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Daily Business Newspaper | A Knowledge Powerhouse in Hindi

02-06-2026

रियल एस्टेट मार्केट में बढ़ी लिस्टेड कंपनियों की पकड़, छोटे डेवलपर्स पर दबाव

  •  भारतीय रियल एस्टेट सेक्टर इन दिनों एक बड़े बदलाव के दौर से गुजर रहा है। कभी लोकल बिल्डर्स और छोटे डेवलपर्स के भरोसे चलने वाला यह बाजार अब तेजी से संगठित और कॉर्पोरेट मॉडल की ओर बढ़ रहा है। देश की बड़ी लिस्टेड रियल्टी कंपनियां न सिर्फ जमीन के बड़े सौदे अपने नाम कर रही हैं, बल्कि पूरे बाजार की दिशा भी तय करने लगी हैं। स्नङ्घ26 में अब तक हुए कुल जमीन सौदों में लगभग आधी हिस्सेदारी सिर्फ लिस्टेड डेवलपर्स के पास पहुंच गई है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि यह बदलाव केवल निवेश क्षमता का परिणाम नहीं है, बल्कि भरोसे, पारदर्शिता और मजबूत ब्रांड वैल्यू का भी असर है।

    बड़े नामों की बढ़ती ताकत
    इस दौड़ में सबसे आगे गोदरेज प्रॉपर्टीज दिखाई दे रही है। कंपनी ने 17 बड़े लैंड डील्स के जरिए करीब 443 एकड़ जमीन अपने पोर्टफोलियो में जोड़ी है। इसके बाद ब्रिगेड ग्रुप का नाम सामने आया, जिसने आठ बड़े सौदे किए।दिलचस्प बात यह है कि बाजार में कुल डील्स की संख्या पहले के मुकाबले थोड़ी कम हुई है, लेकिन बड़े खिलाडय़िों की हिस्सेदारी लगातार बढ़ रही है। इसका सीधा मतलब है कि अब जमीन खरीदने की ताकत उन्हीं कंपनियों के पास है जिनके पास मजबूत फंडिंग, बेहतर बैंकिंग सपोर्ट और रेगुलेटरी प्रक्रियाओं को संभालने की क्षमता है।

    क्यों बदल रहा है बाजार?
    रियल एस्टेट सेक्टर में पिछले कुछ वर्षों में क्रश्वक्र्र जैसे नियमों ने पारदर्शिता बढ़ाई है। इसके साथ ही ग्राहकों का भरोसा भी अब नामी कंपनियों की ओर ज्यादा झुकने लगा है। घर खरीदने वाला ग्राहक अब सिर्फ लोकेशन नहीं, बल्कि डेवलपर की विश्वसनीयता भी देख रहा है। विशेषज्ञों के मुताबिक, संस्थागत निवेशकों का पैसा भी उन्हीं कंपनियों में जा रहा है जिनका ट्रैक रिकॉर्ड मजबूत है। यही वजह है कि छोटे और मझोले डेवलपर्स के लिए जमीन खरीदना और बड़े प्रोजेक्ट लॉन्च करना पहले से ज्यादा मुश्किल होता जा रहा है।

    बेंगलुरु बना सबसे बड़ा हॉटस्पॉट
    जमीन सौदों के मामले में बेंगलुरु इस समय देश का सबसे बड़ा केंद्र बनकर उभरा है। यहां सबसे ज्यादा डील्स हुईं। इसके अलावा पुणे, मुंबई मेट्रोपॉलिटन रीजन, चेन्नई और हैदराबाद जैसे शहर भी बड़े डेवलपर्स की पसंद बने हुए हैं।रियल एस्टेट कंपनियां अब ऐसे शहरों पर दांव लगा रही हैं जहां आईटी सेक्टर, इंफ्रास्ट्रक्चर और मिडिल क्लास हाउसिंग की मांग तेजी से बढ़ रही है।

    हाउसिंग सप्लाई पर भी कब्जा
    रिपोर्ट के अनुसार, देश की टॉप सात लिस्टेड और ग्रेड-ए डेवलपर्स ने स्नङ्घ26 में लॉन्च होने वाली नई हाउसिंग सप्लाई का करीब 45 प्रतिशत हिस्सा अपने हाथ में ले लिया है। दिल्ली-एनसीआर में यह आंकड़ा 66 प्रतिशत तक पहुंच गया है।यह साफ संकेत है कि आने वाले वर्षों में रियल एस्टेट सेक्टर में कॉर्पोरेट डेवलपर्स की पकड़ और मजबूत होने वाली है। बाजार अब बिखरे हुए मॉडल से निकलकर संगठित ढांचे की ओर बढ़ रहा है, जहां भरोसा, पूंजी और ब्रांड सबसे बड़ी ताकत बन चुके हैं।

