दुनिया का सबसे बड़ा लक्जरी ब्रांड हाउस एक अदना सी शराब कंपनी से हार गया। यह कहानी है फ्रांस की करीब 100 बिलियन डॉलर के रेवेन्यू वाली लुई वित्तॉन अदालत में पुर्तगाल के एक छोटे से फैमिली लिकर ब्रांड से मात खा बैठी। मामला पुर्तगाल के छोटे शहर मोनसाओ की एक पारिवारिक कंपनी लिकोरेस डो वाले का था। यह कंपनी लिकर, शहद, जैम और बिस्कुट जैसे प्रोडक्ट बनाती है। कंपनी अपने ब्रांड के लिए लुई वित्तॉन की ही तरह एलवी अक्षरों का उपयोग करती है। लुई वित्तॉन का दावा था कि पुर्तगाली कंपनी का एलवी लोगो उसके वल्र्ड फेमस एलवी मोनोग्राम से बहुत मिलता-जुलता है। आरोप था कि छोटा ब्रांड उसकी प्रतिष्ठा और पहचान का गलत फायदा उठाने की कोशिश कर रहा है और लुई वित्तॉन ने एलवी ने ट्रेडमार्क रजिस्ट्रेशन को चैलेंज कर दिया। करीब एक साल चली अदालती कार्यवाही के बाद पुर्तगाल की अदालत ने फैसला लिकोरेस डो वाले के पक्ष में सुनाया। अदालत के फैसले के बाद कंपनी के संस्थापकों ने कहा कि एल और वी अक्षर किसी एक कंपनी की निजी संपत्ति नहीं हैं। यह मामला केवल दो कंपनियों के बीच विवाद नहीं था। यह बौद्धिक संपदा अधिकारों और ट्रेडमार्क सुरक्षा की सीमाओं पर भी एक महत्वपूर्ण उदाहरण बन गया। बड़ी कंपनियां अपने ब्रांड की रक्षा के लिए अक्सर आक्रामक कानूनी कदम उठाती हैं। हालांकि इस मामले में अदालत ने माना कि केवल एलवी अक्षरों का उपयोग अपने आप में लुई वित्तॉन के ट्रेडमार्क विशेष अधिकार का उल्लंघन नहीं है। वह भी तब जब दोनों कंपनियां अलग-अलग कैटेगरी में काम करती हैं। इस फैसले से पता चलता है कि ब्रांड पावर और बिलियन डॉलर के मार्केट वेल्यूएशन के बावजूद बड़ी कंपनियां हमेशा अदालत में नहीं जीततीं।