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Daily Business Newspaper | A Knowledge Powerhouse in Hindi

08-04-2026

इंडिया का लक्जरी वॉच बाजार हाईग्रोथ की राइड पर सवार

  •  भारत दुनिया के टॉप5 कंज्यूमर मार्केट्स में शामिल है और बहुत जल्दी जापान को पछाडक़र अमेरिका और चीन के बाद तीसरे पायदान पर पहुंच जाएगा। वर्ष 2031 तक 25 हजार डॉलर (करीब 24 लाख रुपये) की सालाना इनकम वाले परिवारों की संख्या 4.10 करोड़ हो जाने का अनुमान है। ऐसे में हाई एंड प्रीमियम और लक्जरी गुड्स का मार्केट बहुत तेजी से टेकऑफ हो रहा है और इसीलिए स्विस लक्जरी वॉचमेकर टैग ह्यूअर भारत के बढ़ते मिडल क्लास पर बड़ा दांव लगा रही है। कंपनी का मानना ग्लोबल लेवल हाई-एंड स्विस रिस्टवॉच की डिमांड में जो कमी आ रही है उसकी भरपाई भारत से हो सकती है। कंपनी भारत के कंज्यूमर मार्केट को कैपिटलाइज करने के लिए थर्ड-पार्टी डिस्ट्रीब्यूटर्स के साथ बुटीक स्टोर खोलने के प्लान पर काम कर रही है। टैग ह्यूअर दरअसल लुई वित्तॉन वाले ग्रुप एलवीएमएच का ही ब्रांड है। स्विस घडिय़ों की डिमांड इस ट्रेंड के उलट मजबूत बनी हुई है और  पिछले तीन महीने में ही 26 परसेंट से ज्यादा बढ़ी है। बहुत जल्दी टैग ह्यूअर नोइडा में अपना सेल्स आउटलेट खोल रही है और उसे उम्मीद है कि सिर्फ  पांच वर्ष में मिडिल ईस्ट, इंडिया, तुर्की, अफ्रीका (मिडल-ईस्ट, इंडिया, तुर्की एंड अफ्रीका यानी एमईआईटीए) रीजन में भारत उसका सबसे बड़ा मार्केट बन सकता है।कंपनी के अनुसार भारत में परचेज पैटर्न तेजी से बदल रहा है। पहले इलीट इंडियन्स लक्जरी प्रोडक्ट्स ड्यूटी-फ्री शॉप से खरीदते थे लेकिन अब लोकल बुटीक से खरीदारी कर रहे हैं। इस बाई-एट-होम ट्रेंड को देखते हुए कई ग्लोबल ब्रांड्स दिल्ली, मुंबई और बेंगलुरु जैसे शहरों में फिजिकल स्टोर्स में इंवेस्टमेंट बढ़ा रहे हैं। फिलहाल भारत में ज्यादातर बायर्स 3 हजार यूरो (करीब 3.2 लाख रुपये) तक की एंट्री-लेवल रिस्टवॉच खरीद रहे हैं। लेकिन टैग ह्यूअर का टार्गेट फस्र्ट टाइम बायर्स को धीरे-धीरे हाई-एंड घडिय़ों के लॉन्ग-टर्म कलेक्टर में बदलना है। टैग ह्यूअर के गिलॉम बोइलो के अनुसार, पिछले तीन वर्ष से भारत में कंपनी की परफॉर्मेन्स बहुत अच्छी रही है। ऐसे में विस्तार कार्यक्रम को फिर से शुरू किया जा रहा है। एलवीएमएच ग्रुप के रिस्ट वॉच पोर्टफोलियो में टैग ह्यूअर के अलावा  हुब्लो और •ोनिथ भी शामिल हैं। फैडरेशन ऑफ स्विस वॉच इंडस्ट्री (एफएच) के अनुसार भारत में स्विस  रिस्टवॉच की सेल्स वर्ष 2024 में 3,244.6 करोड़ रुपये की रही थी जो अब लगभग 3,500 करोड़ तक पहुंच गई। बोइलो के अनुसार आने वाले समय में  भारत वॉल्यूम और वैल्यू दोनों के लिहाज से सबसे बड़ा बाजार बन सकता है। भारत का रिस्टवॉच मार्केट ज्यादातर एंट्री और मिड-लक्जरी तक सीमित है। लेकिन कंजम्पशन ट्रेंड से पता चलता है कि दुनिया के दूसरे देशों की ही तरह भारत के बायर्स से अफोर्डेबल प्रोडक्ट्स से शुरुआत कर धीरे-धीरे हाई-वैल्यू प्रोडक्ट्स की ओर बढ़ते हैं। कंपनी के अनुसार भारत में 38-42 मिमी साइज की जेंट्स रिस्टवॉच की डिमांड सबसे ज्यादा है। बोइलो के अनुसार कंपनी आक्रामक विस्तार के बजाय धीरे-धीरे शहर-दर-शहर बढऩा चाहती है। भारत में परचेजिंग पैटर्न अलग है इसलिए दुबई और टोकियो जैसी स्ट्रेटेजी यहां लागू नहीं की जा सकती। एफएच के अनुसार, जनवरी-फरवरी 2026 में भारत स्विस घडिय़ों के लिए 17वां सबसे बड़ा बाजार और कुल सेल्स 26 परसेंट ग्रोथ के साथ करीब 56.7 मिलियन यूरो करीब 600 करोड़ रुपये रही। इसी अवधि में अमेरिका में 822.4 मिलियन यूरो और चीन में 325.8 मिलियन यूरो की स्विस घडिय़ों की बिक्री हुई।

