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Daily Business Newspaper | A Knowledge Powerhouse in Hindi

12-06-2026

कैश के देश जापान में स्टेबलकॉइन की चर्चा

  •  जापान के तीन सबसे बड़े बैंकिंग ग्रुप्स ने कहा है कि वे मार्च 2027 तक मिलकर स्टेबलकॉइन लॉन्च करेंगे। कैश और क्रेडिट कार्ड के देश जापान में डिजिटल पेमेंट को लेकर रुचि बढ़ रही है। जापान के तीन प्रमुख फाइनेंशियल ग्रुप्स मित्सुबिशी यूएफजे फाइनेंशियल ग्रुप (एमयूएफजी), सुमितोमो मित्सुई फाइनेंशियल ग्रुप (एसएमएफजी) और मिजुहो फाइनेंशियल ग्रुप मिलकर इस प्रोजेक्ट के लिए एक टेक्नोलॉजी फ्रेमवर्क ऑपरेशन्स और मैनेजमेंट सिस्टम डवलप करेंगे। जापान सरकार का मकसद ब्लॉकचेन टेक्नोलॉजी के जरिए पेमेंट सिस्टम को फास्ट, सेफ और आधुनिक बनाने का है। स्टेबलकॉइन एक डिजिटल करेंसी होती है जिसकी वेल्यू देश की रियल करेंसी के साथ लिंक्ड होती है। यह एक तरह से ई-रुपया ही है और स्टेबलकॉइन की वेल्यू रियल करेंसी जैसे डॉलर या येन से जुड़ी होती है। जहां बिटकॉइन जैसी क्रिप्टोकरेंसी में बहुत ज्यादा उतार-चढ़ाव होता है, जबकि स्टेबलकॉइन को स्थिर मूल्य बनाए रखने के लिए बनाया जाता है। जापानी बैंकों का प्लान ऐसा डिजिटल टोकन बनाने का है जिसकी वैल्यू येन से जुड़ी होगी। इसका इस्तेमाल ज्यादातर पेमेंट, कंपनियों के बीच लेनदेन और डिजिटल फाइनेंशियल सर्विसेस में किया जा सकता है। दुनिया भर में स्टेबलकॉइन को लेकर रुचि तेजी से बढ़ रही है। अमेरिका सहित कई देशों में डिजिटल करेंसी आधारित पेमेंट सिस्टम पर चर्चा हो रही है। हालांकि  एक्सपर्ट्स चिंता जताते हुए कहते हैं यदि स्टेबलकॉइन का इस्तेमाल बड़े स्तर पर होने लगा तो इससे पारंपरिक बैंकिंग सिस्टम और केंद्रीय बैंकों की मौद्रिक नीति पर असर पड़ सकता है। जापान की सत्तारूढ़ पार्टी के एक पैनल ने भी सुझाव दिया है कि एशिया में पेमेंट और क्लेरिंग सिस्टम के लिए येन आधारित स्टेबलकॉइन को बढ़ावा दिया जाना चाहिए। बैंकिंग क्षेत्र का मानना है कि ब्लॉकचेन आधारित पेमेंट सिस्टम से इंटरनेशनल ट्रांजेक्शन तेज हो सकते हैं, लागत घट सकती है और कंपनियों के लिए चौबीसों घंटे भुगतान संभव होगा।  जापान के पड़ौसी साउथ कोरिया में भी रियल करेंसी पर आधारित स्टेबलकॉइन को लेकर चर्चा तेज है। देश की बड़ी टेक और फाइनेंस कंपनियां कोरियाई वॉन पर आधारित स्टेबलकॉइन लाने पर विचार कर रही हैं ताकि डॉलर आधारित स्टेबलकॉइन पर निर्भरता कम की जा सके।   दूसरी ओर चीन ने पहले ही अपनी केंद्रीय बैंक डिजिटल करेंसी (डिजिटल युआन / ई-सीएनवाई) डवलप कर ली है। डिजिटल युआन चीन के केंद्रीय बैंक द्वारा जारी डिजिटल करेंसी है जबकि स्टेबलकॉइन आमतौर पर प्राइवेट कंपनियां या ंबैंक जारी करते हैं और उनकी वैल्यू किसी मुद्रा या असैट से लिंक्ड होती है।  चीन हांगकांग को डिजिटल असैट हब के रूप में डवलप कर रहा है। हांगकांग में स्टेबलकॉइन के लिए रेगुलेटरी फ्रेमवर्क तैयार किया जा रहा है। अभी ग्लोबल स्टेबलकॉइन मार्केट में अमेरिकी डॉलर आधारित टोकन का दबदबा है।

