TOP

ई - पेपर Subscribe Now!

ePaper
Subscribe Now!

Download
Android Mobile App

Daily Business Newspaper | A Knowledge Powerhouse in Hindi

02-09-2026

ग्रोथ टे्रक पर बनी रहेगी मीडिया और एंटरटेंमेंट इंडस्ट्री

  •  भारत का मीडिया और मनोरंजन बाजार अगले पांच वर्षों में तेजी से बढऩे वाला है। डिजिटल विज्ञापन, ओटीटी वीडियो, गेमिंग और ई-स्पोर्ट्स जैसे क्षेत्र इस वृद्धि के सबसे बड़े आधार बनेंगे। कन्सल्टेंट कंपनी पीडब्ल्यूसी इंडिया के मुताबिक, भारत का मीडिया और मनोरंजन बाजार 2025 के 25.7 बिलियन डॉलर से बढक़र 2030 तक 36.7 बिलियन डॉलर हो सकता है। इस दौरान इसकी सीएजीआर 7.4 प्रतिशत रहने का अनुमान है, जो करीब 4 प्रतिशत की ग्लोबल एवरेज ग्रोथ दर से काफी अधिक है। पीडब्ल्यूसी की ग्लोबल एंटरटेनमेंट एंड मीडिया आउटलुक 2026-30 रिपोर्ट के अनुसार, भारत में सामग्री, संपर्क व्यवस्था और तकनीक का तेजी से मेल हो रहा है। डिजिटल तंत्र अब केवल सामग्री देखने तक सीमित नहीं है, बल्कि कार्यक्रम निर्माण और कमाई के नए मॉडल भी मीडिया कंपनियों को दर्शकों के साथ अधिक गहरा जुड़ाव बनाने और अलग-अलग प्लेटफॉर्म पर उनसे कमाई करने का अवसर दे रहे हैं।

