देश में स्मार्टफोन की कीमतें 2026 के फस्र्ट हाफ में एवरेज 16 प्रतिशत बढ़ गईं। मेमोरी चिप की बढ़ती लागत और रुपये की कमजोरी से आयातित कलपुर्जे महंगे होने के कारण फोन के दाम बढ़े। एक रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई। बाजार शोध फर्म काउंटरपॉइंट रिसर्च ने कहा कि कीमतों में बढ़ोतरी से 10,000 रुपये से कम कीमत वाले फोन सबसे अधिक प्रभावित हुए। इस सेगमेंट में कीमतें औसतन करीब 32 प्रतिशत बढ़ गईं और बिक्री 2026 की पहली छमाही में सालाना आधार पर 65 प्रतिशत घट गई। इसके अलावा, 10,000-15,000 रुपये वाले सेगमेंट में भी स्मार्टफोन की बिक्री 20 प्रतिशत कम हुई। यह श्रेणी आमतौर पर स्मार्टफोन बाजार के सबसे बड़े हिस्सों में से एक है। हालांकि, 20,000 रुपये से अधिक कीमत वाले फोन की बिक्री इस दौरान बढ़ती रही। ऊंची शुरुआती कीमतों के बावजूद आकर्षक खरीद पेशकश और नो-कॉस्ट ईएमआई ने महंगे फोन खरीदना आसान बनाया। शोध फर्म ने कहा कि मेमोरी की बढ़ती लागत के कारण अप्रैल-जून तिमाही में भारत में स्मार्टफोन का एवरेज सेल्स प्राइस रिकॉर्ड 318 डॉलर पर पहुंच गया। काउंटरपॉइंट ने कहा कि एआई डेटा सेंटर में डीआरएएम और एनएएनडी की मांग बढऩे से मेमोरी की आपूर्ति पर दबाव पड़ा। वहीं, रुपये की कमजोरी से आयातित फोन कलपुर्जों की लागत भी बढ़ गई। भारत में बिकने वाले करीब 99 प्रतिशत मोबाइल फोन का निर्माण स्थानीय स्तर पर होता है। इसके बावजूद अधिकांश फोन कंपनियों ने लागत बढ़ोतरी का बड़ा हिस्सा ग्राहकों पर डाल दिया। काउंटरपॉइंट रिसर्च के शोध निदेशक तरुण पाठक ने कहा कि लागत बढऩे की स्थिति में कंपनियों के सामने आमतौर पर कीमत स्थिर रखकर मार्जिन घटाने या मार्जिन बचाने के लिए बिक्री की मात्रा गंवाने का विकल्प होता है। शोध फर्म का अनुमान है कि मेमोरी की कीमतों में 2028 से पहले कमी आने की संभावना नहीं है। रुपये की कमजोरी से आयात लागत बढऩे के कारण स्मार्टफोन की कीमतों पर दबाव आगे भी बना रह सकता है।