इलेक्ट्रिक वाहनों की बढ़ती लोकप्रियता के बीच उनकी सबसे बड़ी चुनौती बैटरी की उम्र है। अब बैटरी की उम्र बढ़ाने की दिशा में भारतीय शोधकर्ताओं ने महत्वपूर्ण सफलता हासिल की है। नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी राउरकेला के शोधकर्ताओं ने ऐसी हाइब्रिड ऊर्जा भंडारण प्रणाली विकसित की है, जो अचानक ब्रेक लगाने, तेज गति से वाहन चलाने और गति कम-ज्यादा करने के दौरान बैटरी पर पडऩे वाले अतिरिक्त दबाव को कम कर सकती है। इस तकनीक का पेटेंट भी हासिल कर लिया गया है। इस शोध को उच्च शिक्षण संस्थान एनआईटी राउरकेला की प्रो. मोनालिसा पटनायक, डॉ. प्रद्युम्न कुमार बेहरा और करण गुप्ता ने अंजाम दिया है। शोधकर्ताओं के मुताबिक नई प्रणाली का डिजाइन कम से कम घटकों पर आधारित है। इससे सिस्टम की जटिलता कम होती है और बैटरी को अचानक बढऩे वाली बिजली की मांग से सुरक्षा मिलती है। दरअसल शहरों में इलेक्ट्रिक वाहनों को बार-बार रुकना और चलना पड़ता है। इसके अलावा अचानक एक्सीलरेशन, डिसेलरेशन और ब्रेक लगाने जैसी स्थितियों में बैटरी से बहुत तेजी से करंट लिया या वापस भेजा जाता है। इससे बैटरी सेल्स पर थर्मल और विद्युत दबाव बढ़ता है और समय के साथ उनकी क्षमता तथा उम्र प्रभावित हो सकती है। इसी समस्या का समाधान निकालने के लिए शोधकर्ताओं ने बैटरी के साथ सुपरकैपेसिटर को जोड़ा है। सुपरकैपेसिटर बहुत तेजी से चार्ज और डिस्चार्ज हो सकता है और अचानक पैदा होने वाली बिजली की मांग को संभाल सकता है। इससे बैटरी को तेज करंट के झटकों से राहत मिलती है और उसकी उम्र बढ़ाने में मदद मिलती है। नई प्रणाली की खासियत इसका सरल डिजाइन है। प्रो. मोनालिसा पटनायक के मुताबिक इसमें तीन प्रमुख घटक हैं। एक घटक कन्वर्टर, एक इंडक्टर और एक सिंगल कंट्रोल सिस्टम है। एक ही कन्वर्टर बैटरी और सुपरकैपेसिटर दोनों को वाहन की विद्युत प्रणाली से जोड़ता है। इससे अतिरिक्त स्विच और नियंत्रण उपकरणों की जरूरत कम हो जाती है। वहीं इंडक्टर करंट में अचानक होने वाले उछाल को नियंत्रित करता है। सिंगल कंट्रोल सिस्टम वाहन के तेज गति पकडऩे और गति कम करने, दोनों परिस्थितियों में बिजली के प्रवाह को नियंत्रित करता है।