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Daily Business Newspaper | A Knowledge Powerhouse in Hindi

05-09-2026

Gen Z ने ब्यूटी मार्केट में ला दी है जबरदस्त क्रांति

  •  भारत का ब्यूटी एंड पर्सनल केयर मार्केट इन दिनों दुनियाभर के इन्वेस्टर्स का ध्यान खींच रहा है। खासतौर पर देश की नई पीढ़ी यानी जेन जी इस उद्योग को तेजी से आगे बढ़ाने में बड़ी भूमिका निभा रही है। इन्डियन कॉस्मेटिक कंपनियों में दुनिया की बड़ी कंपनियों और निवेशकों की दिलचस्पी लगातार बढ़ रही है। इसी साल मार्च में अमेरिकी लग्जरी ब्यूटी प्रोडक्ट्स कंपनी एस्टी लॉडर ने भारतीय आयुर्वेदिक सौंदर्य कंपनी फॉरेस्ट एसेंशियल्स का पूरी तरह अधिग्रहण कर लिया। इसके बाद जून में फ्रांस की दिग्गज कंपनी लोरियल समूह ने डिजिटल पर्सनल केयर कंपनी इनोविस्ट में बहुमत हिस्सेदारी खरीदी। वहीं यूनिलीवर भी गत कुछ वर्षों में अपने निवेश विभाग के माध्यम से भारत की सौंदर्य कंपनियों में कम से कम चार निवेश कर चुकी है। वर्ष 2000 के आसपास हिमालय की तलहटी में एक छोटे से गैराज से शुरू हुई फॉरेस्ट एसेंशियल्स की कहानी भी बेहद खास है। दो बच्चों की सिंगल मदर और उद्यमी मीरा कुलकर्णी ने इसकी शुरुआत की थी। करीब दो दशकों में यह छोटी-सी शुरुआत एक अरबों डॉलर की कंपनी बन चुकी है और आज भारत के साथ-साथ दुनिया के कई बाजारों में अपनी पहचान बना चुकी है। फॉरेस्ट एसेंशियल्स की सफलता उस बड़े बदलाव की झलक है, जो भारत के सौंदर्य उद्योग में देखने को मिल रहा है। भारत की कॉस्टमेटिक इंडस्ट्री 2025 में करीब 23 अरब डॉलर की थी। अनुमान है कि इस दशक के अंत तक यह लगभग दोगुना होकर 40 अरब डॉलर तक पहुंच जाएगी। खास बात यह है कि सौंदर्य उद्योग के बढऩे की रफ्तार देश की अर्थव्यवस्था और पूरे रिटेल बाजार की तुलना में करीब दोगुनी रहने की उम्मीद है। इस तेज वृद्धि के पीछे सबसे बड़ी वजह है—लोगों की बढ़ती आय  और खर्च करने की क्षमता। कन्सल्टेंट कंपनी रेडसीर के अनुसार, भारत की प्रति व्यक्ति आय 2019 में 2,000 डॉलर के स्तर को पार कर गई थी। आमतौर पर इस स्तर के बाद लोग केवल जरूरी सामान पर ही नहीं, बल्कि अपनी पसंद, सुंदरता और जीवनशैली से जुड़ी चीजों पर भी तेजी से खर्च करने लगते हैं। 2030 तक भारत में करीब 15.5 करोड़ परिवारों की सालाना आमदनी 9,500 डॉलर से अधिक होने का अनुमान है। इससे आने वाले वर्षों में सौंदर्य और व्यक्तिगत देखभाल से जुड़ी चीजों पर खर्च और तेजी से बढ़ सकता है। रेडसीर के पार्टनर के मुताबिक, पहले भारत में सौंदर्य उत्पादों पर खर्च बहुत सीमित था, क्योंकि लोगों के पास पर्याप्त स्पेंडिंग पॉवर नहीं थी। उनके अनुसार, पहले ज्यादातर लोग सर्व-उपयोगी साबुन या चेहरे के पाउडर जैसी बुनियादी चीजों तक ही सीमित थे। लेकिन अब बढ़ती आमदनी, बेहतर उपलब्धता, आसान पहुंच और उत्पादों की जानकारी ने पूरा परिदृश्य बदल दिया है। इस बदलाव में इंटरनेट और सामाजिक माध्यमों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण रही है।

