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17-06-2026

यूके ने टीनेजर के लिए सोशल मीडिया बैन किया

  •  दुनिया में बच्चों के सोशल मीडिया इस्तेमाल को रेगुलेट करने के दो कारण बताये जा रहे हैं। एक तो बच्चों को हिंसक और लत लगाने वाले कॉन्ंटेंट से बचाना और दूसरा अमेरिका पर काउंटर अटैक करना। अमेरिका के अनन्य सहयोगी यूके के प्रधानमंत्री कीअर स्टारमर ने कहा है कि उनकी सरकार 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर बैन लगा रही है। साथ ही अजनबियों के जाल में फंसने से रोकने के लिए गेमिंग और लाइव-स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म पर भी सख्त नियम लागू किए जाएंगे। ब्रिटेन का यह कदम दुनिया में टेक कंपनियों के खिलाफ सबसे बड़े रेगुलेटरी एक्शन में से एक माना जा रहा है। सरकार का कहना है कि इसका उद्देश्य बच्चों को ऑनलाइन रिस्क, मेंटल हेल्थ और अजनबियों के संपर्क में आने से बचाना है। स्टारमर ने कहा कि सोशल मीडिया के ज्यादा इस्तेमाल से बच्चों की सुरक्षा, खुशी और विकास प्रभावित हो रहा है। नए नियम स्नैपचैट, टिकटॉक और इंस्टाग्राम जैसे लोकप्रिय प्लेटफॉर्म पर लागू होंगे। इसके अलावा ऐसे गेमिंग प्लेटफॉर्म भी नियमों के दायरे में आएंगे जहां बच्चे अजनबियों के साथ बातचीत कर सकते हैं। स्टारमर ने कहा, इससे बच्चे ज्यादा सुरक्षित होंगे, ज्यादा खुश रहेंगे और उन्हें बड़े होने के लिए ज्यादा समय और स्वतंत्रता मिलेगी। ब्रिटेन ने कहा कि वह ऑस्ट्रेलिया के मॉडल को अपनाएगा। ऑस्ट्रेलिया दिसंबर में 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया बैन करने वाला दुनिया का पहला देश बना था। ब्रिटेन का यह बैन यूट्यूब, फेसबुक और एक्स आदि पर भी असर डालेगा। हालांकि वॉट्सएप और सिग्नल जैसे प्राइवेट मैसेजिंग एप को इससे बाहर रखा जा सकता है। सरकार लाइव स्ट्रीमिंग और बच्चों के साथ अजनबियों के संपर्क जैसे फीचर्स पर भी विशेष रोक लगाने की योजना बना रही है।  ब्रिटिश सरकार के अनुसार, प्रतिबंध लागू करने के लिए शुरुआती कानूनी अधिकार पहले से मौजूद हैं। सरकार इस साल के अंत तक विस्तृत नियम तैयार कर सकती है और अगले साल की शुरुआत तक प्रतिबंध लागू हो सकता है। पिछले कुछ वर्षों में ब्रिटेन ने टेक कंपनियों पर दबाव बढ़ाया है। सरकार ने एज वेरिफिकेशन, एल्गोरिदम में बदलाव और बच्चों से जुड़ा हानिकारक ब्लॉक करने के लिए कई कदम उठाए हैं। यह फैसला बच्चों के मेंटल हेल्थ को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच आया है। विशेषज्ञों का कहना है कि ज्यादा समय ऑनलाइन बिताने से बच्चों में चिंता, तनाव, नींद की समस्या और सामाजक अलगाव जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं। ब्रिटेन सरकार ने नए नियमों पर शिक्षकों, अभिभावकों और युवाओं से सलाह ली। उसे 1.16 लाख से ज्यादा प्रतिक्रियाएं मिलीं। प्रतिक्रिया देने वाले अभिभावकों में 83 परसेंट से ज्यादा ने कहा कि सोशल मीडिया के नुकसान इसके फायदे से अधिक हैं। वहीं करीब 90 परसेंट अभिभावकों ने सोशल मीडिया इस्तेमाल की न्यूनतम उम्र 16 साल करने का समर्थन किया। हालांकि कुछ मनोवैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं का कहना है कि केवल प्रतिबंध लगाने से समस्या पूरी तरह हल होगी। कुछ बच्चों ने भी कहा कि सोशल मीडिया उनके लिए मनोरंजन और संपर्क का माध्यम है।

