भारत की जेन जी यानी युवा पीढ़ी त्योहारों के मौसम में ज्यादा खर्च कर रही है, लेकिन उसकी खरीदारी अब सिर्फ बिना सोचे-समझे खर्च करने तक सीमित नहीं है। रुकम कैपीटल और यूगव की रिपोर्ट के अनुसार, 10 में से करीब 6 युवा त्योहारों के दौरान ज्यादा खर्च करते हैं। हालांकि खरीदारी से पहले सामान की जानकारी जुटाना, कीमतों की तुलना करना और ऑनलाइन मिलने वाली जानकारी की जांच करना अब उनकी आदत का हिस्सा बन गया है। फेस्टीवल स्पेंड में परिवार सबसे अहम है। कुल उपहार खरीदारी में 74 फीसदी हिस्सा परिवार के लिए खर्च का है। इसके साथ खुद को उपहार देने का चलन भी तेजी से बढ़ रहा है। करीब एक-तिहाई युवा त्योहारों के दौरान होने वाले खर्च की पहले से योजना बनाते हैं। सामान की जानकारी और खरीदारी के लिए इंटरनेट खोज सबसे बड़ा माध्यम बनकर सामने आया है। 41 फीसदी युवा ऑनलाइन सर्चिंग के जरिए त्यौहारों की खरीदारी के लिए जानकारी और नए सामान के बारे में पता करते हैं। वहीं 29 फीसदी युवा सोशल मीडिया और सोशल मीडिया पर सामान की जानकारी देने वाले लोगों से प्रभावित होते हैं। हालांकि किसी व्यक्ति की सलाह मिलने के तुरंत बाद सामान खरीदने वाले युवाओं की संख्या सिर्फ 6 फीसदी है। वहीं 46 फीसदी युवा खरीदारी से पहले स्वयं और अधिक जानकारी जुटाते हैं। आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस यानी एआई भी जेन जी की खरीदारी में तेजी से जगह बना रही है। करीब 60 फीसदी युवा कम से कम कभी-कभी सामान की जानकारी जुटाने के लिए एआई का इस्तेमाल करते हैं। इसका इस्तेमाल मुख्य रूप से अलग-अलग सामान की तुलना करने और सबसे बेहतर कीमत खोजने के लिए किया जाता है। 70 फीसदी युवा एआई की ओर से सामान सुझाए जाने को लेकर सहज हैं, लेकिन आधे से भी कम युवा अंतिम खरीदारी का फैसला ्रएआई के हाथ में देना चाहते हैं।
इससे साफ है कि युवा AI को सलाहकार के रूप में इस्तेमाल कर रहे हैं, लेकिन अंतिम फैसला खुद लेना चाहते हैं। खरीदारी से जुड़ी जानकारी में खुद की पड़ताल सबसे भरोसेमंद मानी जा रही है। 27 फीसदी युवाओं के लिए अपनी जानकारी और पड़ताल सबसे भरोसेमंद स्रोत है। इसके बाद 20 फीसदी युवा दोस्तों और 15 फीसदी ऑनलाइन खरीदारों की राय पर भरोसा करते हैं। ऑनलाइन नकली जानकारी और बदली हुई तस्वीरों या वीडियो को लेकर भी वे सावधान है। करीब 32 फीसदी युवा सामान बेचने वाले की विश्वसनीयता की जांच करते हैं, जबकि 29 फीसदी युवा पहले से स्थापित और भरोसेमंद कंपनियों के सामान को प्राथमिकता देते हैं। हालांकि जेन जी पूरी तरह अचानक खरीदारी से दूर नहीं है। करीब 28 फीसदी युवा तेजी से सामान पहुंचाने वाली ऑनलाइन सेवाओं का इस्तेमाल करते हैं और हर पांच में से एक युवा मानता है कि वह पहले की तुलना में ज्यादा अचानक खरीदारी करने लगा है। इसके बावजूद सामान की गुणवत्ता और कीमत खरीदारी के दो सबसे बड़े आधार बने हुए हैं। 51 फीसदी युवाओं के लिए गुणवत्ता और 49 फीसदी के लिए कीमत महत्वपूर्ण है। ऑनलाइन चलने वाले नए चलन को अपनाने में भी जेन जी सोच-समझकर आगे बढ़ रही है। करीब एक-तिहाई युवा किसी नए ऑनलाइन ट्रेंड को अपनाने से पहले उसके बारे में इंटरनेट पर जानकारी जुटाते हैं। वहीं सिर्फ 9 फीसदी युवा किसी नए चलन को तुरंत अपना लेते हैं। कंपनियों के लिए भी यह बदलाव महत्वपूर्ण है। केवल सोशल मीडिया पर प्रसिद्ध लोगों के जरिए प्रचार, युवाओं की बोलचाल की भाषा की जबरन नकल या हर नए चलन के पीछे भागना जेन जी को हमेशा आकर्षित नहीं करता। करीब 30 फीसदी युवा ऐसे व्यवहार पर खुलकर सवाल उठाने या उसकी आलोचना करने की बात कहते हैं। कुल मिलाकर, जेन जी त्योहारों पर खर्च जरूर बढ़ा रही है, लेकिन खरीदारी का तरीका बदल रहा है। सोशल मीडिया और इंटरनेट उसे सामान के बारे में जानकारी दे सकते हैं, लेकिन अंतिम फैसला लेने से पहले वह अपनी पड़ताल, कीमत की तुलना और गुणवत्ता की जांच को ज्यादा महत्व दे रही है।