    पीडब्ल्यूसी इंडिया के पार्टनर और मीडिया, मनोरंजन एवं खेल क्षेत्र के प्रमुख के मुताबिक, भारत पहले ही बड़े पैमाने पर दर्शक जुटाने की अपनी क्षमता साबित कर चुका है। अब अगली चुनौती इस बड़े दर्शक वर्ग को लगातार जुड़े रहने वाले दर्शकों में बदलने की है। एआई कंटेंट बनाने के तरीके को बदल रही है, जबकि क्षेत्रीय कहानी कहने की शैली और नए तरह के अनुभव दर्शकों के साथ गहरे जुड़ाव की संभावनाएं खोल रहे हैं। भारत में इंटरनेट विज्ञापन अगले पांच वर्षों में मीडिया और मनोरंजन उद्योग की वृद्धि में सबसे बड़ा योगदान देगा। इसका बाजार 2025 के करीब 7.5 बिलियन डॉलर से बढक़र 2030 तक 14.3 बिलियन डॉलर होने का अनुमान है। यानी यह लगभग दोगुना हो जाएगा और इसकी चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर 13.9 प्रतिशत रह सकती है। खोज आधारित और वीडियो विज्ञापन इस वृद्धि का बड़ा हिस्सा होंगे। स्मार्टफोन, तेज इंटरनेट और डिजिटल सामग्री की बढ़ती खपत ने कंपनियों को अपने विज्ञापन बजट का ज्यादा हिस्सा ऑनलाइन प्लेटफॉर्म की ओर ले जाने के लिए प्रेरित किया है।
    ओटीटी की रफ्तार भी रहेगी तेज
    भारत का ओटीटी बाजार वर्ष 2025 के 2.2 बिलियन डॉलर से बढक़र 2030 तक 3.6 बिलियन डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है। इस क्षेत्र की चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर करीब 10.2 प्रतिशत रह सकती है। प्रसारण मंच अब केवल सदस्यता मॉडल पर निर्भर नहीं हैं। 
    कम कीमत वाले मोबाइल-केंद्रित पैकेज और विज्ञापन आधारित सदस्यता मॉडल भी तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं। कंपनियां विज्ञापन और सदस्यता को एक साथ इस्तेमाल कर ज्यादा दर्शकों तक पहुंच बनाने की कोशिश कर रही हैं। पीडब्ल्यूसी के मुताबिक, मंच अब विज्ञापन और सदस्यता से आगे भी कमाई के रास्ते तलाश रहे हैं। 
    गेमिंग और ई-स्पोर्ट्स 
    में बड़ा उछाल
    वीडियो गेम और ई-स्पोर्ट्स भी भारत के तेजी से बढ़ते क्षेत्रों में शामिल हैं। इनका बाजार 2025 के 1.5 बिलियन डॉलर से बढक़र 2030 तक 2.6 बिलियन डॉलर होने का अनुमान है। खेल के दौरान दिखाए जाने वाले विज्ञापन, प्रायोजन और बार-बार होने वाली कमाई के मॉडल गेमिंग कंपनियों के लिए आय के नए रास्ते खोलेंगे। बढ़ती इंटरनेट पहुंच और युवा डिजिटल दर्शक इस बदलाव को और मजबूत कर रहे हैं।
    मीडिया उद्योग की वृद्धि सिर्फ सामग्री पर निर्भर नहीं होगी। आंकड़ा संपर्क सेवा से होने वाली आय भी तेजी से बढऩे का अनुमान है। यह 2025 के करीब 36.5 बिलियन डॉलर से बढक़र 2030 तक 58.6 बिलियन डॉलर हो सकती है।  
    मोबाइल, ब्रॉडबैंड, फाइबर और 5जी तकनीक को अपनाने की बढ़ती रफ्तार इस वृद्धि को मजबूती देगी। बेहतर संपर्क व्यवस्था का मतलब ज्यादा वीडियो देखने, गेम खेलने, डिजिटल विज्ञापन और ऑनलाइन मनोरंजन की सुविधा है।
    सिनेमा और पारंपरिक 
    मीडिया भी रहेंगे प्रासंगिक
    डिजिटल मीडिया के तेज विस्तार के बावजूद सिनेमा, टेलीविजन और प्रिंट मीडिया पूरी तरह खत्म नहीं होंगे। भारत में सिनेमा क्षेत्र की वृद्धि करीब 3.3 प्रतिशत सालाना रहने का अनुमान है, जबकि ग्लोबल वृद्धि करीब 3.4 प्रतिशत हो सकती है। पारंपरिक टेलीविजन का भारत में बाजार करीब 1 प्रतिशत सालाना बढ़ सकता है, जबकि ग्लोबल स्तर पर इसमें 1.1 प्रतिशत की गिरावट का अनुमान है। वहीं भारत का प्रिंट मीडिया करीब 3.2 प्रतिशत सालाना की दर से बढ़ सकता है, जबकि ग्लोबल प्रिंट बाजार में करीब 0.5 प्रतिशत गिरावट की संभावना है।
    पीडब्ल्यूसी के मुताबिक, वृद्धि सिर्फ डिजिटल मीडिया तक सीमित नहीं रहेगी। पारंपरिक मीडिया से होने वाली आय भी 2025 के 7.2 बिलियन डॉलर से बढक़र 2030 तक 7.5 बिलियन डॉलर तक पहुंच सकती है। वहीं समाचार पत्रों से होने वाली आय 2025 के करीब 3 बिलियन डॉलर से बढक़र 2030 तक 3.5 बिलियन डॉलर होने का अनुमान है। यानी डिजिटल बदलाव के बावजूद भारत में पारंपरिक मीडिया के लिए भी मजबूत दर्शक और विज्ञापन बाजार बना रहेगा।
    दर्शक एक्सपीरियंस पर 
    खर्च करने को तैयार
    भारत में उपभोक्ताओं की सिनेमा, संगीत और खेल जैसे मनोरंजन पर खर्च करने की इच्छा भी बढ़ रही है। प्रीमियम टिकट, आतिथ्य सेवाएं और आईमैक्स तथा 4डीएक्स जैसे प्रारूप अतिरिक्त आय पैदा कर रहे हैं। 
    भारत के मीडिया और मनोरंजन क्षेत्र के लिए अगला दौर केवल कितने लोग देख रहे हैं का नहीं, बल्कि लोग कितनी देर जुड़े हैं और उस जुड़ाव से कितनी कमाई हो रही है का होगा।