    इंस्टाग्राम, यूट्यूब और प्रभावशाली लोगों के माध्यम से आज सौंदर्य कंपनियां सीधे अपने ग्राहकों तक पहुंच सकती हैं। दूसरी ओर, ग्राहक भी अब केवल विज्ञापन देखकर उत्पाद नहीं खरीदते। वे उसके कंटेंट, उपयोग, लोगों की राय और परिणाम के बारे में खुद जानकारी जुटाते हैं। आज का युवा ग्राहक जानना चाहता है कि किसी उत्पाद में कौन-से तत्व हैं, वे त्वचा पर कैसे असर करते हैं और वास्तव में उसकी जरूरत क्या है। ऑनलाइन परचेज बनेगी विकास का बड़ा आधार रेडसीर के अनुमान के मुताबिक, 2030 तक भारत में सौंदर्य उत्पादों पर होने वाले कुल खर्च का करीब 35 प्रतिशत हिस्सा ऑनलाइन खरीदारी के माध्यम से आने की उम्मीद है। पांच साल पहले यह आंकड़ा केवल करीब 8 प्रतिशत था। यानी सौंदर्य उत्पादों की खरीदारी अब केवल बड़े बाजारों, दुकानों और प्रसाधन केंद्रों तक सीमित नहीं रहने वाली। मोबाइल पर किसी उत्पाद का वीडियो देखने से लेकर उसकी जानकारी पढऩे और उसी समय उसे खरीद लेने तक—पूरा खरीदारी अनुभव डिजिटल होता जा रहा है। ब्यूटी प्रोडक्ट्स इंडस्ट्री की इस तेज वृद्धि में कोरोना महामारी ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। महामारी के दौरान लोग घरों में ज्यादा समय बिताने लगे और उनका ध्यान आत्म-देखभाल और त्वचा की देखभाल की ओर बढ़ा। इसी समय भारत के बड़े शहरों के साथ-साथ दूसरे और तीसरे दर्जे के शहरों में भी इंटरनेट और डिजिटल सेवाओं का तेजी से विस्तार हुआ। हाइफन की को-फाउंडर और एमकैफीन चलाने वाली वैशाली गुप्ता के मुताबिक, कोरोना के दौरान भारतीय ग्राहकों को सौंदर्य और त्वचा की देखभाल से जुड़ी ऐसी जानकारी मिलने लगी, जो पहले उनके लिए आसानी से उपलब्ध नहीं थी। इस बढ़ती जानकारी ने एक ऐसा ग्राहक तैयार किया जो अब सिर्फ कोई भी अच्छा दिखने वाला उत्पाद नहीं खरीदना चाहता। उसे पता है कि उसे क्या चाहिए। आज की नई पीढ़ी के लिए सुंदरता केवल श्रृंगार या त्वचा की देखभाल तक सीमित नहीं है। यह उनके जीवनशैली, अपनी पहचान और आत्म-देखभाल का हिस्सा बन चुकी है। यही वजह है कि भारतीय ग्राहक नए उत्पादों और कंपनियों को अपनाने के लिए पहले से कहीं अधिक तैयार हैं। अगर मौजूदा रुझान इसी तरह जारी रहे, तो आने वाले वर्षों में भारत केवल सौंदर्य उत्पादों का बड़ा कन्ज्युमर मार्केट ही नहीं रहेगा, बल्कि दुनिया की सौंदर्य कंपनियों और नए उत्पादों के लिए एक महत्वपूर्ण केंद्र भी बन सकता है।

