अभी 28 फरवरी को ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अमेरिका की एआई चिप कंपनी माइक्रोन टेक्नोलॉजी की गुजरात के साणंद में फैसिलिटी का उद्घाटन किया था। कंपनी ने प्लांट पर 22500 करोड़ रु. (2.75 बिलियन डॉलर) का इंवेस्टमेंट किया है। कंपनी के सीईओ हैं संजय मेहरोत्रा जिनकी लीडरशिप में यह सिर्फ दस साल में 20 गुना हो गई है। वर्ष 2017 में जब संजय मेहरोत्रा माइक्रोन टेक्नोलॉजी के सीईओ बने थे तब कंपनी का वेल्यूएशन केवल 48 बिलियन डॉलर था जो अब....एक ट्रिलियन डॉलर को पार कर गया है। माइक्रोन टेक्नोलॉजी पिछले 2 महीने में 1 ट्रिलियन डॉलर के मार्केट कैप को पार करने वाली तीसरी एआई चिप मैन्युफैक्चरिंग कंपनी है। सैमसंग और एसके हाईनिक्स की कहानी आप पढ़ ही चुके हैं। सुंदर पिचाई और सत्य नदेला के मुकाबले संजय मेहरोत्रा की कामयाबी इसलिए ज्यादा बड़ी है क्योंकि गूगल और माइक्रोसॉफ्ट को बनी-बनाई कंपनियां थीं लेकिन संजय मेहरोत्रा ने माइक्रोन टेक्नोलॉजी को 10 साल में 50 गुना बड़ा कर दिया है। एक ओर अमेरिका के प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप के दौर में हेट कैंपेन चल रहा है दूसरी ओर न्यू एज टेक्नोलॉजी में हिंदुस्तानियों का दबदबा बढ़ता जा रहा है। पिछले दिनों आपने टेस्ला वाले एलन मस्क की कंपनी स्पेसएक्स के शुरुआती इंवेस्टर भारतीय मूल के एंटोनियो ग्रेसियास की कहानी पढ़ी थी। भारतीय मूल के वेंचर कैपिटलिस्ट विनोद खोसला ने दुनियाभर में एआई का तहलका मचाने में कामयाब रही चैटजीपीटी वाली ओपनएआई के शुरुआती इंवेस्टर रहे हैं। तब एआई को एक जुआ माना जा रहा था लेकिन अब यह जैकपॉट है। 2019 में खोसला का ओपनएआई में इंवेस्टमेंट केवल 50 लाख डॉलर का था। अब ओपनएआई की लिस्टिंग की तैयारी चल रही है 850 बिलियन से 1 ट्रिलियन डॉलर के वेल्यूएशन पर। यदि ऐसा होता है तो 50 लाख डॉलर का वह इंवेस्टमेंट 1.5 बिलियन डॉलर का हो जाएगा यानी 6 साल में 30 गुना। आपको शायद भरोसा नहीं हो लेकिन इंफोसिस भी ओपनएआई के शुरुआती को-फाउंडर में शामिल है जिसने दिसंबर 2015 में इसे 30 लाख डॉलर का दान दिया था। हालांकि इंफोसिस के तत्कालीन सीईओ विशाल सिक्का ओपनएआई में 1 बिलियन का स्ट्रेटेजिक इंवेस्टमेंट करना चाहते थे लेकिन इंफोसिस बोर्ड ने इस आइडिया को रिजेक्ट कर दिया। आप सोचिए यदि 1 बिलियन डॉलर के इंवेस्टमेंंट को बोर्ड की मंजूरी मिल जाती तो आज यह 45 बिलियन डॉलर हो जाता। यह कोई मामूली नहीं बल्कि इंफोसिस के कुल मार्केट कैप के 90 परसेंट के बराबर है। एंटोनियो ग्रेसियास की ही तरह आनंद देसाई ने एलन मस्क की स्पेसएक्स पर तब दांव लगाया था जब एलन मस्क के इस आइडिया का मजाक बनाया जा रहा था। आनंद देसाई न्यूयॉर्क बेस्ड हेज फंड दर्शना कैपिटल पार्टनर्स के सीईओ हैं। देसाई 2019 में मस्क-टीयर बन गए। मस्केटीयर यानी बंदूकधारी पैदल सैनिक। यह तब की बात है जब स्पेसएक्स का वेल्यूएशन केवल 30-33 बिलियन था। आप जानते हैं स्पेस एक्स अब 1.80 ट्रिलियन डॉलर के वेल्यूएशन पर आईपीओ लाने की तैयारी कर रही है। देसाई का यह दांव अब 15 बिलियन डॉलर का विंडफॉल बन रहा है। रिपोर्ट्स के अनुसार, दर्शना कैपिटल पार्टनर्स की लगभग 60' नेटवर्थ स्पेसएक्स के शेयरों के कारण है। स्पेसएक्स में 85 परसेंट शेयर एलन मस्क के पास हैं और आईपीओ के साथ ही मस्क दुनिया के पहले ट्रिलिनेयर बन बैठेंगे। आपको शायद भरोसा नहीं हो लेकिन 2015 में एलन मस्क और सैम ऑल्टमैन ने मिलकर चैटजीपीटी वाली ओपनएआई की स्थापना की थी। हालांकि बाद में कंपनी के रेवेन्यू मॉडल को लेकर विवाद के कारण मस्क इससे बाहर हो गए थे।