उड़द का आयात बेपड़ता होने एवं रुपए की तुलना में डॉलर काफी महंगा हो जाने से चेन्नई कोलकाता में आयातक बढ़ाकर भाव बोलने लगे हैं। इधर उत्तर भारत के उत्पादक मंडियों तथा दाल मिलों में माल नहीं है, इसलिए ग्राहकी निकलते ही रंगून में 20-25 डॉलर प्रति टन छोटे एवं मोटे माल के भाव बढ़ाकर बोलने लगे हैं, इस वजह से यहां भी गत दो दिनों में 200 रुपए प्रति क्विंटल की तेजी आ गई है। आगे माल की कमी को देखते हुए 300 की और तेजी के आसार बन गए हैं। उड़द की तेजी मंदी के विषय में खबरें पढऩे को दी जाती नहीं हैं, उसी के तारतम्य में ताजा सर्वे रिपोर्ट के मुताबिक वर्तमान में देसी उड़द मंडियों में लगभग समाप्त हो गई। यहां पिछले महीने रंगूनी छोटे माल के 8000 रुपए एवं मोटे माल के 8700 रुपए प्रति क्विंटल नीचे में बिका था। अब पुन: रंगून में भाव 20-25 डॉलर बढक़र एफ ए क्यू 820 डॉलर एवं एसक्यू 915 डॉलर प्रति टन हो जाने से दाल मिलें हाजिर कंटेनर की खरीद करने लगी हैं। यही कारण है कि वर्तमान में 200 रुपए बढक़र छोटा माल 8350 एवं मोटा माल 9000 रुपए प्रति क्विंटल हो गए हैं। चेन्नई में हाजिर माल की कमी से मोटे माल 8650 रुपए एवं छोटा 7950 रुपए पर पहुंच गए हैं। गौरतलब है कि गत वर्ष की अपेक्षा हाजिर माल की कमी एवं बर्मा में लोडिंग ऊंचे भाव में होने से यहां उड़द मोटा माल 300 रुपए प्रति कुंतल और बढ़ जाने की संभावना बन गई है। गौरतलब है कि बीते सीजन में फसल भी एमपी महाराष्ट्र से कम आई थी, जिस कारण स्टाक का प्रेशर कहीं भी नहीं है। चेन्नई में भी गत वर्ष की अपेक्षा माल का स्टाक नहीं है। अभी चौतरफा पाइपलाइन में माल कम है। जिस कारण चेन्नई से आने वाले समय में कंटेनर कम लगने वाले हैं। देसी फसलें भी कोई आने वाली नहीं हैं, जिससे हाजिर व्यापार करते रहनी चाहिए। गौरतलब है कि देश में उड़द का उत्पादन इस बार 49-50 लाख मीट्रिक टन का लगाया गया था, जो बीते वर्ष 36-37 लाख टन रह गया था। आगे भी अल-नीनो दिनों का प्रभाव रहने वाला है।