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06-06-2026

डिजिटल ह्यूमन और वर्चुअल रोमांस, चीन में सब लक बाई चांस

  •  चीन अब एआई और वर्चुअल वल्र्ड पर कंट्रोल टाइट करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। देश की इंटरनेट रेगुलेटर एजेंसी साइबरस्पेस एडमिनिस्ट्रेशन ऑफ चाइना ने डिजिटल ह्यूमन और बच्चों को लत लगाने वाली ऑनलाइन सर्विसेस को कंट्रोल करने के लिए नए नियमों का ड्राफ्ट जारी किया है। इन प्रस्तावित नियमों का मुख्य उद्देश्य एआई तकनीक के तेजी से बढ़ते प्रभाव को कंट्रोल करना और खास तौर पर बच्चों व टीनेजर को डिजिटल एडिक्शन, मेंटल प्रेशर और ऑनलाइन रिस्क बचाना है। डिजिटल ह्यूमन ऐसे एआई बेस्ड वर्चुअल कैरेक्टर होते हैं जो इंसानों की तरह बातचीत कर सकते हैं, खुशी और गम के भाव चेहरे से दिखा सकते हैं और इमोशनल रेस्पॉन्स (भावनात्मक प्रतिक्रिया) भी दे सकते हैं। ये टेक्नोलॉजी लाइव स्ट्रीमिंग, सोशल मीडिया, कस्टमर सर्विस, गेमिंग, ऑनलाइन एजुकेशन और एंटरटेनमेंट प्लेटफॉम्र्स पर तेजी से लोकप्रिय हो रही है। चीन में कई कंपनियां एआई आधारित वर्चुअल इन्फ्लुएंसर और डिजिटल होस्ट तैयार कर रही हैं, जो 24 घंटे यूजर्स से बातचीत कर सकते हैं। सरकार को चिंता है कि ऐसी टेक्नोलॉजी लोगों, खासकर बच्चों और युवाओं पर भावनात्मक असर डाल सकती है और वे वर्चुअल वल्र्ड पर जरूरत से ज्यादा निर्भर हो सकते हैं। नए नियमों के तहत कंपनियों को यह स्पष्ट रूप से बताना होगा कि कोई कंटेंट, वीडियो या कैरेक्टर एआई आधारित है। यानी डिजिटल ह्यूमन पर साफ लेबल लगाना जरूरी होगा ताकि लोग भ्रमित न हों और उन्हें पता रहे कि सामने कोई रियल ह्यूमन नहीं एआई कैरेक्टर है। 18 साल से कम उम्र के बच्चों को वर्चुअल रोमांटिक रिलेशनशिप जैसी सर्विसेस देने पर बैन लगाने का भी प्लान है। चीन का मानना है कि इस तरह की एआई सर्विसेस बच्चों के मानसिक विकास, सामाजिक व्यवहार और वास्तविक रिश्तों की समझ पर नकारात्मक असर डाल सकती हैं। सरकार ने यह भी प्रस्ताव रखा है कि किसी व्यक्ति की अनुमति के बिना उसकी फोटो, आवाज या निजी जानकारी का इस्तेमाल कर एआई कैरेक्टर (अवतार ) बनाना गैरकानूनी माना जाएगा। पिछले कुछ वर्ष में डीपफेक और एआई क्लोनिंग के मामलों में तेजी आई है, जहां मशहूर हस्तियों या आम लोगों के फेक  वीडियो और आवाज तैयार की गई। चीन इन टेक्नोलॉजी के दुरुपयोग को रोकना चाहता है। इसके अलावा डिजिटल ह्यूमन का उपयोग पहचान सत्यापन प्रणाली को चकमा देनेे, बैंकिंग फ्रॉड या फर्जी पहचान बनाने के लिए नहीं किया जा सकेगा। नियमों में ऐसे एआई कंटेंट पर भी सख्त रोक लगाने का प्रस्ताव है जिनमें हिंसा, अश्लीलता, अलगाववाद, भेदभाव या राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा पैदा कर सकता हो। चीन सरकार पहले से ही इंटरनेट और सोशल मीडिया कंटेंट पर कड़ी नजर रखती है, और अब एआई प्लेटफॉम्र्स को भी उसी ढांचे में लाने की तैयारी कर रही है। चीन खास तौर पर बच्चों में बढ़ती डिजिटल लत को लेकर चिंतित है। पिछले कुछ वर्षों में सरकार ऑनलाइन गेमिंग और सोशल मीडिया इस्तेमाल पर कई प्रतिबंध लगा चुकी है। नए एआई नियमों के तहत कंपनियों को ऐसे एल्गोरिद्म या फीचर्स बनाने से रोका जाएगा जो बच्चों को लंबे समय तक स्क्रीन पर बनाए रखें या भावनात्मक रूप से उनसे जुड़ाव पैदा करें। यदि किसी यूजर में आत्महत्या, आत्म-हानि या मानसिक तनाव जैसे संकेत दिखाई देते हैं, तो प्लेटफॉम्र्स को  सहायता उपलब्ध कराने के निर्देश दिए जा सकते हैं। एनेलिस्ट्स का मानना है कि चीन एआई में ग्लोबल लीडरशिप हासिल करना चाहता है लेकिन वह इस तकनीक पर सख्त सरकारी नियंत्रण भी बनाए रखना चाहता है। बीजिंग के लिए एआई केवल तकनीकी विकास का विषय नहीं, बल्कि नेशनल सिक्यॉरिटी, सामाजिक स्थिरता व डिजिटल अर्थव्यवस्था से जुड़ा स्ट्रेटेजिक क्षेत्र बन चुका है। यही वजह है कि चीन दुनिया के सबसे कड़े एआई नियम लागू करने वाले देशों में तेजी से शामिल होता जा रहा है।