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इंडिया का लक्जरी वॉच बाजार हाईग्रोथ की राइड पर सवार

 भारत दुनिया के टॉप5 कंज्यूमर मार्केट्स में शामिल है और बहुत जल्दी जापान को पछाडक़र अमेरिका और चीन के बाद तीसरे पायदान पर पहुंच जाएगा। वर्ष 2031 तक 25 हजार डॉलर (करीब 24 लाख रुपये) की सालाना इनकम वाले परिवारों की संख्या 4.10 करोड़ हो जाने का अनुमान है। ऐसे में हाई एंड प्रीमियम और लक्जरी गुड्स का मार्केट बहुत तेजी से टेकऑफ हो रहा है और इसीलिए स्विस लक्जरी वॉचमेकर टैग ह्यूअर भारत के बढ़ते मिडल क्लास पर बड़ा दांव लगा रही है। कंपनी का मानना ग्लोबल लेवल हाई-एंड स्विस रिस्टवॉच की डिमांड में जो कमी आ रही है उसकी भरपाई भारत से हो सकती है। कंपनी भारत के कंज्यूमर मार्केट को कैपिटलाइज करने के लिए थर्ड-पार्टी डिस्ट्रीब्यूटर्स के साथ बुटीक स्टोर खोलने के प्लान पर काम कर रही है। टैग ह्यूअर दरअसल लुई वित्तॉन वाले ग्रुप एलवीएमएच का ही ब्रांड है। स्विस घडिय़ों की डिमांड इस ट्रेंड के उलट मजबूत बनी हुई है और  पिछले तीन महीने में ही 26 परसेंट से ज्यादा बढ़ी है। बहुत जल्दी टैग ह्यूअर नोइडा में अपना सेल्स आउटलेट खोल रही है और उसे उम्मीद है कि सिर्फ  पांच वर्ष में मिडिल ईस्ट, इंडिया, तुर्की, अफ्रीका (मिडल-ईस्ट, इंडिया, तुर्की एंड अफ्रीका यानी एमईआईटीए) रीजन में भारत उसका सबसे बड़ा मार्केट बन सकता है।कंपनी के अनुसार भारत में परचेज पैटर्न तेजी से बदल रहा है। पहले इलीट इंडियन्स लक्जरी प्रोडक्ट्स ड्यूटी-फ्री शॉप से खरीदते थे लेकिन अब लोकल बुटीक से खरीदारी कर रहे हैं। इस बाई-एट-होम ट्रेंड को देखते हुए कई ग्लोबल ब्रांड्स दिल्ली, मुंबई और बेंगलुरु जैसे शहरों में फिजिकल स्टोर्स में इंवेस्टमेंट बढ़ा रहे हैं। फिलहाल भारत में ज्यादातर बायर्स 3 हजार यूरो (करीब 3.2 लाख रुपये) तक की एंट्री-लेवल रिस्टवॉच खरीद रहे हैं। लेकिन टैग ह्यूअर का टार्गेट फस्र्ट टाइम बायर्स को धीरे-धीरे हाई-एंड घडिय़ों के लॉन्ग-टर्म कलेक्टर में बदलना है। टैग ह्यूअर के गिलॉम बोइलो के अनुसार, पिछले तीन वर्ष से भारत में कंपनी की परफॉर्मेन्स बहुत अच्छी रही है। ऐसे में विस्तार कार्यक्रम को फिर से शुरू किया जा रहा है। एलवीएमएच ग्रुप के रिस्ट वॉच पोर्टफोलियो में टैग ह्यूअर के अलावा  हुब्लो और •ोनिथ भी शामिल हैं। फैडरेशन ऑफ स्विस वॉच इंडस्ट्री (एफएच) के अनुसार भारत में स्विस  रिस्टवॉच की सेल्स वर्ष 2024 में 3,244.6 करोड़ रुपये की रही थी जो अब लगभग 3,500 करोड़ तक पहुंच गई। बोइलो के अनुसार आने वाले समय में  भारत वॉल्यूम और वैल्यू दोनों के लिहाज से सबसे बड़ा बाजार बन सकता है। भारत का रिस्टवॉच मार्केट ज्यादातर एंट्री और मिड-लक्जरी तक सीमित है। लेकिन कंजम्पशन ट्रेंड से पता चलता है कि दुनिया के दूसरे देशों की ही तरह भारत के बायर्स से अफोर्डेबल प्रोडक्ट्स से शुरुआत कर धीरे-धीरे हाई-वैल्यू प्रोडक्ट्स की ओर बढ़ते हैं। कंपनी के अनुसार भारत में 38-42 मिमी साइज की जेंट्स रिस्टवॉच की डिमांड सबसे ज्यादा है। बोइलो के अनुसार कंपनी आक्रामक विस्तार के बजाय धीरे-धीरे शहर-दर-शहर बढऩा चाहती है। भारत में परचेजिंग पैटर्न अलग है इसलिए दुबई और टोकियो जैसी स्ट्रेटेजी यहां लागू नहीं की जा सकती। एफएच के अनुसार, जनवरी-फरवरी 2026 में भारत स्विस घडिय़ों के लिए 17वां सबसे बड़ा बाजार और कुल सेल्स 26 परसेंट ग्रोथ के साथ करीब 56.7 मिलियन यूरो करीब 600 करोड़ रुपये रही। इसी अवधि में अमेरिका में 822.4 मिलियन यूरो और चीन में 325.8 मिलियन यूरो की स्विस घडिय़ों की बिक्री हुई।


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