सरसों तथा इसके तेल पिछले एक माह से रुक-रुक 8/16 रुपए प्रति किलो की भारी तेजी आ गई है। इस बार बरसात अच्छी हुई थी, जिससे सरकारी अनुमान से बिजाई भी 5 प्रतिशत एवं किसानों के अनुमान से 10.5 प्रतिशत अधिक रही है, इन सबके बावजूद भी वर्तमान में आई हुई तेजी केवल ईरान इजरायल अमेरिका युद्ध से आई है तथा युद्ध नहीं बंद हुआ तो बाजार और बढ़ सकते हैं। देश में वर्ष 2025 के बरसात के समय में अच्छी बरसात होने से सरकार के अनुमान के मुताबिक 5 प्रतिशत बढक़र 80 लाख हेक्टेयर भूमि से कुछ अधिक में सरसों की बिजाई होने का अनुमान रहा है। यह बिजाई गत वर्ष 76.43 लाख हैक्टेयर भूमि अब तक हुई थी, जबकि किसानों के मुताबिक औसतन 10 प्रतिशत बढक़र सरसों की बिजाई 90 लाख हेक्टेयर भूमि में इस बार इस बार रही है। इसकी फसल राजस्थान मध्य प्रदेश यूपी हरियाणा की मंडियों में चल रही है। पिछले एक महीने से ईरान इजरायल अमेरिका की जबरदस्त युद्ध चल रहा है, जिस कारण खाद्य तेलों के भाव काफी छलांग लग गए हैं। नई सरसों 42 प्रतिशत कंडीशन वाली चालू माह के पहले पखवाड़े में 6700 रुपए नीचे में जयपुर पहुंच जीएसटी अतिरिक्त बिकने के बाद वर्तमान में 7450 रुपए हो गई है। नयी सरसों की आवक 10 दिन पहले तक 11 लाख बोरी के करीब हो रही थी, जो घटकर आज 5 लाख बोरी रह गई है। तेल सरसों भी नीचे में 138/139 रुपए प्रति किलो बिकने के बाद आज 155/156 रुपए हो गया है। मौसम अनुकूल होने से चारों तरफ फसल बढिय़ा आई है। गत वर्ष की भारी तेजी को देखकर स्टॉकिस्ट अभी से सक्रिय हो गए हैं, जिससे 6700/6725 रुपए प्रति क्विंटल जीएसटी अतिरिक्त जयपुर पहुंच से नीचे में आने के बाद 7450 रुपए हो गया है, इस भाव की सरसों कारोबारियों को नुकसान दे सकती है। अत: जब तक बाजार में तेजी है, मुनाफा भी लेते रहना चाहिए। अन्यथा लंबे समय हेतु स्टॉक रिस्की रहेगा। बीते सीजन में सरसों तथा इसके तेल का स्टॉक कारोबारियों द्वारा भारी मात्रा में कर लिया गया था, जो नवंबर दिसंबर से ही बिक्री के अभाव में घबराहट में बेचने लगे थे, जिस कारण पुरानी सरसों पिछले 3 महीने के अंतराल उसमें 9 रुपए प्रति किलो घटकर भरतपुर अलवर लाइन में 42 प्रतिशत कंडीशन की सरसों जयपुर में 67 रुपए नीचे में दिख आई है। पिछले तेल तिलहन सेमिनार में सरसों का उत्पादन 111 लाख मैट्रिक टन के करीब होने का अनुमान लगाया गया था लेकिन कुछ बड़े सटोरिए इसमें उत्पादन जबरदस्त कम बता कर बाजार को अलवर भरतपुर में नीचे में 53/54 रुपए बनने के बाद 76.50 रुपए तक ऊपर में पहुंचा दिए थे। इस बार यह उत्पादन 119 लाख मीट्रिक टन से कुछ ऊपर होने का अनुमान आ रहा है। हम मानते हैं कि उत्पादन में कुछ कमी बाद में वास्तविकता में रही थी, लेकिन उतनी कमी नहीं थी, जितनी कि सटोरियों द्वारा इसको हवा दे दी गई। उसमें काफी छोटे स्टॉकिस्ट एवं तेल मिलर्स ऊपर के भाव में जाकर फंस गए हैं। इस बार मध्य पूर्व एशिया में जंग के चलते विदेशी खाद्य तेल काफी तेज हो गए हैं, अब माल आना मुश्किल हो गया है। यही कारण है कि युद्ध की आड़ में सभी तिलहन एवं तेल यहां भी बढ़ते जा रहे हैं। अभी आगे युद्ध लंबा खींचता रहा, तो और तेजी आ जाएगी, अन्यथा गले में अटक जाएगा। अत: वर्तमान के बढ़े भाव में मुनाफा भी लेते रहना चाहिए ।