Share
ग्रोथ टे्रक पर बनी रहेगी मीडिया और एंटरटेंमेंट इंडस्ट्री

 भारत का मीडिया और मनोरंजन बाजार अगले पांच वर्षों में तेजी से बढऩे वाला है। डिजिटल विज्ञापन, ओटीटी वीडियो, गेमिंग और ई-स्पोर्ट्स जैसे क्षेत्र इस वृद्धि के सबसे बड़े आधार बनेंगे। कन्सल्टेंट कंपनी पीडब्ल्यूसी इंडिया के मुताबिक, भारत का मीडिया और मनोरंजन बाजार 2025 के 25.7 बिलियन डॉलर से बढक़र 2030 तक 36.7 बिलियन डॉलर हो सकता है। इस दौरान इसकी सीएजीआर 7.4 प्रतिशत रहने का अनुमान है, जो करीब 4 प्रतिशत की ग्लोबल एवरेज ग्रोथ दर से काफी अधिक है। पीडब्ल्यूसी की ग्लोबल एंटरटेनमेंट एंड मीडिया आउटलुक 2026-30 रिपोर्ट के अनुसार, भारत में सामग्री, संपर्क व्यवस्था और तकनीक का तेजी से मेल हो रहा है। डिजिटल तंत्र अब केवल सामग्री देखने तक सीमित नहीं है, बल्कि कार्यक्रम निर्माण और कमाई के नए मॉडल भी मीडिया कंपनियों को दर्शकों के साथ अधिक गहरा जुड़ाव बनाने और अलग-अलग प्लेटफॉर्म पर उनसे कमाई करने का अवसर दे रहे हैं।