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कैश के देश जापान में स्टेबलकॉइन की चर्चा

 जापान के तीन सबसे बड़े बैंकिंग ग्रुप्स ने कहा है कि वे मार्च 2027 तक मिलकर स्टेबलकॉइन लॉन्च करेंगे। कैश और क्रेडिट कार्ड के देश जापान में डिजिटल पेमेंट को लेकर रुचि बढ़ रही है। जापान के तीन प्रमुख फाइनेंशियल ग्रुप्स मित्सुबिशी यूएफजे फाइनेंशियल ग्रुप (एमयूएफजी), सुमितोमो मित्सुई फाइनेंशियल ग्रुप (एसएमएफजी) और मिजुहो फाइनेंशियल ग्रुप मिलकर इस प्रोजेक्ट के लिए एक टेक्नोलॉजी फ्रेमवर्क ऑपरेशन्स और मैनेजमेंट सिस्टम डवलप करेंगे। जापान सरकार का मकसद ब्लॉकचेन टेक्नोलॉजी के जरिए पेमेंट सिस्टम को फास्ट, सेफ और आधुनिक बनाने का है। स्टेबलकॉइन एक डिजिटल करेंसी होती है जिसकी वेल्यू देश की रियल करेंसी के साथ लिंक्ड होती है। यह एक तरह से ई-रुपया ही है और स्टेबलकॉइन की वेल्यू रियल करेंसी जैसे डॉलर या येन से जुड़ी होती है। जहां बिटकॉइन जैसी क्रिप्टोकरेंसी में बहुत ज्यादा उतार-चढ़ाव होता है, जबकि स्टेबलकॉइन को स्थिर मूल्य बनाए रखने के लिए बनाया जाता है। जापानी बैंकों का प्लान ऐसा डिजिटल टोकन बनाने का है जिसकी वैल्यू येन से जुड़ी होगी। इसका इस्तेमाल ज्यादातर पेमेंट, कंपनियों के बीच लेनदेन और डिजिटल फाइनेंशियल सर्विसेस में किया जा सकता है। दुनिया भर में स्टेबलकॉइन को लेकर रुचि तेजी से बढ़ रही है। अमेरिका सहित कई देशों में डिजिटल करेंसी आधारित पेमेंट सिस्टम पर चर्चा हो रही है। हालांकि  एक्सपर्ट्स चिंता जताते हुए कहते हैं यदि स्टेबलकॉइन का इस्तेमाल बड़े स्तर पर होने लगा तो इससे पारंपरिक बैंकिंग सिस्टम और केंद्रीय बैंकों की मौद्रिक नीति पर असर पड़ सकता है। जापान की सत्तारूढ़ पार्टी के एक पैनल ने भी सुझाव दिया है कि एशिया में पेमेंट और क्लेरिंग सिस्टम के लिए येन आधारित स्टेबलकॉइन को बढ़ावा दिया जाना चाहिए। बैंकिंग क्षेत्र का मानना है कि ब्लॉकचेन आधारित पेमेंट सिस्टम से इंटरनेशनल ट्रांजेक्शन तेज हो सकते हैं, लागत घट सकती है और कंपनियों के लिए चौबीसों घंटे भुगतान संभव होगा।  जापान के पड़ौसी साउथ कोरिया में भी रियल करेंसी पर आधारित स्टेबलकॉइन को लेकर चर्चा तेज है। देश की बड़ी टेक और फाइनेंस कंपनियां कोरियाई वॉन पर आधारित स्टेबलकॉइन लाने पर विचार कर रही हैं ताकि डॉलर आधारित स्टेबलकॉइन पर निर्भरता कम की जा सके।   दूसरी ओर चीन ने पहले ही अपनी केंद्रीय बैंक डिजिटल करेंसी (डिजिटल युआन / ई-सीएनवाई) डवलप कर ली है। डिजिटल युआन चीन के केंद्रीय बैंक द्वारा जारी डिजिटल करेंसी है जबकि स्टेबलकॉइन आमतौर पर प्राइवेट कंपनियां या ंबैंक जारी करते हैं और उनकी वैल्यू किसी मुद्रा या असैट से लिंक्ड होती है।  चीन हांगकांग को डिजिटल असैट हब के रूप में डवलप कर रहा है। हांगकांग में स्टेबलकॉइन के लिए रेगुलेटरी फ्रेमवर्क तैयार किया जा रहा है। अभी ग्लोबल स्टेबलकॉइन मार्केट में अमेरिकी डॉलर आधारित टोकन का दबदबा है।


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