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यूके ने टीनेजर के लिए सोशल मीडिया बैन किया

 दुनिया में बच्चों के सोशल मीडिया इस्तेमाल को रेगुलेट करने के दो कारण बताये जा रहे हैं। एक तो बच्चों को हिंसक और लत लगाने वाले कॉन्ंटेंट से बचाना और दूसरा अमेरिका पर काउंटर अटैक करना। अमेरिका के अनन्य सहयोगी यूके के प्रधानमंत्री कीअर स्टारमर ने कहा है कि उनकी सरकार 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर बैन लगा रही है। साथ ही अजनबियों के जाल में फंसने से रोकने के लिए गेमिंग और लाइव-स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म पर भी सख्त नियम लागू किए जाएंगे। ब्रिटेन का यह कदम दुनिया में टेक कंपनियों के खिलाफ सबसे बड़े रेगुलेटरी एक्शन में से एक माना जा रहा है। सरकार का कहना है कि इसका उद्देश्य बच्चों को ऑनलाइन रिस्क, मेंटल हेल्थ और अजनबियों के संपर्क में आने से बचाना है। स्टारमर ने कहा कि सोशल मीडिया के ज्यादा इस्तेमाल से बच्चों की सुरक्षा, खुशी और विकास प्रभावित हो रहा है। नए नियम स्नैपचैट, टिकटॉक और इंस्टाग्राम जैसे लोकप्रिय प्लेटफॉर्म पर लागू होंगे। इसके अलावा ऐसे गेमिंग प्लेटफॉर्म भी नियमों के दायरे में आएंगे जहां बच्चे अजनबियों के साथ बातचीत कर सकते हैं। स्टारमर ने कहा, इससे बच्चे ज्यादा सुरक्षित होंगे, ज्यादा खुश रहेंगे और उन्हें बड़े होने के लिए ज्यादा समय और स्वतंत्रता मिलेगी। ब्रिटेन ने कहा कि वह ऑस्ट्रेलिया के मॉडल को अपनाएगा। ऑस्ट्रेलिया दिसंबर में 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया बैन करने वाला दुनिया का पहला देश बना था। ब्रिटेन का यह बैन यूट्यूब, फेसबुक और एक्स आदि पर भी असर डालेगा। हालांकि वॉट्सएप और सिग्नल जैसे प्राइवेट मैसेजिंग एप को इससे बाहर रखा जा सकता है। सरकार लाइव स्ट्रीमिंग और बच्चों के साथ अजनबियों के संपर्क जैसे फीचर्स पर भी विशेष रोक लगाने की योजना बना रही है।  ब्रिटिश सरकार के अनुसार, प्रतिबंध लागू करने के लिए शुरुआती कानूनी अधिकार पहले से मौजूद हैं। सरकार इस साल के अंत तक विस्तृत नियम तैयार कर सकती है और अगले साल की शुरुआत तक प्रतिबंध लागू हो सकता है। पिछले कुछ वर्षों में ब्रिटेन ने टेक कंपनियों पर दबाव बढ़ाया है। सरकार ने एज वेरिफिकेशन, एल्गोरिदम में बदलाव और बच्चों से जुड़ा हानिकारक ब्लॉक करने के लिए कई कदम उठाए हैं। यह फैसला बच्चों के मेंटल हेल्थ को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच आया है। विशेषज्ञों का कहना है कि ज्यादा समय ऑनलाइन बिताने से बच्चों में चिंता, तनाव, नींद की समस्या और सामाजक अलगाव जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं। ब्रिटेन सरकार ने नए नियमों पर शिक्षकों, अभिभावकों और युवाओं से सलाह ली। उसे 1.16 लाख से ज्यादा प्रतिक्रियाएं मिलीं। प्रतिक्रिया देने वाले अभिभावकों में 83 परसेंट से ज्यादा ने कहा कि सोशल मीडिया के नुकसान इसके फायदे से अधिक हैं। वहीं करीब 90 परसेंट अभिभावकों ने सोशल मीडिया इस्तेमाल की न्यूनतम उम्र 16 साल करने का समर्थन किया। हालांकि कुछ मनोवैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं का कहना है कि केवल प्रतिबंध लगाने से समस्या पूरी तरह हल होगी। कुछ बच्चों ने भी कहा कि सोशल मीडिया उनके लिए मनोरंजन और संपर्क का माध्यम है।


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