नेपाल से आयात पड़ता आकर्षक नहीं होने और हल्की-फुल्की लिवाली निकलने से पिछले दिनों बड़ी इलायची कैंचीकट में थोड़ा सुधार हुआ है। आने वाले दिनों में हाजिर में बड़ी इलायची में लंबी तेजी की संभावना नहीं है। नेपाल में बड़ी इलायची की आवक सामान्य से कमजोर बनी होने के कारण वहां से इसके आयात का दबाव कमजोर बना हुआ है। इसकी वजह से नेपाल से आयात पड़ता करीब 1600 रुपए प्रति किलोग्राम के आसपास बताया जा रहा है। असम को लेकर भी व्यापारी चिंतित बने हुए हैं। इसका प्रमुख कारण यह है कि वहां से इसकी आवक सामान्य से कमजोर बताई जा रही है। इधर देश में, बिक्री का हल्का-फुल्का समर्थन बना होने से हाल ही में बड़ी इलायची कैंचीकट हाल ही में उतार-चढ़ाव के बीच लिवाली सुस्त पडऩे से 10 रुपए का मामूली सुधार होकर 1650/1660 रुपए प्रति किलोग्राम पर बनी हुई है। इससे पूर्व हाल ही में इसमें 40 रुपए की तेजी आई थी। 26 मार्च को हुई अभी तक की अंतिम नीलामी में इसकी औसत नीलामी कीमत थोड़ी मंदी होकर 1400/1600 रुपए प्रति किलोग्राम पर बनी होने की सूचना मिली थी। नवीनतम सुस्ती का प्रमुख कारण यह है कि वहां इसका स्टॉक मजबूत हाथों में है। बहरहाल, इस प्रमुख किराना जिंस की पहली फसल की तरह ही दूसरी फसल भी सामान्य से काफी कमजोर आई थी। इसकी वजह यह है कि इस सीजन में फसल के विकास के समय मौसम प्रतिकूल बना रहा था। पहली फसल के बाद दूसरी फसल भी करीब-करीब पिछले सीजन के आसपास ही आने का अनुमान व्यक्त किया जा रहा है। भारत की तरह ही नेपाल में भी बड़ी इलायची की फसल को भारी नुकसान हुआ है। प्राप्त जानकारी के अनुसार नेपाल में इन दिनों बड़ी इलायची की आवक सामान्य से काफी कम हो रही है। भविष्य में वहां से आयात पड़ता और बढऩे की उम्मीद भी जताई जा रही है। भूटान और सिक्किम में भी फसल को हानि होने की खबरें आ रही हैं। वित्त वर्ष 2025-26 के आरंभिक दस महीनों में देश से कुल 239.06 करोड़ रुपए कीमत की 1320 टन बड़ी इलायची का निर्यात हुआ है। एक वर्ष पूर्व की आलोच्य अवधि में इसकी 1046 टन मात्रा का निर्यात हुआ था और इससे 172.53 करोड़ रुपए की आय हुई थी। आगामी दिनों में बड़ी इलायची में लंबी तेजी के आसार नहीं है।