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Daily Business Newspaper | A Knowledge Powerhouse in Hindi

04-10-2025

गेहूं का स्टॉक ज्यादा होने से लंबी तेजी नहीं समर्थन मूल्य बढऩे से बिजाई अधिक होगी

  •  गेहूं का उत्पादन अधिक होने तथा सरकार की खरीद नीति सुलभ होने से केंद्रीय पूल में इस बार प्रचुर मात्रा में स्टाक हो गया है। दूसरी ओर कच्ची मंडियों में भी स्टॉक भरपूर मात्रा में होने से लंबी तेजी दिखाई नहीं दे रही है।आज सरकार द्वारा विपणन वर्ष 2026-27 के लिए गेहूं का न्यूनतम समर्थन मूल्य बढ़ा दिया गया, इससे किसानों का रुझान बढ़ेगा। सरकार द्वारा खाद्यान्नों के उत्पादन को बढ़ाने के लिए आज गेहूं का न्यूनतम समर्थन मूल्य 2425 से बढक़र 2585 रुपए प्रति क्विंटल कर दिया गया,  जिससे आने वाली बिजाई सीजन में इसकी बिजाई बढ़ सकती है। गेहूं का उत्पादन अधिक होने से  चालू विपणन वर्ष में सरकार की खरीद विगत 3 वर्षों की तुलना में अधिक हुई है। गत 30 जून तक गेहूं की खरीद 298.70 लाख मीट्रिक टन हो गई थी तथा पुराना स्टॉक भी अधिक बचा था। यही कारण है कि एक महीने पहले ऊपर में 2900 रुपए प्रति क्विंटल गेहूं बिकने के बाद वर्तमान में घटकर 2810/2820 रुपए प्रति कुंतल रह गया है तथा बढिय़ा माल 2830 रुपए तक बिक रहा है। गौरतलब है कि सरकार द्वारा भारत ब्रांड आटा का टेंडर किया गया है तथा वह माल मंडियों में शीघ्र आने की संभावना है। यही कारण है कि बाजार में रोलर फ्लोर मिलों की मांग पूरी तरह ठंडी पड़ गई है तथा आम उपभोक्ताओं को सस्ता भारत ब्रांड आटा मिलने की संभावना से मिलें घटाकर माल बेचने लगी है। दूसरी ओर नवरात्रि की मांग समाप्त हो जाने से मैदा सूजी के भाव भी आज 20/30 रुपए प्रति 50 किलो घट गए। चोकर में भी जम्मू कश्मीर, पंजाब एवं हिमाचल प्रदेश की मांग अनुकूल नहीं होने से 40 रुपए घटकर 1100/1120 रुपए प्रति 50 किलो भाव रह गए। गौरतलब है कि गत वर्ष सरकार की बिक्री नीति ढुलमुल होने से गेहूं 3300/3400 रुपए प्रति क्विंटल के बीच बन गया था, लेकिन इस बार ऐसा आभास हो रहा है कि गेहूं 3000 रुपए को भी पार कर पाना मुश्किल लग रहा है। सीजन में इसके भाव आपूर्ति घटने से बढ़ गए थे, लेकिन जैसे ही सरकार द्वारा गेहूं खुले बाजार में बेचने की घोषणा की गई तथा भारत ब्रांड आटे का टेंडर हुआ, बाजार टूटने लगे तथा अब स्थिति यह हो गई है कि एक तरफ किसान भी बिकवाल आ गए हैं।, दूसरी ओर कच्ची मंडियों के कारोबारी भी स्टॉक के माल बेचने लगे हैं, जिससे चालू महीने में अब तेजी की गुंजाइश नहीं लग रही है। नवरात्रि दशहरा एवं दिवाली की मांग पूरी हो गई है। अभी तक सरकार द्वारा खुले बाजार में ओएमएसएस के माध्यम से गेहूं की बिक्री टेंडर द्वारा नहीं बेचा गया है। अब देखना यह है कि जो सरकार द्वारा रिजर्व प्राइस 2550 रुपए प्रति क्विंटल निर्धारित किया गया है, उसमें कब बेची जा रही है। इस तरह कुल मिलाकर इस बार गेहूं में लंबी तेजी का व्यापार नहीं करना चाहिए।

