TOP

ई - पेपर Subscribe Now!

ePaper
Subscribe Now!

Download
Android Mobile App

Daily Business Newspaper | A Knowledge Powerhouse in Hindi

03-01-2026

नए लेबर कानून में इस तरह तय होगी न्यूनतम मजदूरी

  •  देश में चार नए लेबर कानूनों को नोटिफाइड करने के एक महीने बाद केंद्र सरकार ने उनको लागू करने के लिए ड्राफ्ट जारी किया है। इन ड्राफ्ट नियमों में बताया गया है कि न्यूनतम मजदूरी की गणना कैसे की जाएगी, वीकली वर्किंग घंटे कैसे निर्धारित किए जाएंगे, ट्रेड यूनियन सदस्यता को मान्यता देने का वेरिफिकेशन कैसे किया जाएगा और राष्ट्रीय सामाजिक सुरक्षा बोर्ड की संरचना का प्रावधान किया जाएगा, जो अन्य बातों के अलावा गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स के कल्याण की देखभाल करेगा।   ड्राफ्ट रूल्स जिन पर 30-45 दिनों के भीतर जनता से सुझाव मांगे गए हैं, वे इस प्रकार है:- न्यूनतम दैनिक मजदूरी एक स्टेंडर्ड लेबर क्लास परिवार की जरूरतों पर आधारित होगी, जिसमें श्रमिक, उसका जीवनसाथी और दो बच्चे शामिल होंगे। इसमें प्रति व्यक्ति 2,700 कैलोरी का दैनिक भोजन, परिवार के लिए प्रति वर्ष 66 मीटर कपड़ों की आवश्यकता, भोजन और कपड़ों की लागत का 10 पर्सेंट मकान किराया, ईंधन, बिजली और अन्य आवश्यक वस्तुओं के लिए मजदूरी का 20 पर्सेंट और शिक्षा, स्वास्थ्य देखभाल, मनोरंजन और आकस्मिक खर्चों के लिए अतिरिक्त 25 पर्सेंट शामिल है। एक अधिकारी ने बताया कि न्यूनतम वेतन की गणना रेप्टाकोस ब्रेट जजमेंट में तय किए गए सिद्धांतों के आधार पर की जायेगी, जिसमें वेतन निर्धारण के सामाजिक-आर्थिक पहलू को ध्यान में रखा गया था। नए नियमों के प्रभावी होने के बाद न्यूनतम वेतन में वृद्धि होने की उम्मीद है। इसके अलावा, नियमों के अनुसार साप्ताहिक कार्य घंटों की सीमा 48 निर्धारित की गई है, जबकि दैनिक कार्य घंटे, रेस्ट इंटरवल और अतिरिक्त समय के बारे में अलग से सूचना दी जाएगी। गिग वर्कर्स के लिए प्रस्तावित राष्ट्रीय सामाजिक सुरक्षा बोर्ड में सांसदों, राज्यों के प्रतिनिधियों, श्रमिक और नियोक्ता संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ-साथ केंद्र के नामित व्यक्ति भी शामिल होंगे। ग्रेच्युटी के संबंध में, सरकार ने स्पष्ट किया कि ये प्रावधान 21 नवंबर, 2025 से लागू हो गए हैं, जिस दिन लेबर रूल्स लागू हुए हैं। निश्चित अवधि के कर्मचारी एक वर्ष की निरंतर सेवा के बाद ग्रेच्युटी के पात्र होंगे, जबकि स्थायी कर्मचारियों के लिए यह अवधि पहले पांच वर्ष थी। श्रम मंत्रालय ने लेबर रूल्स के अंतर्गत सैलेरी की परिभाषा को भी दोहराया। यदि मूल वेतन, महंगाई भत्ता और रिटेनिंग अलाउंस के अतिरिक्त अन्य कंपोनेंट कुल वेतन के 50 पर्सेंट से अधिक है, तो अतिरिक्त राशि को वेतन माना जाएगा। पीएलआई, ईएसओपी, रिम्बर्समेंट बेस्ड पेमेंट्स और लीव एनकैशमेंट इसमें शामिल नहीं हैं। श्रम मंत्रालय के अनुसार ट्रांजीशन पीरियर के दौरान नए नियमों का अंतिम नोटिफिकेशन जारी होने तक पुराने नियम लागू रहेंगे। मंत्रालय ने अलग से यह स्पष्ट किया है कि राज्यों को भी नए श्रम कानूनों के तहत मसौदा नियम जारी करने होंगे।

