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05-05-2026

चीनी का उत्पादन 275 लाख मीट्रिक टन को पार- सरकार को एमएसपी में संशोधन करना जरूरी

  •  देश में चीनी का उत्पादन अब तक 7 प्रतिशत अधिक हुआ है तथा अभी चीनी मिलों में उत्पादन चल रहा है। सरकार द्वारा चालू मास के लिए कोटा 22.50 लाख मीट्रिक टन छोड़ा गया है, जबकि गत वर्ष मई का कोटा 23.50 लाख मीट्रिक टन दिया गया था। सरकार को किसानों के गन्ने का बकाया भुगतान हेतु चीनी के न्यूनतम समर्थन मूल्य में संशोधन करना चाहिए।चीनी का मुख्य उत्पादक राज्य उत्तर प्रदेश महाराष्ट्र है। इसके अलावा कर्नाटक आंध्र प्रदेश तमिलनाडु बिहार हरियाणा में भी गन्ने का उत्पादन आंशिक रूप में होता है। इस्मा के अनुसार देश में अब पश्चिम का उत्पादन 275.28 लाख हो चुका है, जो गत वर्ष अब तक 256.49 लाख मीट्रिक टन चीनी का उत्पादन हुआ था, जो लगभग 7 प्रतिशत चालू पिराई सत्र में अधिक है। वर्तमान में कुल पांच चीनी मिले ही चालू है, जबकि गत वर्ष अब तक 19 चीनी मिलें चल रही थी। इस बार अधिकतर चीनी मिलें जल्दी बंद हो गई है, लेकिन कम समय में उत्पादन अधिक होने का मुख्य कारण यह है कि चीनी की रिकवरी सभी राज्यों में अधिक बैठी है। यूपी में चीनी का उत्पादन गत वर्ष की समान अवधि की तुलना में कम हुआ है, वहां अब तक 89.65 लाख मीट्रिक टन चीनी का उत्पादन हुआ है, जबकि गत वर्ष 92.40 लाख मीट्रिक टन हुआ था। इस समय राज्य की सभी चीनी मिलें बंद हो चुकी है, जबकि गत वर्ष अब तक 10 चीनी मिलें चल रही थी। इसी तरह महाराष्ट्र में 99.2 लाख मीट्रिक टन उत्पादन अब तक हो चुका है, जबकि गत वर्ष 80.93 लाख मीट्रिक टन हुआ था। कर्नाटक में चीनी का उत्पादन 48.01 लाख मीट्रिक टन हुआ है, जो गत वर्ष 40.40 लाख मीट्रिक टन ही उत्पादन हुआ था, यानी उक्त दोनों राज्यों में चीनी का उत्पादन अधिक हुआ है। हालांकि कर्नाटक में जून जुलाई के महीने में विशेष सीजन शुरू होने पर कुछ चीनी का उत्पादन होता है, इसके अलावा तमिलनाडु में भी कुछ मिलें उत्पादन करेंगी, जिसमें 5 लाख मीट्रिक टन और बन सकती है। फिलहाल जैसे-जैसे सीजन ऑफ हो रहा है, चीनी उद्योग चीनी के एमएसपी में संशोधन का दबाव बना रहा है। इस्मा ने कहा है कि उत्पादन लागत महंगा होने से मिलों से प्राप्त भुगतान सुगमता नहीं हैं और गन्ने के भुगतान में बकाया राशि में वृद्धि हो रही है। गौरतलब है कि अकेले महाराष्ट्र में ही अप्रैल के मध्य में 2130 करोड़ रुपए का बकाया भुगतान किसानों का था, जो गत वर्ष में यह केवल 752 करोड़ का था। मौजूदा लागत संरचना के अनुरूप एमएसपी में समय-समय पर वृद्धि करना ही वित्तीय स्थिरता में सुगमता लाएगी तथा इससे किसानों का बकाया भुगतान में सहायता होगी इसके लिए सरकार पर भी कोई अतिरिक्त बोझ नहीं पड़ेगा। फिलहाल चीनी में कोटा कम आने से 125/150 रुपए प्रति क्विंटल की टेंपरेरी तेजी आ गई है। महाराष्ट्र में चीनी का डीओ 3950/4025 रुपए प्रति कुंतल का होने लगा है।, जबकि यूपी में 4025/4070 रुपए तक व्यापार सुना जा रहा है। चीनी के बढ़े हुए भावों में ग्राहकी कमजोर को देखते हुए ज्यादा तेजी नहीं लग रही है।