पीडब्ल्यूसी इंडिया के पार्टनर और मीडिया, मनोरंजन एवं खेल क्षेत्र के प्रमुख के मुताबिक, भारत पहले ही बड़े पैमाने पर दर्शक जुटाने की अपनी क्षमता साबित कर चुका है। अब अगली चुनौती इस बड़े दर्शक वर्ग को लगातार जुड़े रहने वाले दर्शकों में बदलने की है। एआई कंटेंट बनाने के तरीके को बदल रही है, जबकि क्षेत्रीय कहानी कहने की शैली और नए तरह के अनुभव दर्शकों के साथ गहरे जुड़ाव की संभावनाएं खोल रहे हैं। भारत में इंटरनेट विज्ञापन अगले पांच वर्षों में मीडिया और मनोरंजन उद्योग की वृद्धि में सबसे बड़ा योगदान देगा। इसका बाजार 2025 के करीब 7.5 बिलियन डॉलर से बढक़र 2030 तक 14.3 बिलियन डॉलर होने का अनुमान है। यानी यह लगभग दोगुना हो जाएगा और इसकी चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर 13.9 प्रतिशत रह सकती है। खोज आधारित और वीडियो विज्ञापन इस वृद्धि का बड़ा हिस्सा होंगे। स्मार्टफोन, तेज इंटरनेट और डिजिटल सामग्री की बढ़ती खपत ने कंपनियों को अपने विज्ञापन बजट का ज्यादा हिस्सा ऑनलाइन प्लेटफॉर्म की ओर ले जाने के लिए प्रेरित किया है।
ओटीटी की रफ्तार भी रहेगी तेज
भारत का ओटीटी बाजार वर्ष 2025 के 2.2 बिलियन डॉलर से बढक़र 2030 तक 3.6 बिलियन डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है। इस क्षेत्र की चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर करीब 10.2 प्रतिशत रह सकती है। प्रसारण मंच अब केवल सदस्यता मॉडल पर निर्भर नहीं हैं। 
कम कीमत वाले मोबाइल-केंद्रित पैकेज और विज्ञापन आधारित सदस्यता मॉडल भी तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं। कंपनियां विज्ञापन और सदस्यता को एक साथ इस्तेमाल कर ज्यादा दर्शकों तक पहुंच बनाने की कोशिश कर रही हैं। पीडब्ल्यूसी के मुताबिक, मंच अब विज्ञापन और सदस्यता से आगे भी कमाई के रास्ते तलाश रहे हैं। 
गेमिंग और ई-स्पोर्ट्स 
में बड़ा उछाल
वीडियो गेम और ई-स्पोर्ट्स भी भारत के तेजी से बढ़ते क्षेत्रों में शामिल हैं। इनका बाजार 2025 के 1.5 बिलियन डॉलर से बढक़र 2030 तक 2.6 बिलियन डॉलर होने का अनुमान है। खेल के दौरान दिखाए जाने वाले विज्ञापन, प्रायोजन और बार-बार होने वाली कमाई के मॉडल गेमिंग कंपनियों के लिए आय के नए रास्ते खोलेंगे। बढ़ती इंटरनेट पहुंच और युवा डिजिटल दर्शक इस बदलाव को और मजबूत कर रहे हैं।
मीडिया उद्योग की वृद्धि सिर्फ सामग्री पर निर्भर नहीं होगी। आंकड़ा संपर्क सेवा से होने वाली आय भी तेजी से बढऩे का अनुमान है। यह 2025 के करीब 36.5 बिलियन डॉलर से बढक़र 2030 तक 58.6 बिलियन डॉलर हो सकती है।  
मोबाइल, ब्रॉडबैंड, फाइबर और 5जी तकनीक को अपनाने की बढ़ती रफ्तार इस वृद्धि को मजबूती देगी। बेहतर संपर्क व्यवस्था का मतलब ज्यादा वीडियो देखने, गेम खेलने, डिजिटल विज्ञापन और ऑनलाइन मनोरंजन की सुविधा है।
सिनेमा और पारंपरिक 
मीडिया भी रहेंगे प्रासंगिक
डिजिटल मीडिया के तेज विस्तार के बावजूद सिनेमा, टेलीविजन और प्रिंट मीडिया पूरी तरह खत्म नहीं होंगे। भारत में सिनेमा क्षेत्र की वृद्धि करीब 3.3 प्रतिशत सालाना रहने का अनुमान है, जबकि ग्लोबल वृद्धि करीब 3.4 प्रतिशत हो सकती है। पारंपरिक टेलीविजन का भारत में बाजार करीब 1 प्रतिशत सालाना बढ़ सकता है, जबकि ग्लोबल स्तर पर इसमें 1.1 प्रतिशत की गिरावट का अनुमान है। वहीं भारत का प्रिंट मीडिया करीब 3.2 प्रतिशत सालाना की दर से बढ़ सकता है, जबकि ग्लोबल प्रिंट बाजार में करीब 0.5 प्रतिशत गिरावट की संभावना है।
पीडब्ल्यूसी के मुताबिक, वृद्धि सिर्फ डिजिटल मीडिया तक सीमित नहीं रहेगी। पारंपरिक मीडिया से होने वाली आय भी 2025 के 7.2 बिलियन डॉलर से बढक़र 2030 तक 7.5 बिलियन डॉलर तक पहुंच सकती है। वहीं समाचार पत्रों से होने वाली आय 2025 के करीब 3 बिलियन डॉलर से बढक़र 2030 तक 3.5 बिलियन डॉलर होने का अनुमान है। यानी डिजिटल बदलाव के बावजूद भारत में पारंपरिक मीडिया के लिए भी मजबूत दर्शक और विज्ञापन बाजार बना रहेगा।
दर्शक एक्सपीरियंस पर 
खर्च करने को तैयार
भारत में उपभोक्ताओं की सिनेमा, संगीत और खेल जैसे मनोरंजन पर खर्च करने की इच्छा भी बढ़ रही है। प्रीमियम टिकट, आतिथ्य सेवाएं और आईमैक्स तथा 4डीएक्स जैसे प्रारूप अतिरिक्त आय पैदा कर रहे हैं। 
भारत के मीडिया और मनोरंजन क्षेत्र के लिए अगला दौर केवल कितने लोग देख रहे हैं का नहीं, बल्कि लोग कितनी देर जुड़े हैं और उस जुड़ाव से कितनी कमाई हो रही है का होगा।


Label

PREMIUM

CONNECT WITH US

X
Login
X

Login

X

Click here to make payment and subscribe
X

Please subscribe to view this section.

X

Please become paid subscriber to read complete news