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डिजिटल ह्यूमन और वर्चुअल रोमांस, चीन में सब लक बाई चांस

 चीन अब एआई और वर्चुअल वल्र्ड पर कंट्रोल टाइट करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। देश की इंटरनेट रेगुलेटर एजेंसी साइबरस्पेस एडमिनिस्ट्रेशन ऑफ चाइना ने डिजिटल ह्यूमन और बच्चों को लत लगाने वाली ऑनलाइन सर्विसेस को कंट्रोल करने के लिए नए नियमों का ड्राफ्ट जारी किया है। इन प्रस्तावित नियमों का मुख्य उद्देश्य एआई तकनीक के तेजी से बढ़ते प्रभाव को कंट्रोल करना और खास तौर पर बच्चों व टीनेजर को डिजिटल एडिक्शन, मेंटल प्रेशर और ऑनलाइन रिस्क बचाना है। डिजिटल ह्यूमन ऐसे एआई बेस्ड वर्चुअल कैरेक्टर होते हैं जो इंसानों की तरह बातचीत कर सकते हैं, खुशी और गम के भाव चेहरे से दिखा सकते हैं और इमोशनल रेस्पॉन्स (भावनात्मक प्रतिक्रिया) भी दे सकते हैं। ये टेक्नोलॉजी लाइव स्ट्रीमिंग, सोशल मीडिया, कस्टमर सर्विस, गेमिंग, ऑनलाइन एजुकेशन और एंटरटेनमेंट प्लेटफॉम्र्स पर तेजी से लोकप्रिय हो रही है। चीन में कई कंपनियां एआई आधारित वर्चुअल इन्फ्लुएंसर और डिजिटल होस्ट तैयार कर रही हैं, जो 24 घंटे यूजर्स से बातचीत कर सकते हैं। सरकार को चिंता है कि ऐसी टेक्नोलॉजी लोगों, खासकर बच्चों और युवाओं पर भावनात्मक असर डाल सकती है और वे वर्चुअल वल्र्ड पर जरूरत से ज्यादा निर्भर हो सकते हैं। नए नियमों के तहत कंपनियों को यह स्पष्ट रूप से बताना होगा कि कोई कंटेंट, वीडियो या कैरेक्टर एआई आधारित है। यानी डिजिटल ह्यूमन पर साफ लेबल लगाना जरूरी होगा ताकि लोग भ्रमित न हों और उन्हें पता रहे कि सामने कोई रियल ह्यूमन नहीं एआई कैरेक्टर है। 18 साल से कम उम्र के बच्चों को वर्चुअल रोमांटिक रिलेशनशिप जैसी सर्विसेस देने पर बैन लगाने का भी प्लान है। चीन का मानना है कि इस तरह की एआई सर्विसेस बच्चों के मानसिक विकास, सामाजिक व्यवहार और वास्तविक रिश्तों की समझ पर नकारात्मक असर डाल सकती हैं। सरकार ने यह भी प्रस्ताव रखा है कि किसी व्यक्ति की अनुमति के बिना उसकी फोटो, आवाज या निजी जानकारी का इस्तेमाल कर एआई कैरेक्टर (अवतार ) बनाना गैरकानूनी माना जाएगा। पिछले कुछ वर्ष में डीपफेक और एआई क्लोनिंग के मामलों में तेजी आई है, जहां मशहूर हस्तियों या आम लोगों के फेक  वीडियो और आवाज तैयार की गई। चीन इन टेक्नोलॉजी के दुरुपयोग को रोकना चाहता है। इसके अलावा डिजिटल ह्यूमन का उपयोग पहचान सत्यापन प्रणाली को चकमा देनेे, बैंकिंग फ्रॉड या फर्जी पहचान बनाने के लिए नहीं किया जा सकेगा। नियमों में ऐसे एआई कंटेंट पर भी सख्त रोक लगाने का प्रस्ताव है जिनमें हिंसा, अश्लीलता, अलगाववाद, भेदभाव या राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा पैदा कर सकता हो। चीन सरकार पहले से ही इंटरनेट और सोशल मीडिया कंटेंट पर कड़ी नजर रखती है, और अब एआई प्लेटफॉम्र्स को भी उसी ढांचे में लाने की तैयारी कर रही है। चीन खास तौर पर बच्चों में बढ़ती डिजिटल लत को लेकर चिंतित है। पिछले कुछ वर्षों में सरकार ऑनलाइन गेमिंग और सोशल मीडिया इस्तेमाल पर कई प्रतिबंध लगा चुकी है। नए एआई नियमों के तहत कंपनियों को ऐसे एल्गोरिद्म या फीचर्स बनाने से रोका जाएगा जो बच्चों को लंबे समय तक स्क्रीन पर बनाए रखें या भावनात्मक रूप से उनसे जुड़ाव पैदा करें। यदि किसी यूजर में आत्महत्या, आत्म-हानि या मानसिक तनाव जैसे संकेत दिखाई देते हैं, तो प्लेटफॉम्र्स को  सहायता उपलब्ध कराने के निर्देश दिए जा सकते हैं। एनेलिस्ट्स का मानना है कि चीन एआई में ग्लोबल लीडरशिप हासिल करना चाहता है लेकिन वह इस तकनीक पर सख्त सरकारी नियंत्रण भी बनाए रखना चाहता है। बीजिंग के लिए एआई केवल तकनीकी विकास का विषय नहीं, बल्कि नेशनल सिक्यॉरिटी, सामाजिक स्थिरता व डिजिटल अर्थव्यवस्था से जुड़ा स्ट्रेटेजिक क्षेत्र बन चुका है। यही वजह है कि चीन दुनिया के सबसे कड़े एआई नियम लागू करने वाले देशों में तेजी से शामिल होता जा रहा है।


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