गत दो दिनों से मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा बैतूल गंज लाइन के साथ-साथ राजस्थान हरियाणा पश्चिमी उत्तर प्रदेश में लगातार बरसात होने से वहां गेहूं की कटाई पूरी तरह से रुक गई है, लेकिन फसल चौतरफा बढिय़ा को देखकर पुराना माल स्टॉकिस्ट बेचने लगे हैं, जिससे मंडियों में मंदे का दलदल बन गया थे, लेकिन टेंपरेरी यहां 25/30 रुपए सुधर गए हैं। गेहूं की बिजाई चौतरफा जबरदस्त हुई है तथा मौसम अनुकूल होने से खेतों में तैयार फसल में दाने बहुत बढिय़ा आ रहे हैं। मध्य प्रदेश राजस्थान हरियाणा पश्चिमी उत्तर प्रदेश में जो भी कटाई अब तक हुई है, वहां प्रति हैक्टेयर उत्पादकता अधिक आ रही है तथा क्वालिटी भी सुपर आई है। हम मानते हैं कि पिछले 4-5 दिनों से लगातार बरसात एवं ओलावृष्टि के चलते जो कटाई एवं मड़ाई का काम चल रहा था, वह पूरी तरह से रुक गया है। वहां मंडियों में पुराना गेहूं 2350/2400 रुपए प्रति क्विंटल बिक रहा है। सरकारी गोदामों में भारी मात्रा में स्टॉक होने से छोटी बड़ी कंपनियां माल बेचने लगी है। हालांकि कुछ बड़ी कंपनियां पुराने एवं नए माल की खरीद करने के मूड में हैं, लेकिन बरसात होने से 10 दिन खरीद आगे टल चुकी है। गेहूं का सकल उत्पादन 1150 लाख मीट्रिक टन आने का अनुमान है, जबकि गत वर्ष 1090 लाख मीट्रिक टन उत्पादन हुआ था। वर्तमान में जो मौसम खराब है, वह हरियाणा पंजाब राजस्थान मध्य प्रदेश एवं आजमगढ़ वाराणसी तक बना हुआ है अभी केवल इस बरसात का प्रभाव मध्य प्रदेश में ही पड़ा है, दूसरे राज्यों में इस बरसात से फसल को लाभ ही मिलने वाला है। सरकार द्वारा एक अप्रैल से गेहूं की खरीद 2585 रुपए प्रति क्विंटल में होने वाला है। मध्य प्रदेश में चर्चा है कि इस पर 125 रुपए प्रति क्विंटल का सरकार बोनस देने जा रही है। यही कारण है कि वहां कुछ कंपनियों की पुराने गेहूं में खरीद शुरू हो गई है तथा किसान भी गेहूं की बिक्री रोकने के मूड में हैं, क्योंकि वर्तमान भाव से गेहूं के सरकारी खरीद भाव 300 अलग-अलग मंडियों में ऊंचा निर्धारित किया गया है। सरकार द्वारा इस बार 350 लाख मीट्रिक टन का खरीद लक्ष्य निर्धारित किया गया है, लेकिन देखना यह है कि पुराने भरे हुए गेहूं के गोदाम, नई खरीद के लिए उपलब्ध कैसे हो पाएंगे। गेहूं की फसल एवं स्टाक को देखकर सरकार पशोपेश में पड़ी हुई है। यही कारण है कि पिछले दिनों सरकार द्वारा गेहूं का निर्यात खोल दिया गया था, इससे पूर्व में सरकार ने गेहूं के उत्पादों को भी निर्यात की अनुमति दे दी थी, लेकिन अंतर्राष्ट्रीय बाजारों में नीचे भाव होने से निर्यात का सपोर्ट नहीं मिल पाया है। उसके बाद ईरान इजरायल एवं अमेरिका के युद्ध से भी गेहूं सहित सभी खाद्यान्नों के निर्यात पर जबरदस्त प्रभाव पड़ा है, इन सारी परिस्थितियों को देखते हुए फिलहाल गेहूं में तेजी का व्यापार नहीं करना चाहिए, लेकिन जिन मंडियों में 2350/2400 रुपए प्रति क्विंटल के बीच भाव चल रहे हैं, इन भावों में आगे भरपूर लाभ मिलेगा।