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चीनी का उत्पादन 275 लाख मीट्रिक टन को पार- सरकार को एमएसपी में संशोधन करना जरूरी

 देश में चीनी का उत्पादन अब तक 7 प्रतिशत अधिक हुआ है तथा अभी चीनी मिलों में उत्पादन चल रहा है। सरकार द्वारा चालू मास के लिए कोटा 22.50 लाख मीट्रिक टन छोड़ा गया है, जबकि गत वर्ष मई का कोटा 23.50 लाख मीट्रिक टन दिया गया था। सरकार को किसानों के गन्ने का बकाया भुगतान हेतु चीनी के न्यूनतम समर्थन मूल्य में संशोधन करना चाहिए।चीनी का मुख्य उत्पादक राज्य उत्तर प्रदेश महाराष्ट्र है। इसके अलावा कर्नाटक आंध्र प्रदेश तमिलनाडु बिहार हरियाणा में भी गन्ने का उत्पादन आंशिक रूप में होता है। इस्मा के अनुसार देश में अब पश्चिम का उत्पादन 275.28 लाख हो चुका है, जो गत वर्ष अब तक 256.49 लाख मीट्रिक टन चीनी का उत्पादन हुआ था, जो लगभग 7 प्रतिशत चालू पिराई सत्र में अधिक है। वर्तमान में कुल पांच चीनी मिले ही चालू है, जबकि गत वर्ष अब तक 19 चीनी मिलें चल रही थी। इस बार अधिकतर चीनी मिलें जल्दी बंद हो गई है, लेकिन कम समय में उत्पादन अधिक होने का मुख्य कारण यह है कि चीनी की रिकवरी सभी राज्यों में अधिक बैठी है। यूपी में चीनी का उत्पादन गत वर्ष की समान अवधि की तुलना में कम हुआ है, वहां अब तक 89.65 लाख मीट्रिक टन चीनी का उत्पादन हुआ है, जबकि गत वर्ष 92.40 लाख मीट्रिक टन हुआ था। इस समय राज्य की सभी चीनी मिलें बंद हो चुकी है, जबकि गत वर्ष अब तक 10 चीनी मिलें चल रही थी। इसी तरह महाराष्ट्र में 99.2 लाख मीट्रिक टन उत्पादन अब तक हो चुका है, जबकि गत वर्ष 80.93 लाख मीट्रिक टन हुआ था। कर्नाटक में चीनी का उत्पादन 48.01 लाख मीट्रिक टन हुआ है, जो गत वर्ष 40.40 लाख मीट्रिक टन ही उत्पादन हुआ था, यानी उक्त दोनों राज्यों में चीनी का उत्पादन अधिक हुआ है। हालांकि कर्नाटक में जून जुलाई के महीने में विशेष सीजन शुरू होने पर कुछ चीनी का उत्पादन होता है, इसके अलावा तमिलनाडु में भी कुछ मिलें उत्पादन करेंगी, जिसमें 5 लाख मीट्रिक टन और बन सकती है। फिलहाल जैसे-जैसे सीजन ऑफ हो रहा है, चीनी उद्योग चीनी के एमएसपी में संशोधन का दबाव बना रहा है। इस्मा ने कहा है कि उत्पादन लागत महंगा होने से मिलों से प्राप्त भुगतान सुगमता नहीं हैं और गन्ने के भुगतान में बकाया राशि में वृद्धि हो रही है। गौरतलब है कि अकेले महाराष्ट्र में ही अप्रैल के मध्य में 2130 करोड़ रुपए का बकाया भुगतान किसानों का था, जो गत वर्ष में यह केवल 752 करोड़ का था। मौजूदा लागत संरचना के अनुरूप एमएसपी में समय-समय पर वृद्धि करना ही वित्तीय स्थिरता में सुगमता लाएगी तथा इससे किसानों का बकाया भुगतान में सहायता होगी इसके लिए सरकार पर भी कोई अतिरिक्त बोझ नहीं पड़ेगा। फिलहाल चीनी में कोटा कम आने से 125/150 रुपए प्रति क्विंटल की टेंपरेरी तेजी आ गई है। महाराष्ट्र में चीनी का डीओ 3950/4025 रुपए प्रति कुंतल का होने लगा है।, जबकि यूपी में 4025/4070 रुपए तक व्यापार सुना जा रहा है। चीनी के बढ़े हुए भावों में ग्राहकी कमजोर को देखते हुए ज्यादा तेजी नहीं लग रही है।


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