कंपनियों में एआई स्किल्स की बढ़ती जरूरत का सीधा असर अब इंजीनियरिंग कॉलेजों के कैंपस प्लेसमेंट पर दिखने लगा है। 2026 के प्लेसमेंट सीजन के शुरुआती ट्रेंड बताते हैं कि पहले जहां फ्रेशर्स को 3-4 लाख रुपए के पैकेज आमतौर पर मिलते थे, वहीं अब एआई से जुड़े काम संभालने वाले युवाओं के लिए 7-12 लाख रुपए तक के पैकेज देखने को मिल रहे हैं। टेस्टिंग और कोडिंग जैसे कामों में एआई के बढ़ते इस्तेमाल ने एंट्री-लेवल नौकरियों के लिए जरूरी स्किल्स को भी बदल दिया है। कॉलेजों के मुताबिक 2025 में कुछ सुस्ती के बाद इस साल कैंपस प्लेसमेंट में फिर तेजी देखने को मिल रही है। कंपनियां अब सिर्फ सामान्य कोडिंग स्किल्स के बजाय एआई, डिजिटल और नई टेक्नोलॉजी से जुड़ी क्षमताओं वाले फ्रेशर्स को ज्यादा महत्व दे रही हैं। प्रीमियम पे की बात करें तो राजलक्ष्मी इंजीनियरिंग कॉलेज, चेन्नई के मुख्य परिचालन अधिकारी ने कहा कि इस साल ज्यादा सैलरी वाले ऑफर्स की हिस्सेदारी बढ़ी है। उनके अनुसार करीब 65 फीसदी ऑफर्स 7-12 लाख रुपए सालाना के पैकेज वाले हैं। वहीं 3-4 लाख रुपए के पैकेज वाले ऑफर्स धीरे-धीरे कम हो रहे हैं और उनकी जगह 9-10 लाख रुपए के नए पैकेज देखने को मिल रहे हैं। गोकाजू रंगराजू इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी, हैदराबाद के डीन और प्रशिक्षण एवं प्लेसमेंट संचालन प्रमुख ने कहा कि कम सैलरी वाले 3-4 लाख रुपए के पैकेज वाले ऑफर्स को धीरे-धीरे हटाया जा रहा है। एआई अब कोड तैयार करने जैसे कामों का बड़ा हिस्सा संभाल रहा है। ऐसे में शुरुआती स्तर की नौकरियां खत्म नहीं हो रही हैं, लेकिन इन नौकरियों के लिए नई तरह की स्किल्स जरूरी हो गई हैं। कंपनियां ऐसे फ्रेशर्स चाहती हैं जो एआई की मदद से काम को तेजी और बेहतर तरीके से पूरा कर सकें। अन्य कॉलेजों में भी इसी तरह का ट्रेंड सामने आया है। एआई और डिजिटल स्किल्स वाले छात्रों के लिए सैलरी ऑफर्स में बढ़ोतरी दर्ज की गई है। कई छात्रों को करीब 9 लाख रुपए तक के पैकेज ऑफर हुए हैं। फ्रेशर हायरिंग भी बढ़ी 2026 के प्लेसमेंट सीजन में आईटी सेवा कंपनियों की ओर से फ्रेशर हायरिंग पहले शुरू होने के संकेत मिल रहे हैं। हिंदुस्तान इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी एंड साइंस के उपकुलपति वी.के. मिश्रा के अनुसार संस्थान इस साल 88-90 फीसदी प्लेसमेंट दर हासिल करने की उम्मीद कर रहा है, जो पिछले साल करीब 85 फीसदी थी। इस बीच कई बड़ी आईटी सेवा कंपनियों ने भी फ्रेशर हायरिंग बढ़ाने की योजनाएं घोषित की हैं। टीसीएस, इन्फोसिस और कॉग्निजेंट जैसी कंपनियां बड़ी संख्या में नए ग्रेजुएट्स को नौकरी देने की तैयारी कर रही हैं। कॉग्निजेंट ने 20,000-25,000 नए ग्रेजुएट्स को नौकरी पर लेने की योजना बताई है। फ्रेशर हायरिंग में तेजी की एक वजह यह भी है कि आईटी सेवा कंपनियों को करीब दो-तीन साल की अनिश्चितता के बाद रेवेन्यू, ग्राहक जोडऩे और प्रतिभाओं की जरूरत के मोर्चे पर बेहतर स्थिति दिखाई दे रही है। टीमलीज एडटेक के फाउंडर और मुख्य कार्यकारी अधिकारी शांतनु रूज के मुताबिक कंपनियां अब डिजिटल संचालन, ऑटोमेशन, एनालिटिक्स, क्लाउड, एआई और आधुनिक मैन्युफैक्चरिंग जैसी विशेष क्षमताओं वाले युवाओं की तलाश कर रही हैं। यानी आने वाले कैंपस प्लेसमेंट में केवल डिग्री नहीं, बल्कि एआई और डिजिटल स्किल्स सैलरी पैकेज तय करने में अहम भूमिका निभा सकती हैं।