भारतीय विवाह समारोह के बारे में जब हम सोचते हैं तो परिवार में गणेश स्थापना, सगाई, नाच-गाने, कपड़े-गहने, घोड़ी, बाजा, संगीत, मेहंदी-हल्दी, फेरे, वरमाला आदि रस्मों की याद ताजा हो जाती है। भारतीय विवाह देश में हो या विदेश में, यह रस्में होती हैं, तभी आयोजन का पूरा आनंद आता है। इसीलिये तो भारतीय विवाह परम्परा पूरे विश्व में प्रसिद्ध है। युवा पीढ़ी की सोच के अनुसार चलें तो वे रस्मों को अपने अनुसार नये तरीके से अवश्य कर लेते हैं लेकिन मूल भावना को टच नहीं किया जाता। हमारी संस्कृति की विशालता भी यही है। भारतीय विवाह समारोह में शुरूआत गणेश स्थापना के साथ होती है। ऐसे में उनका आर्शीवाद तो पूरे समारोह में बना रहता है। अब बात जेनरेशन जेड की करें तो उनकी सोच को नवीनता से जोड़ा जाता है लेकिन आप यह जान लें कि उनकी ओर से ‘भजन क्लबिंग’ यानि भजन नाइट की शुरूआत की गई है। यह नया ट्रेंड है कि विवाह समारोह के दौरान भजन संध्या का आयोजन किया जाने लगा है। अन्यथा अभी तक हम तेज शोर वाले संगीत आयोजन देखते आये हैं। यह जैनरेशन जेड का पार्टी करने का अनोखा लेकिन आस्था से भरा तरीका माना जा सकता है। भजन क्लबिंग नाइट फेरों के एक दिन पहले आयोजित की जा रही है। इस दौरान भजन, कीर्तन, जागरण किया जाता है। यह नया कुछ अलग करने वाला शिफ्ट कहा जा सकता है। यंग इन्डियंस इस ट्रेंड को फॉलो कर रहे हैं और नये रूप में फॉलो कर रहे हैं। यह पारम्परिक भजन संध्या से अलग है। इस दौरान गिटार, ड्रम, तबला, फ्यूजन संगीत होता है और यह भी न्यू एज म्यूजिशियंस, सिंगर्स पेश करते हैं। गेस्ट भी उनके साथ गाते हैं, झूमते हैं। इस प्रकार की भजन क्लबिंग नाइट आम दिनों में भी आयोजित की जाने लगी है। मुम्बई की ‘कीर्तन मुम्बई’ की को-फाउंडर मेघना के अनुसार भजन नाइट वेडिंग फंक्शन को ऊर्जा से भर देती है। इस दौरान सात्विक भोजन परोसा जाता है। भजन नाइट का आनंद परिवार के बड़े-बुजुर्ग, बच्चे, यंग गु्रप्स, फे्रन्ड्स सब नजदीकी लोग लेते हैं। कपल स्वयं भी इस दौरान स्प्रिच्युअलिटी, एनर्जी को महसूस कर पाते हैं और यह नई शुरूआत करने का पॉजिटिव एटीट्यूट कहा जा सकता है। भजन नाइट करने वाले बताते हैं कि उन्हें सुनने वाले लोग यह डिमांड करते हैं कि वे अपने वेडिंग में ऐसा इवेंट करना चाहते हैं। परिवार के नजदीकी लोगों के बीच यह आयोजन किया जाता है। जिस प्रकार विवाह के दौरान शहनाई वादन किया जाता है, उसी प्रकार सवेरे वैदिक मंत्रोचार करने की शुरूआत भी की जाने लगी है। यह नया ट्रेंड है। कीर्तन मुम्बई की टीम देशभर में यह आयोजन करने लगी है। दशकों से हमने स्प्रिच्युएलिटी को बुजुर्गों से जोडक़र देखा है लेकिन इंडियन यूथ के बीच यह के्रज काफी प्रोत्साहित करने वाला है। विवाह के दौरान भजन क्लबिंग सेशन एक से डेढ़ घंटे का होता है। यह परिवार की पीढिय़ों को जोड़ता है। भगवत गीता फॉर ऑल के फाउंडर और यंग एंटरपे्रन्योर पृथ्वीराज शेट्टी के अनुसार यह नया ट्रेंड है और इसे फॉलो करने वाले भी यंग लोग है। यह अच्छा संकेत है। संगीत को नये रूप में पेश किया जाता है। अराधना का तरीका कोई हो, मकसद एक ही होता है।