आवक कमजोर होने एवं तेल मिलों की मांग बढऩे से सरसों के भाव 800 रूपए प्रति कुंतल बढ़ गए। भविष्य में भी इसमें और अधिक तेज़ी की उम्मीद नहीं है। सरसों की तेजी मंदी के बारे में खबरें पढऩे को मिलती रहती है। इसी तारतम्य में ताजा सर्वे के अनुसार देश के विभिन्न मंडियों में सरसों की आवक 4.50 लाख बोरी के लगभग रह गई। आवक कमज़ोर होने एवं तेल मिलो की मांग के साथ-साथ सट्टेबाजी बढ़ाने के साथ-साथ एक बिकवाली कमजोर होने से एक माह के दौरान सरसों के भाव 800 रुपए बढक़र 7750/7800 रुपए प्रति कुंतल हो गए। नजफगढ़ में लूज में 7400/7500 रूपये प्रति कुंतल बोले गए। जयपुर मंडी में इसी अनुपात में बढक़र 8025अलवर खैरथल लाइन में 7700/7800 रूपए तथा आगरा 8675 रुपए प्रति कुंतल रह गए। सरसों का उत्पादन मुख्यत राजस्थान, उत्तर प्रदेश, गुजरात, महाराष्ट्र, हरियाणा, छत्तीसगढ़, बिहार इत्यादि राज्यों में होता है। इस वर्ष सरसों का उत्पादन 117.25 लाख टन के आसपास होने की संभावना व्यक्त की गई है। गत वर्ष सरसों का उत्पादन 115 लाख टन के लगभग हुआ था। अमेरिका व ईरान में तनाव बढ़ाने के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में रिकॉर्ड तेजी आ गई। इसके अतिरिक्त डॉलर की तुलना में रुपया कमजोर होने के कारण विदेशी तेल कीमतों में बढ़ोतरी हो गई है। स्टाकिस्टों की बिकवाली घटने से हाल ही में सरसों के कीमतों में काफी तेजी आ गई थी। वर्तमान परिदृश्य को देखते हुए को देखते हुए सरसों की कीमतों में अधिक तेजी की संभावना नहीं है। बाजार सीमित उतार चढ़ाव के बीच में घूमता रह सकता है।