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Daily Business Newspaper | A Knowledge Powerhouse in Hindi

24-07-2026

पचपदरा रिफाइनरी के पास रीको ने 46 इंडस्ट्रीयल भूखंड किए आवंटित

  •  पचपदरा स्थित एचपीसीएल राजस्थान रिफाइनरी (एचआरआरएल) के आसपास डाउनस्ट्रीम पेट्रोकेमिकल उद्योगों का मजबूत इकोसिस्टम विकसित करने की दिशा में राज्य सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। रीको ने राजस्थान पेट्रो जोन (आरपीजेड) में अब तक 46 औद्योगिक भूखंड आवंटित कर दिए हैं। इन भूखंडों पर प्रस्तावित इकाइयों के माध्यम से करीब 132 करोड़ रुपये के निवेश का मार्ग प्रशस्त हुआ है। राजस्थान पेट्रो जोन को पचपदरा रिफाइनरी के डाउनस्ट्रीम उद्योगों के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है। हाल ही में अतिरिक्त मुख्य सचिव (उद्योग) अपर्णा अरोड़ा ने निवेशकों की भागीदारी और परियोजना की आधारभूत संरचना की प्रगति की समीक्षा की। बैठक में रीको और उद्योग विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने हिस्सा लिया। समीक्षा के दौरान रिफाइनरी से प्राप्त फीडस्टॉक और सह-उत्पादों (बाय-प्रोडक्ट्स) का उपयोग करने वाले उद्योगों को आकर्षित करने की रणनीति पर चर्चा की गई। रीको अधिकारियों के अनुसार, अब तक 18 त्रिपक्षीय एमओयू पर हस्ताक्षर किए जा चुके हैं। 8.9 हेक्टेयर क्षेत्र में फैले 46 भूखंड आवंटित किए गए हैं। इसके अतिरिक्त डायरेक्ट लैंड अलॉटमेंट (डीएलए) फेज-2 के तहत पांच और भूखंडों के लिए प्राप्त 12 आवेदनों का मूल्यांकन किया जा रहा है। वहीं फेज-12 के तहत नौ भूखंडों के लिए आवेदन 28 जुलाई तक आमंत्रित किए गए हैं। आरपीजेड का विकास बालोतरा जिले के बोरावास-कलावा क्षेत्र में किया जा रहा है, जो एचआरआरएल रिफाइनरी से लगभग 15 किलोमीटर दूर स्थित है। इसका उद्देश्य रिफाइनरी आधारित डाउनस्ट्रीम विनिर्माण इकोसिस्टम तैयार करना है, ताकि प्लास्टिक, पॉलिमर, पैकेजिंग, स्पेशियलिटी केमिकल्स, सिंथेटिक उत्पाद और अन्य पेट्रोकेमिकल आधारित उद्योगों को कच्चा माल स्थानीय स्तर पर उपलब्ध हो सके। इससे परिवहन लागत कम होगी और उद्योगों की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बढ़ेगी। रीको ने पेट्रो जोन के पहले चरण में 29.77 हेक्टेयर क्षेत्र का विकास पूरा कर लिया है। यहां 75 औद्योगिक भूखंड और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) के लिए आठ प्लग-एंड-प्ले फैक्टरी शेड विकसित किए गए हैं। इन तैयार शेडों में कार्यालय, पैंट्री, शौचालय और लोडिंग जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं, ताकि उद्योग कम समय में उत्पादन शुरू कर सकें। बुनियादी ढांचे के विस्तार पर भी तेजी से काम किया जा रहा है। दूसरे चरण में 87.64 हेक्टेयर क्षेत्र के विकास के लिए 54.91 करोड़ रुपये की लागत से कार्य आवंटित किया जा चुका है। वहीं 213.7 हेक्टेयर में प्रस्तावित बड़े दूसरे चरण को पर्यावरणीय स्वीकृति मिलने का इंतजार है। इसके पूरा होने के बाद राजस्थान पेट्रो जोन का विस्तार और तेज होगा तथा अधिक निवेशकों को आकर्षित किया जा सकेगा। अरोरा ने बैठक में रीको और उद्योग विभाग के अधिकारियों को निर्देशित किया कि पेट्रोजोन में लगने वाले पेट्रोकेमिकल उद्योगों के उत्पादों की मांग और आपूर्ति संभावनाओं को आकलन कराएं। उन्होंने बताया कि इस तरह के उद्योगों को चिन्हित कर पेट्रोजोन में निवेश करवाना प्राथमिकता होगी। उन्होंने रीको से पेट्रोजोन में आवश्यक आधारभूत संरचना चिन्हित करते हुए विकसित करने पर जोर दिया ताकि उद्यमियों को आवश्यक पानी, बिजली, सडक़ आदि आधारभूत सुविधाएं प्राप्त हो सके। रीको के प्रबंध निदेशक सुरेश ओला और उद्योग आयुक्त नीलाभ सक्सेना ने बताया कि उद्योग, रीको और बीआईपी एचपीसीएल रिफाइनरी से समन्वय बनाते हुए निवेशकों से समन्वय बनाया जाएगा। औद्योगिक विशेषज्ञों का मानना है कि एचपीसीएल राजस्थान रिफाइनरी के पूर्ण संचालन के साथ इस क्षेत्र में पेट्रोकेमिकल और डाउनस्ट्रीम उद्योगों का बड़ा क्लस्टर विकसित होगा। इससे पश्चिमी राजस्थान में हजारों प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा होंगे, स्थानीय एमएसएमई को नए बाजार मिलेंगे तथा बालोतरा-बाड़मेर क्षेत्र देश के प्रमुख पेट्रोकेमिकल विनिर्माण केंद्रों में शामिल हो सकता है।

