अधिक खर्च वाली श्रेणी बनकर सामने आई हैं। कोविड के बाद देश में धार्मिक पर्यटन गतिविधियां बढ़ी है और इसका योगदान टोटल ट्रिप ग्राफ में काफी ज्यादा बढ़ गया है।

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ओवरनाइट ट्रैवल में रिलीजियस ट्रिप का 50% योगदान

 देश में ओवरलाइट ट्रैवल (रातभर की यात्राओं) में तीर्थयात्रा और धार्मिक यात्राओं की हिस्सेदारी करीब आधी है। सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय के घरेलू पर्यटन खर्च सर्वेक्षण के अनुसार, देश में होने वाली कुल रातभर की यात्राओं में करीब 48 प्रतिशत यात्राएं तीर्थयात्रा और धार्मिक उद्देश्य से जुड़ी हैं। वहीं स्वास्थ्य और चिकित्सा से जुड़ी यात्राओं की हिस्सेदारी करीब 30 प्रतिशत रही। सर्वेक्षण के अनुसार ग्रामीण इलाकों में स्वास्थ्य और चिकित्सा से जुड़ी यात्राओं की हिस्सेदारी 38.4 प्रतिशत रही, जबकि छुट्टियां बिताने, मनोरंजन और घूमने-फिरने से जुड़ी यात्राओं की हिस्सेदारी 36.4 प्रतिशत रही। यह सर्वेक्षण जुलाई, 2025 से जून, 2026 के दौरान लोगों की रातभर की यात्राओं, यात्रा की अवधि, यात्रा के उद्देश्य, आने-जाने के साधन और ठहरने पर होने वाले खर्च के आधार पर तैयार किया गया। खर्च के लिहाज से स्वास्थ्य और चिकित्सा से जुड़ी यात्राएं सबसे महंगी रहीं। गत 365 दिनों में पूरी की गई यात्राओं में स्वास्थ्य और चिकित्सा के उद्देश्य से की गई एक रातभर की यात्रा पर औसत खर्च 32,167 रुपये रहा। इसके बाद खरीदारी से जुड़ी यात्राओं पर औसत खर्च 18,981 रुपये, छुट्टियां और मनोरंजन से जुड़ी यात्राओं पर 11,723 रुपये तथा तीर्थयात्रा और धार्मिक यात्राओं पर 7,694 रुपये रहा। गत 30 दिनों में पूरी की गई यात्राओं में कारोबारी यात्रा पर औसत खर्च सबसे ज्यादा 5,949 रुपये रहा। इसके बाद शिक्षा और प्रशिक्षण से जुड़ी यात्राओं पर 3,953 रुपये, अन्य उद्देश्यों से की गई यात्राओं पर 3,873 रुपये और सामाजिक उद्देश्यों से जुड़ी यात्राओं पर 2,543 रुपये का औसत खर्च हुआ। सर्वेक्षण में ग्रामीण और शहरी इलाकों के खर्च में भी बड़ा अंतर सामने आया। ग्रामीण इलाकों में स्वास्थ्य और चिकित्सा से जुड़ी यात्राओं पर औसत खर्च अधिकतम 29,454 रुपये रहा, जबकि शहरी इलाकों में यह खर्च बढक़र 41,649 रुपये तक पहुंच गया। वहीं कारोबारी यात्राओं में ग्रामीण इलाकों में औसत खर्च 5,179 रुपये और शहरी इलाकों में 6,934 रुपये रहा। सर्वेक्षण से देश में पर्यटन और यात्रा के बदलते रुझान की तस्वीर सामने आती है। धार्मिक यात्रा जहां ओवरनाट डोमेस्टिक ट्यूरिज्मका बड़ा हिस्सा बनी हुई है, वहीं स्वास्थ्य और चिकित्सा से जुड़ी यात्राएं लोगों के घरेलू यात्रा खर्च में सबसे अधिक खर्च वाली श्रेणी बनकर सामने आई हैं। कोविड के बाद देश में धार्मिक पर्यटन गतिविधियां बढ़ी है और इसका योगदान टोटल ट्रिप ग्राफ में काफी ज्यादा बढ़ गया है।


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