वर्ष 2024 में किसानों को लाल मिर्च में लाभ नहीं मिलने से बीते वर्ष बिजाई कम हुई थी तथा आने वाली फसल भी प्रतिकूल मौसम से काफी क्षेत्रों में गल गई है। इस बार हरी मिर्च के भाव काफी ऊंचे हैं। लाल मिर्च की नई फसल आने में अभी लंबा समय बाकी है, उससे पहले दक्षिण भारत की उत्पादक मंडियों में स्टॉक की कमी है, इसे देखते हुए यहां 50/60 रुपए प्रति किलो रुक-रुक कर और बढऩे की संभावना बन गई है। मौसम अनुकूल होने से देश के सभी उत्पादक क्षेत्रों में लाल मिर्च की बिजाई पूरी हो चुकी है। पिछले दिनों की दक्षिण भारत में हुई बरसात से कुछ क्षेत्रों में पौधे गल गए थे, लेकिन वहां फिर से पौधे की रोपाई हो चुकी है तथा शत प्रतिशत अब तक लाल मिर्च के बिजाई का काम पूरा हो गया है। उत्तर भारत के किसानों को मिर्च में इस बार सीजन पर काफी नुकसान लगा है तथा उत्पादन व मिर्च की तुड़ाई की लागत महंगी हो जाने से अभी तक 27-28 प्रतिशत बिजाई कम बताई जा रही है। इसके अलावा दक्षिण भारत में गुंटूर वारंगल ब्यादगी, कडप्पा लाइन में भी विगत दो वर्षों से लाल मिर्च के भाव नहीं मिलने से किसानों ने बिजाई कम किया है तथा उसकी बजाय मक्की पर ज्यादा रुझान बना हुआ है। दूसरी ओर इसकी फसल फरवरी में आई थी तथा इस बार गुंटूर लाइन के सभी कोल्ड स्टोर में गत वर्ष की तुलना में स्टॉक कम है, डंडीदार तेजा हल्का एवं मीडियम माल का स्टॉक ज्यादा था, वह माल पंजाब हिमाचल एवं बिहार बंगाल में ज्यादा गया है, क्योंकि इंदौर लाइन की फसल इस बार पहले की अपेक्षा कम आई थी। यूपी के बरेली लाइन में भी स्टाक ज्यादा नहीं है। इस वजह से अब कोल्ड स्टोरों का माल धीरे-धीरे निकलने लगा है तथा कोई भी कारोबारी स्टॉक के प्रेशर में नहीं है, जो लाल मिर्च तेजा डंडीदार यहां 155/156 रुपए प्रति किलो बिक रही थी, उसके भाव 165/175 रुपए प्रति किलो हो गए हैं तथा फुल कट माल 210/220 रुपए बोलने लगे हैं। गौरतलब है कि 2 वर्ष पहले फुल कट तेजा 350/360 रुपए तक ऊपर में बिक गया था, इसमें 35 प्रतिशत की गिरावट आ चुकी है। डंडीदार माल नीचे में 140/150 रुपए भी बिक रहे हैं, लेकिन उन मालों का स्टॉक अब ज्यादा नहीं है। आज की तारीख में बढिय़ा तेजा दंडीदार मगांने पर 180/185 रुपए आकर पड़ रहा है, जबकि वह माल यहां 165/170 रुपए बिक रहा है। यही कारण है कि वर्तमान भाव में बाजार तेज लग रहा है। दक्षिण भारत से आने वाले हाल ही में 10/15 रुपए किलो बढ़ गए हैं। उधर हिमाचल में अधिक बरसात से पिछले दिनों तबाही हुई थी, अब धीरे-धीरे सारे रास्ते खुलने लगे हैं। आगे अगले महीने पितृपक्ष एवं नवरात्रि के चलते चालानी मांग और बढऩे की संभावना है, जिस कारण लाल मिर्च में नई फसल से पहले 50/60 रुपए प्रति किलो और बढ़ जाने की संभावना बन गई है। गुंटूर लाइन के कोल्ड स्टोर में गत वर्ष की तुलना में स्टाक कम है तथा वारंगल दुग्गीराला ब्यादगी लाइन में भी माल ज्यादा नहीं है तथा वहां जो स्टाक में माल पड़ा है, उसके ऊंचे भाव बोल रहे हैं। उधर बिहार बंगाल झारखंड एवं मध्य प्रदेश में ज्यादा माल नहीं है, वहां के लिए नीचे वाली क्वालिटी में अच्छी लिवाली चल रही है, जो गुंटूर लाइन से सीधे माल जा रहा है। वहां के लिए डंडीदार हल्की क्वालिटी एवं 334 न. पाला माल ज्यादा लोड हो रहा है। इसके अलावा फटकी माल भी जा रहा है। यही कारण है कि वहां से पड़ते दिल्ली सहित उत्तर भारत की मंडियों के लिए महंगे लग रहे हैं। आने वाली फसल में अभी लंबा समय बाकी है, उससे पहले शादियों एवं त्यौहारों की खपत के लिए लाल मिर्च का स्टॉक अनुरूप नहीं है। इस बार जो भी माल है, वह दिल्ली जयपुर कानपुर मंडी में है, इंदौर मंडी में भी कम स्टॉक है। उत्पादक मंडियों में पहले से ही इस बार माल की कमी है। अत: लाल मिर्च में 50/60 रूपए प्रति किलो की रुक रुक कर और तेजी लग रही है।