Share
नए लेबर कानून में इस तरह तय होगी न्यूनतम मजदूरी

 देश में चार नए लेबर कानूनों को नोटिफाइड करने के एक महीने बाद केंद्र सरकार ने उनको लागू करने के लिए ड्राफ्ट जारी किया है। इन ड्राफ्ट नियमों में बताया गया है कि न्यूनतम मजदूरी की गणना कैसे की जाएगी, वीकली वर्किंग घंटे कैसे निर्धारित किए जाएंगे, ट्रेड यूनियन सदस्यता को मान्यता देने का वेरिफिकेशन कैसे किया जाएगा और राष्ट्रीय सामाजिक सुरक्षा बोर्ड की संरचना का प्रावधान किया जाएगा, जो अन्य बातों के अलावा गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स के कल्याण की देखभाल करेगा।   ड्राफ्ट रूल्स जिन पर 30-45 दिनों के भीतर जनता से सुझाव मांगे गए हैं, वे इस प्रकार है:- न्यूनतम दैनिक मजदूरी एक स्टेंडर्ड लेबर क्लास परिवार की जरूरतों पर आधारित होगी, जिसमें श्रमिक, उसका जीवनसाथी और दो बच्चे शामिल होंगे। इसमें प्रति व्यक्ति 2,700 कैलोरी का दैनिक भोजन, परिवार के लिए प्रति वर्ष 66 मीटर कपड़ों की आवश्यकता, भोजन और कपड़ों की लागत का 10 पर्सेंट मकान किराया, ईंधन, बिजली और अन्य आवश्यक वस्तुओं के लिए मजदूरी का 20 पर्सेंट और शिक्षा, स्वास्थ्य देखभाल, मनोरंजन और आकस्मिक खर्चों के लिए अतिरिक्त 25 पर्सेंट शामिल है। एक अधिकारी ने बताया कि न्यूनतम वेतन की गणना रेप्टाकोस ब्रेट जजमेंट में तय किए गए सिद्धांतों के आधार पर की जायेगी, जिसमें वेतन निर्धारण के सामाजिक-आर्थिक पहलू को ध्यान में रखा गया था। नए नियमों के प्रभावी होने के बाद न्यूनतम वेतन में वृद्धि होने की उम्मीद है। इसके अलावा, नियमों के अनुसार साप्ताहिक कार्य घंटों की सीमा 48 निर्धारित की गई है, जबकि दैनिक कार्य घंटे, रेस्ट इंटरवल और अतिरिक्त समय के बारे में अलग से सूचना दी जाएगी। गिग वर्कर्स के लिए प्रस्तावित राष्ट्रीय सामाजिक सुरक्षा बोर्ड में सांसदों, राज्यों के प्रतिनिधियों, श्रमिक और नियोक्ता संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ-साथ केंद्र के नामित व्यक्ति भी शामिल होंगे। ग्रेच्युटी के संबंध में, सरकार ने स्पष्ट किया कि ये प्रावधान 21 नवंबर, 2025 से लागू हो गए हैं, जिस दिन लेबर रूल्स लागू हुए हैं। निश्चित अवधि के कर्मचारी एक वर्ष की निरंतर सेवा के बाद ग्रेच्युटी के पात्र होंगे, जबकि स्थायी कर्मचारियों के लिए यह अवधि पहले पांच वर्ष थी। श्रम मंत्रालय ने लेबर रूल्स के अंतर्गत सैलेरी की परिभाषा को भी दोहराया। यदि मूल वेतन, महंगाई भत्ता और रिटेनिंग अलाउंस के अतिरिक्त अन्य कंपोनेंट कुल वेतन के 50 पर्सेंट से अधिक है, तो अतिरिक्त राशि को वेतन माना जाएगा। पीएलआई, ईएसओपी, रिम्बर्समेंट बेस्ड पेमेंट्स और लीव एनकैशमेंट इसमें शामिल नहीं हैं। श्रम मंत्रालय के अनुसार ट्रांजीशन पीरियर के दौरान नए नियमों का अंतिम नोटिफिकेशन जारी होने तक पुराने नियम लागू रहेंगे। मंत्रालय ने अलग से यह स्पष्ट किया है कि राज्यों को भी नए श्रम कानूनों के तहत मसौदा नियम जारी करने होंगे।


Label

PREMIUM

CONNECT WITH US

X
Login
X

Login

X

Click here to make payment and subscribe
X

Please subscribe to view this section.

X

Please become paid subscriber to read complete news