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Gen Z ने ब्यूटी मार्केट में ला दी है जबरदस्त क्रांति

 भारत का ब्यूटी एंड पर्सनल केयर मार्केट इन दिनों दुनियाभर के इन्वेस्टर्स का ध्यान खींच रहा है। खासतौर पर देश की नई पीढ़ी यानी जेन जी इस उद्योग को तेजी से आगे बढ़ाने में बड़ी भूमिका निभा रही है। इन्डियन कॉस्मेटिक कंपनियों में दुनिया की बड़ी कंपनियों और निवेशकों की दिलचस्पी लगातार बढ़ रही है। इसी साल मार्च में अमेरिकी लग्जरी ब्यूटी प्रोडक्ट्स कंपनी एस्टी लॉडर ने भारतीय आयुर्वेदिक सौंदर्य कंपनी फॉरेस्ट एसेंशियल्स का पूरी तरह अधिग्रहण कर लिया। इसके बाद जून में फ्रांस की दिग्गज कंपनी लोरियल समूह ने डिजिटल पर्सनल केयर कंपनी इनोविस्ट में बहुमत हिस्सेदारी खरीदी। वहीं यूनिलीवर भी गत कुछ वर्षों में अपने निवेश विभाग के माध्यम से भारत की सौंदर्य कंपनियों में कम से कम चार निवेश कर चुकी है। वर्ष 2000 के आसपास हिमालय की तलहटी में एक छोटे से गैराज से शुरू हुई फॉरेस्ट एसेंशियल्स की कहानी भी बेहद खास है। दो बच्चों की सिंगल मदर और उद्यमी मीरा कुलकर्णी ने इसकी शुरुआत की थी। करीब दो दशकों में यह छोटी-सी शुरुआत एक अरबों डॉलर की कंपनी बन चुकी है और आज भारत के साथ-साथ दुनिया के कई बाजारों में अपनी पहचान बना चुकी है। फॉरेस्ट एसेंशियल्स की सफलता उस बड़े बदलाव की झलक है, जो भारत के सौंदर्य उद्योग में देखने को मिल रहा है। भारत की कॉस्टमेटिक इंडस्ट्री 2025 में करीब 23 अरब डॉलर की थी। अनुमान है कि इस दशक के अंत तक यह लगभग दोगुना होकर 40 अरब डॉलर तक पहुंच जाएगी। खास बात यह है कि सौंदर्य उद्योग के बढऩे की रफ्तार देश की अर्थव्यवस्था और पूरे रिटेल बाजार की तुलना में करीब दोगुनी रहने की उम्मीद है। इस तेज वृद्धि के पीछे सबसे बड़ी वजह है—लोगों की बढ़ती आय  और खर्च करने की क्षमता। कन्सल्टेंट कंपनी रेडसीर के अनुसार, भारत की प्रति व्यक्ति आय 2019 में 2,000 डॉलर के स्तर को पार कर गई थी। आमतौर पर इस स्तर के बाद लोग केवल जरूरी सामान पर ही नहीं, बल्कि अपनी पसंद, सुंदरता और जीवनशैली से जुड़ी चीजों पर भी तेजी से खर्च करने लगते हैं। 2030 तक भारत में करीब 15.5 करोड़ परिवारों की सालाना आमदनी 9,500 डॉलर से अधिक होने का अनुमान है। इससे आने वाले वर्षों में सौंदर्य और व्यक्तिगत देखभाल से जुड़ी चीजों पर खर्च और तेजी से बढ़ सकता है। रेडसीर के पार्टनर के मुताबिक, पहले भारत में सौंदर्य उत्पादों पर खर्च बहुत सीमित था, क्योंकि लोगों के पास पर्याप्त स्पेंडिंग पॉवर नहीं थी। उनके अनुसार, पहले ज्यादातर लोग सर्व-उपयोगी साबुन या चेहरे के पाउडर जैसी बुनियादी चीजों तक ही सीमित थे। लेकिन अब बढ़ती आमदनी, बेहतर उपलब्धता, आसान पहुंच और उत्पादों की जानकारी ने पूरा परिदृश्य बदल दिया है। इस बदलाव में इंटरनेट और सामाजिक माध्यमों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण रही है।

