देश में क्लीन एनर्जी की दिशा में बढ़ रहे कदमों के बीच एक नया ट्रेंड सामने आया है। अब रूफटॉप सोलर अपनाने में छोटे और मध्यम शहर देश के बड़े महानगरों से आगे निकल गए हैं। प्रधानमंत्री सूर्य घर बिजली योजना के तहत देशभर में अब तक 36.29 लाख से अधिक रूफटॉप सोलर इंस्टॉलेशन हो चुके हैं, जिससे 44.13 लाख से अधिक परिवारों को लाभ मिला है। योजना के तहत स्थापित सोलर सिस्टम दिन में बिजली उत्पादन कर घरेलू जरूरतें पूरी करते हैं, जबकि अतिरिक्त बिजली ग्रिड में भेजी जाती है। रात के समय उपभोक्ता उसी ग्रिड से बिजली लेते हैं, जिससे कई परिवारों के बिजली बिल लगभग शून्य तक पहुंच गए हैं। सरकार द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार गुजरात रूफटॉप सोलर इंस्टॉलेशन में सबसे आगे है, जहां 7.18 लाख से अधिक इंस्टॉलेशन हो चुके हैं। इसके बाद महाराष्ट्र (6.43 लाख), उत्तर प्रदेश (6.26 लाख), केरल (2.77 लाख) और राजस्थान (2.40 लाख) का स्थान है। जिलों की बात करें तो लखनऊ देश में सबसे आगे है, जहां 1.07 लाख से अधिक रूफटॉप सोलर इंस्टॉलेशन हुए हैं। इसके बाद नागपुर, सूरत, अहमदाबाद और राजकोट शीर्ष पांच जिलों में शामिल हैं। दिलचस्प बात यह है कि दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु, हैदराबाद, चेन्नई और कोलकाता जैसे बड़े महानगर शीर्ष 100 जिलों में भी जगह नहीं बना सके। इसके विपरीत लखनऊ, नागपुर, सूरत, वाराणसी और एर्नाकुलम जैसे टियर-2 और टियर-3 शहर तेजी से सोलर एनर्जी को अपना रहे हैं। केंद्र सरकार के आंकड़ों के अनुसार प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के तहत देश में रूफटॉप सोलर अपनाने की रफ्तार लगातार बढ़ रही है। इस अभियान में राजस्थान का श्रीगंगानगर जिला देश के शीर्ष 50 जिलों में शामिल होकर राज्य के लिए बड़ी उपलब्धि बनकर उभरा है। केंद्र सरकार की 75,021 करोड़ रु. की इस महत्वाकांक्षी योजना के तहत अब तक 25,460 करोड़ रुपये से अधिक की सब्सिडी जारी की जा चुकी है। 3 किलोवाट तक के रूफटॉप सोलर सिस्टम पर 78,000 रुपये तक की केंद्रीय सब्सिडी दी जा रही है, जबकि कई राज्य अतिरिक्त प्रोत्साहन भी प्रदान कर रहे हैं। ऊर्जा मंत्रालय के अधिकारियों के अनुसार, योजना के तहत देश में हर महीने औसतन करीब तीन लाख नए रूफटॉप सोलर इंस्टॉलेशन हो रहे हैं। अब सरकार का फोकस समूह आवासीय सोसायटियों और निम्न आय वर्ग के परिवारों तक इस योजना का लाभ पहुंचाने पर है। इसके लिए यूटिलिटी-लेड एग्रीगेशन (यूएलए) मॉडल भी लागू किया जा रहा है, जिससे उन परिवारों को भी सोलर एनर्जी का लाभ मिलेगा जो स्वयं रूफटॉप सिस्टम लगाने में सक्षम नहीं हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि छोटे शहरों में पर्याप्त छत उपलब्ध होने, जागरूकता अभियानों, डिस्कॉम के सहयोग और आकर्षक सब्सिडी के कारण रूफटॉप सोलर की स्वीकार्यता तेजी से बढ़ी है। यह बदलाव देश को ऊर्जा आत्मनिर्भर बनाने के साथ-साथ क्लीन एनर्जी के लक्ष्य हासिल करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।