कीमत उम्मीद से नीची होने के कारण किसानों ने अपनी जीरा फसल की बिकवाली सीमित कर दी है। ऊंझा मंड़ी में जैसे-जैसे जीरे की कीमत में मंदी आती जा रही है, वैसे-वैसे इसकी थोक कीमत में भी मंदी आ रही है। अत: आगामी समय में जीरा सीमित दायरे में बना रह सकता है। जीरे की तेजी-मंदी के सम्बन्ध में नवीनतम जानकारियां मिलती रहती हैं और उन्हें इससे लाभ भी होता है। ऊंझा में जीरे की आवक द्वारा 65 हजार बोरियों का रिकॉर्ड स्तर छूने के बाद से इसकी आवक बुरी तरह से लुढक़ गई है। इस प्रमुख किराना जिंस की आवक घटती हुई 12-13 हजार बोरियों के निचले स्तर पर आ जाने के बाद अंतिम सूचना के समय आवक थोड़ी सुधारकर 17-18 हजार बोरियों के आसपास होने की जानकारी मिली। हैरानी की बात यह है कि आवक निचले स्तर पर होने के बाद भी इसकी कीमत में मंदी का माहौल बना हुआ है। चीन तो पहले से ही भारतीय बाजारों से दूर बना हुआ है लेकिन अब बंगलादेश की खरीद भी पूरी हो जाने से निर्यातकों की सक्रियता का भारी अभाव हो गया है। गौरतलब है कि खासकर गुजरात के व्यापारी जीरे के उत्पादन में 25 प्रतिशत की कमी आने का अनुमान जता रहे हैं और इसे देखते हुए ही उन्होंने अपनी खरीद भी चालू कर रखी है। इससे पूर्व फिस ने जीरे के उत्पादन में करीब 15 प्रतिशत की कमी आने की आशंका जताई थी। बहरहाल, ऊंझा में इसकी कीमत हाल ही में 60-75 रुपए मंदी होकर फिलहाल 4200-4275 रुपए प्रति 20 किलोग्राम के स्तर पर बनी होने की जानकारी मिली। इससे पूर्व हाल ही में इसमें 60-70 रुपए की मंदी आई थी। जीरे में आई इस मंदी का प्रमुख कारण यह था कि स्थानीय स्टॉकिस्टों, दिसावरों और निर्यातकों की मांग में कमी की स्थिति बनी हुई थी। इससे भी बड़ी बात यह थी कि अमेरिका तथा इजरायल द्वारा ईरान पर हमला किए जाने की वजह से दुबई की मांग गायब है। आमतौर पर चीन की तुलना में तुर्की में जीरे की कीमत ऊंची होती है। इधर, स्थानीय थोक किराना बाजार में हाल ही में आई तेजी के बाद स्टॉकिस्टों की मजबूत लिवाली निकलने से जीरा सामान्य हाल ही में 900 रुपए टूटकर फिलहाल यह 22,700/23,200 रुपए पर बना हुआ है। इससे पूर्व हाल ही में इसमें 600-700 रुपए की गिरावट आई थी। भारत के अलावा विश्व में तुर्की और सीरिया को जीरे के अन्य उत्पादक देशों के रूप में जाना जाता है। अब अफगानिस्तान तथा ईरान भी चुनौती पेश करने लगे हैं। आमतौर पर तुर्की एवं सीरिया में संयुक्त रूप से करीब 35 हजार टन जीरे का उत्पादन होता है और इनकी क्वालिटी भारतीय जीरे की तुलना में हल्की होती है। चीन में जीरे की फसल की आवक खत्म हो गई है लेकिन इस बार वहां इसका उत्पादन बढक़र 16 लाख टन के आसपास होने का अनुमान व्यक्त किया जा रहा था। चालू वित्त वर्ष 2025-26 के आरंभिक दस महीनों में देश से 3885.33 करोड़ रुपए कीमत के 1,66,878 टन जीरे का निर्यात हुआ है। एक वर्ष पूर्व आलोच्य अवधि में इसकी 1,97,050 टन मात्रा का निर्यात हुआ था और इससे 5386.32 करोड़ रुपए की आय हुई थी। आगामी दिनों में जीरा सीमित दायरे में बना रहने के आसार हैं।