इंस्टाग्राम, यूट्यूब और प्रभावशाली लोगों के माध्यम से आज सौंदर्य कंपनियां सीधे अपने ग्राहकों तक पहुंच सकती हैं। दूसरी ओर, ग्राहक भी अब केवल विज्ञापन देखकर उत्पाद नहीं खरीदते। वे उसके कंटेंट, उपयोग, लोगों की राय और परिणाम के बारे में खुद जानकारी जुटाते हैं। आज का युवा ग्राहक जानना चाहता है कि किसी उत्पाद में कौन-से तत्व हैं, वे त्वचा पर कैसे असर करते हैं और वास्तव में उसकी जरूरत क्या है। ऑनलाइन परचेज बनेगी विकास का बड़ा आधार रेडसीर के अनुमान के मुताबिक, 2030 तक भारत में सौंदर्य उत्पादों पर होने वाले कुल खर्च का करीब 35 प्रतिशत हिस्सा ऑनलाइन खरीदारी के माध्यम से आने की उम्मीद है। पांच साल पहले यह आंकड़ा केवल करीब 8 प्रतिशत था। यानी सौंदर्य उत्पादों की खरीदारी अब केवल बड़े बाजारों, दुकानों और प्रसाधन केंद्रों तक सीमित नहीं रहने वाली। मोबाइल पर किसी उत्पाद का वीडियो देखने से लेकर उसकी जानकारी पढऩे और उसी समय उसे खरीद लेने तक—पूरा खरीदारी अनुभव डिजिटल होता जा रहा है। ब्यूटी प्रोडक्ट्स इंडस्ट्री की इस तेज वृद्धि में कोरोना महामारी ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। महामारी के दौरान लोग घरों में ज्यादा समय बिताने लगे और उनका ध्यान आत्म-देखभाल और त्वचा की देखभाल की ओर बढ़ा। इसी समय भारत के बड़े शहरों के साथ-साथ दूसरे और तीसरे दर्जे के शहरों में भी इंटरनेट और डिजिटल सेवाओं का तेजी से विस्तार हुआ। हाइफन की को-फाउंडर और एमकैफीन चलाने वाली वैशाली गुप्ता के मुताबिक, कोरोना के दौरान भारतीय ग्राहकों को सौंदर्य और त्वचा की देखभाल से जुड़ी ऐसी जानकारी मिलने लगी, जो पहले उनके लिए आसानी से उपलब्ध नहीं थी। इस बढ़ती जानकारी ने एक ऐसा ग्राहक तैयार किया जो अब सिर्फ कोई भी अच्छा दिखने वाला उत्पाद नहीं खरीदना चाहता। उसे पता है कि उसे क्या चाहिए। आज की नई पीढ़ी के लिए सुंदरता केवल श्रृंगार या त्वचा की देखभाल तक सीमित नहीं है। यह उनके जीवनशैली, अपनी पहचान और आत्म-देखभाल का हिस्सा बन चुकी है। यही वजह है कि भारतीय ग्राहक नए उत्पादों और कंपनियों को अपनाने के लिए पहले से कहीं अधिक तैयार हैं। अगर मौजूदा रुझान इसी तरह जारी रहे, तो आने वाले वर्षों में भारत केवल सौंदर्य उत्पादों का बड़ा कन्ज्युमर मार्केट ही नहीं रहेगा, बल्कि दुनिया की सौंदर्य कंपनियों और नए उत्पादों के लिए एक महत्वपूर्ण केंद्र भी बन सकता है।


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