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पचपदरा रिफाइनरी के पास रीको ने 46 इंडस्ट्रीयल भूखंड किए आवंटित

 पचपदरा स्थित एचपीसीएल राजस्थान रिफाइनरी (एचआरआरएल) के आसपास डाउनस्ट्रीम पेट्रोकेमिकल उद्योगों का मजबूत इकोसिस्टम विकसित करने की दिशा में राज्य सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। रीको ने राजस्थान पेट्रो जोन (आरपीजेड) में अब तक 46 औद्योगिक भूखंड आवंटित कर दिए हैं। इन भूखंडों पर प्रस्तावित इकाइयों के माध्यम से करीब 132 करोड़ रुपये के निवेश का मार्ग प्रशस्त हुआ है। राजस्थान पेट्रो जोन को पचपदरा रिफाइनरी के डाउनस्ट्रीम उद्योगों के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है। हाल ही में अतिरिक्त मुख्य सचिव (उद्योग) अपर्णा अरोड़ा ने निवेशकों की भागीदारी और परियोजना की आधारभूत संरचना की प्रगति की समीक्षा की। बैठक में रीको और उद्योग विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने हिस्सा लिया। समीक्षा के दौरान रिफाइनरी से प्राप्त फीडस्टॉक और सह-उत्पादों (बाय-प्रोडक्ट्स) का उपयोग करने वाले उद्योगों को आकर्षित करने की रणनीति पर चर्चा की गई। रीको अधिकारियों के अनुसार, अब तक 18 त्रिपक्षीय एमओयू पर हस्ताक्षर किए जा चुके हैं। 8.9 हेक्टेयर क्षेत्र में फैले 46 भूखंड आवंटित किए गए हैं। इसके अतिरिक्त डायरेक्ट लैंड अलॉटमेंट (डीएलए) फेज-2 के तहत पांच और भूखंडों के लिए प्राप्त 12 आवेदनों का मूल्यांकन किया जा रहा है। वहीं फेज-12 के तहत नौ भूखंडों के लिए आवेदन 28 जुलाई तक आमंत्रित किए गए हैं। आरपीजेड का विकास बालोतरा जिले के बोरावास-कलावा क्षेत्र में किया जा रहा है, जो एचआरआरएल रिफाइनरी से लगभग 15 किलोमीटर दूर स्थित है। इसका उद्देश्य रिफाइनरी आधारित डाउनस्ट्रीम विनिर्माण इकोसिस्टम तैयार करना है, ताकि प्लास्टिक, पॉलिमर, पैकेजिंग, स्पेशियलिटी केमिकल्स, सिंथेटिक उत्पाद और अन्य पेट्रोकेमिकल आधारित उद्योगों को कच्चा माल स्थानीय स्तर पर उपलब्ध हो सके। इससे परिवहन लागत कम होगी और उद्योगों की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बढ़ेगी। रीको ने पेट्रो जोन के पहले चरण में 29.77 हेक्टेयर क्षेत्र का विकास पूरा कर लिया है। यहां 75 औद्योगिक भूखंड और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) के लिए आठ प्लग-एंड-प्ले फैक्टरी शेड विकसित किए गए हैं। इन तैयार शेडों में कार्यालय, पैंट्री, शौचालय और लोडिंग जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं, ताकि उद्योग कम समय में उत्पादन शुरू कर सकें। बुनियादी ढांचे के विस्तार पर भी तेजी से काम किया जा रहा है। दूसरे चरण में 87.64 हेक्टेयर क्षेत्र के विकास के लिए 54.91 करोड़ रुपये की लागत से कार्य आवंटित किया जा चुका है। वहीं 213.7 हेक्टेयर में प्रस्तावित बड़े दूसरे चरण को पर्यावरणीय स्वीकृति मिलने का इंतजार है। इसके पूरा होने के बाद राजस्थान पेट्रो जोन का विस्तार और तेज होगा तथा अधिक निवेशकों को आकर्षित किया जा सकेगा। अरोरा ने बैठक में रीको और उद्योग विभाग के अधिकारियों को निर्देशित किया कि पेट्रोजोन में लगने वाले पेट्रोकेमिकल उद्योगों के उत्पादों की मांग और आपूर्ति संभावनाओं को आकलन कराएं। उन्होंने बताया कि इस तरह के उद्योगों को चिन्हित कर पेट्रोजोन में निवेश करवाना प्राथमिकता होगी। उन्होंने रीको से पेट्रोजोन में आवश्यक आधारभूत संरचना चिन्हित करते हुए विकसित करने पर जोर दिया ताकि उद्यमियों को आवश्यक पानी, बिजली, सडक़ आदि आधारभूत सुविधाएं प्राप्त हो सके। रीको के प्रबंध निदेशक सुरेश ओला और उद्योग आयुक्त नीलाभ सक्सेना ने बताया कि उद्योग, रीको और बीआईपी एचपीसीएल रिफाइनरी से समन्वय बनाते हुए निवेशकों से समन्वय बनाया जाएगा। औद्योगिक विशेषज्ञों का मानना है कि एचपीसीएल राजस्थान रिफाइनरी के पूर्ण संचालन के साथ इस क्षेत्र में पेट्रोकेमिकल और डाउनस्ट्रीम उद्योगों का बड़ा क्लस्टर विकसित होगा। इससे पश्चिमी राजस्थान में हजारों प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा होंगे, स्थानीय एमएसएमई को नए बाजार मिलेंगे तथा बालोतरा-बाड़मेर क्षेत्र देश के प्रमुख पेट्रोकेमिकल विनिर्माण केंद्रों में शामिल हो सकता है।


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