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गेहूं का स्टॉक ज्यादा होने से लंबी तेजी नहीं समर्थन मूल्य बढऩे से बिजाई अधिक होगी

 गेहूं का उत्पादन अधिक होने तथा सरकार की खरीद नीति सुलभ होने से केंद्रीय पूल में इस बार प्रचुर मात्रा में स्टाक हो गया है। दूसरी ओर कच्ची मंडियों में भी स्टॉक भरपूर मात्रा में होने से लंबी तेजी दिखाई नहीं दे रही है।आज सरकार द्वारा विपणन वर्ष 2026-27 के लिए गेहूं का न्यूनतम समर्थन मूल्य बढ़ा दिया गया, इससे किसानों का रुझान बढ़ेगा। सरकार द्वारा खाद्यान्नों के उत्पादन को बढ़ाने के लिए आज गेहूं का न्यूनतम समर्थन मूल्य 2425 से बढक़र 2585 रुपए प्रति क्विंटल कर दिया गया,  जिससे आने वाली बिजाई सीजन में इसकी बिजाई बढ़ सकती है। गेहूं का उत्पादन अधिक होने से  चालू विपणन वर्ष में सरकार की खरीद विगत 3 वर्षों की तुलना में अधिक हुई है। गत 30 जून तक गेहूं की खरीद 298.70 लाख मीट्रिक टन हो गई थी तथा पुराना स्टॉक भी अधिक बचा था। यही कारण है कि एक महीने पहले ऊपर में 2900 रुपए प्रति क्विंटल गेहूं बिकने के बाद वर्तमान में घटकर 2810/2820 रुपए प्रति कुंतल रह गया है तथा बढिय़ा माल 2830 रुपए तक बिक रहा है। गौरतलब है कि सरकार द्वारा भारत ब्रांड आटा का टेंडर किया गया है तथा वह माल मंडियों में शीघ्र आने की संभावना है। यही कारण है कि बाजार में रोलर फ्लोर मिलों की मांग पूरी तरह ठंडी पड़ गई है तथा आम उपभोक्ताओं को सस्ता भारत ब्रांड आटा मिलने की संभावना से मिलें घटाकर माल बेचने लगी है। दूसरी ओर नवरात्रि की मांग समाप्त हो जाने से मैदा सूजी के भाव भी आज 20/30 रुपए प्रति 50 किलो घट गए। चोकर में भी जम्मू कश्मीर, पंजाब एवं हिमाचल प्रदेश की मांग अनुकूल नहीं होने से 40 रुपए घटकर 1100/1120 रुपए प्रति 50 किलो भाव रह गए। गौरतलब है कि गत वर्ष सरकार की बिक्री नीति ढुलमुल होने से गेहूं 3300/3400 रुपए प्रति क्विंटल के बीच बन गया था, लेकिन इस बार ऐसा आभास हो रहा है कि गेहूं 3000 रुपए को भी पार कर पाना मुश्किल लग रहा है। सीजन में इसके भाव आपूर्ति घटने से बढ़ गए थे, लेकिन जैसे ही सरकार द्वारा गेहूं खुले बाजार में बेचने की घोषणा की गई तथा भारत ब्रांड आटे का टेंडर हुआ, बाजार टूटने लगे तथा अब स्थिति यह हो गई है कि एक तरफ किसान भी बिकवाल आ गए हैं।, दूसरी ओर कच्ची मंडियों के कारोबारी भी स्टॉक के माल बेचने लगे हैं, जिससे चालू महीने में अब तेजी की गुंजाइश नहीं लग रही है। नवरात्रि दशहरा एवं दिवाली की मांग पूरी हो गई है। अभी तक सरकार द्वारा खुले बाजार में ओएमएसएस के माध्यम से गेहूं की बिक्री टेंडर द्वारा नहीं बेचा गया है। अब देखना यह है कि जो सरकार द्वारा रिजर्व प्राइस 2550 रुपए प्रति क्विंटल निर्धारित किया गया है, उसमें कब बेची जा रही है। इस तरह कुल मिलाकर इस बार गेहूं में लंबी तेजी का व्यापार नहीं करना चाहिए।


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