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रियल एस्टेट मार्केट में बढ़ी लिस्टेड कंपनियों की पकड़, छोटे डेवलपर्स पर दबाव

 भारतीय रियल एस्टेट सेक्टर इन दिनों एक बड़े बदलाव के दौर से गुजर रहा है। कभी लोकल बिल्डर्स और छोटे डेवलपर्स के भरोसे चलने वाला यह बाजार अब तेजी से संगठित और कॉर्पोरेट मॉडल की ओर बढ़ रहा है। देश की बड़ी लिस्टेड रियल्टी कंपनियां न सिर्फ जमीन के बड़े सौदे अपने नाम कर रही हैं, बल्कि पूरे बाजार की दिशा भी तय करने लगी हैं। स्नङ्घ26 में अब तक हुए कुल जमीन सौदों में लगभग आधी हिस्सेदारी सिर्फ लिस्टेड डेवलपर्स के पास पहुंच गई है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि यह बदलाव केवल निवेश क्षमता का परिणाम नहीं है, बल्कि भरोसे, पारदर्शिता और मजबूत ब्रांड वैल्यू का भी असर है।

बड़े नामों की बढ़ती ताकत
इस दौड़ में सबसे आगे गोदरेज प्रॉपर्टीज दिखाई दे रही है। कंपनी ने 17 बड़े लैंड डील्स के जरिए करीब 443 एकड़ जमीन अपने पोर्टफोलियो में जोड़ी है। इसके बाद ब्रिगेड ग्रुप का नाम सामने आया, जिसने आठ बड़े सौदे किए।दिलचस्प बात यह है कि बाजार में कुल डील्स की संख्या पहले के मुकाबले थोड़ी कम हुई है, लेकिन बड़े खिलाडय़िों की हिस्सेदारी लगातार बढ़ रही है। इसका सीधा मतलब है कि अब जमीन खरीदने की ताकत उन्हीं कंपनियों के पास है जिनके पास मजबूत फंडिंग, बेहतर बैंकिंग सपोर्ट और रेगुलेटरी प्रक्रियाओं को संभालने की क्षमता है।

क्यों बदल रहा है बाजार?
रियल एस्टेट सेक्टर में पिछले कुछ वर्षों में क्रश्वक्र्र जैसे नियमों ने पारदर्शिता बढ़ाई है। इसके साथ ही ग्राहकों का भरोसा भी अब नामी कंपनियों की ओर ज्यादा झुकने लगा है। घर खरीदने वाला ग्राहक अब सिर्फ लोकेशन नहीं, बल्कि डेवलपर की विश्वसनीयता भी देख रहा है। विशेषज्ञों के मुताबिक, संस्थागत निवेशकों का पैसा भी उन्हीं कंपनियों में जा रहा है जिनका ट्रैक रिकॉर्ड मजबूत है। यही वजह है कि छोटे और मझोले डेवलपर्स के लिए जमीन खरीदना और बड़े प्रोजेक्ट लॉन्च करना पहले से ज्यादा मुश्किल होता जा रहा है।

बेंगलुरु बना सबसे बड़ा हॉटस्पॉट
जमीन सौदों के मामले में बेंगलुरु इस समय देश का सबसे बड़ा केंद्र बनकर उभरा है। यहां सबसे ज्यादा डील्स हुईं। इसके अलावा पुणे, मुंबई मेट्रोपॉलिटन रीजन, चेन्नई और हैदराबाद जैसे शहर भी बड़े डेवलपर्स की पसंद बने हुए हैं।रियल एस्टेट कंपनियां अब ऐसे शहरों पर दांव लगा रही हैं जहां आईटी सेक्टर, इंफ्रास्ट्रक्चर और मिडिल क्लास हाउसिंग की मांग तेजी से बढ़ रही है।

हाउसिंग सप्लाई पर भी कब्जा
रिपोर्ट के अनुसार, देश की टॉप सात लिस्टेड और ग्रेड-ए डेवलपर्स ने स्नङ्घ26 में लॉन्च होने वाली नई हाउसिंग सप्लाई का करीब 45 प्रतिशत हिस्सा अपने हाथ में ले लिया है। दिल्ली-एनसीआर में यह आंकड़ा 66 प्रतिशत तक पहुंच गया है।यह साफ संकेत है कि आने वाले वर्षों में रियल एस्टेट सेक्टर में कॉर्पोरेट डेवलपर्स की पकड़ और मजबूत होने वाली है। बाजार अब बिखरे हुए मॉडल से निकलकर संगठित ढांचे की ओर बढ़ रहा है, जहां भरोसा, पूंजी और ब्रांड सबसे बड़ी ताकत बन चुके हैं।


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