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25-09-2025

जीएसटी घटने से देसी घी सस्ता हुआ, लेकिन दिवाली छठ पूजा तक खपत रहेगी

  •  देसी घी में आई रिकॉर्ड तेजी एवं उद्योग व पशुपालकों की परेशानी को देखते हुए सरकार द्वारा देसी घी पर 12 से घटाकर पांच प्रतिशत जीएसटी कर दिया गया। कंपनियों द्वारा सात प्रतिशत जीएसटी घटाकर बिलिंग किए जाने से आज 600 रुपए प्रति टीन देसी घी के भाव घट गए, लेकिन अभी दिवाली एवं छठ पूजा में खपत अधिक रहेगी, इसलिए लिक्विड दूध एवं बटर की कमी से बाजार दोबारा देशी घी तेज ही रहने वाला है। हम मानते हैं कि देसी घी के उत्पादन में धीरे-धीरे इजाफा हो रहा है तथा लिक्विड दूध बढऩे के साथ-साथ फैट की मात्रा उसमें बढ़ी है। दूसरी ओर सरकार द्वारा इंडस्ट्रीज एवं उपभोक्ताओं को ध्यान में रखते हुए जीएसटी 12 से घटाकर पांच प्रतिशत कर दिए जाने से बाजार एक बार 600 रुपए घटकर 9300/9400 रुपए प्रति टीन प्रीमियम क्वालिटी के रह गए हैं। इन भावों में एक बार फिर देसी घी की खरीद करनी चाहिए, क्योंकि किसी भी प्लांट में बटर का स्टॉक नहीं है तथा लिक्विड दूध की प्रोसेसिंग कुछ गिने-चुने प्लांट ही कर रहे हैं, इसलिए अभी देसी घी की कीमत और कम होने वाली नहीं है। वर्तमान का मंदा केवल सरकार द्वारा जीएसटी घटा दिए जाने से टेंपरेरी आया है। वास्तविकता यह है कि जब प्लांटों में माल ही नहीं रहेगा तथा नवरात्रि चल रही है, इसके बाद दिवाली की मांग चल पड़ेगी। पूर्वांचल में छठ महापर्व का बहुत बड़ा व्रत दिवाली के छठवें दिन होता है, उसमें प्रत्येक व्रत धारी के घर कम से कम एक पैकेट देसी घी खपता है, वैसे समांतर दो-तीन पैकेट उपभोक्ता पैक में देसी घी लगता है, इसलिए देसी घी में और बिल्कुल मंदे की गुंजाइश नहीं है। अत: धैर्य से अपना माल बेचते रहना है, इसमें गिरावट अक्टूबर के लास्ट में शुरू होगी, उस समय नीचे में प्रीमियम क्वालिटी का देसी ही 8000 बन सकता है। अभी लिक्विड दूध के भाव 64 रुपए प्रति लीटर के आसपास चल रहे हैं, लेकिन खरीद में प्रतिस्पर्धा हो रही है, क्योंकि अधिकतर प्लांटों के अपने पॉलिपैक की सप्लाई है, इसलिए बढिय़ा दूध छंट कर उसमें चला जाता है। इसके अलावा दिवाली तक गुलाब जामुन पाउडर सहित अन्य पनीर फ्लेवर मिल्क में लिक्विड दूध खपना है, इसलिए देसी घी का उत्पादन नवंबर में ही बढ़ेगा। दूसरी बात यह है कि अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अभी भी बटर के ऊंचे भाव चल रहे हैं, जिस कारण  आगे भी देसी घी में ज्यादा मंदा रहने वाला नहीं है। हम मानते हैं कि मिलावटी देसी घी, बढिय़ा निर्माताओं को परेशान जरूर करते हैं, लेकिन अब देश के उपभोक्ता बढिय़ा कंपनियों के देसी घी ही पसंद कर रहे हैं।, इसलिए आराम से देसी घी का व्यापार करना चाहिए। अभी अक्टूबर के अंत तक कोई रिस्क नहीं है तथा वर्तमान में जीएसटी घटाकर कंपनियां दे रही है, इसमें माल की खरीद करनी चाहिए।

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जीएसटी घटने से देसी घी सस्ता हुआ, लेकिन दिवाली छठ पूजा तक खपत रहेगी

 देसी घी में आई रिकॉर्ड तेजी एवं उद्योग व पशुपालकों की परेशानी को देखते हुए सरकार द्वारा देसी घी पर 12 से घटाकर पांच प्रतिशत जीएसटी कर दिया गया। कंपनियों द्वारा सात प्रतिशत जीएसटी घटाकर बिलिंग किए जाने से आज 600 रुपए प्रति टीन देसी घी के भाव घट गए, लेकिन अभी दिवाली एवं छठ पूजा में खपत अधिक रहेगी, इसलिए लिक्विड दूध एवं बटर की कमी से बाजार दोबारा देशी घी तेज ही रहने वाला है। हम मानते हैं कि देसी घी के उत्पादन में धीरे-धीरे इजाफा हो रहा है तथा लिक्विड दूध बढऩे के साथ-साथ फैट की मात्रा उसमें बढ़ी है। दूसरी ओर सरकार द्वारा इंडस्ट्रीज एवं उपभोक्ताओं को ध्यान में रखते हुए जीएसटी 12 से घटाकर पांच प्रतिशत कर दिए जाने से बाजार एक बार 600 रुपए घटकर 9300/9400 रुपए प्रति टीन प्रीमियम क्वालिटी के रह गए हैं। इन भावों में एक बार फिर देसी घी की खरीद करनी चाहिए, क्योंकि किसी भी प्लांट में बटर का स्टॉक नहीं है तथा लिक्विड दूध की प्रोसेसिंग कुछ गिने-चुने प्लांट ही कर रहे हैं, इसलिए अभी देसी घी की कीमत और कम होने वाली नहीं है। वर्तमान का मंदा केवल सरकार द्वारा जीएसटी घटा दिए जाने से टेंपरेरी आया है। वास्तविकता यह है कि जब प्लांटों में माल ही नहीं रहेगा तथा नवरात्रि चल रही है, इसके बाद दिवाली की मांग चल पड़ेगी। पूर्वांचल में छठ महापर्व का बहुत बड़ा व्रत दिवाली के छठवें दिन होता है, उसमें प्रत्येक व्रत धारी के घर कम से कम एक पैकेट देसी घी खपता है, वैसे समांतर दो-तीन पैकेट उपभोक्ता पैक में देसी घी लगता है, इसलिए देसी घी में और बिल्कुल मंदे की गुंजाइश नहीं है। अत: धैर्य से अपना माल बेचते रहना है, इसमें गिरावट अक्टूबर के लास्ट में शुरू होगी, उस समय नीचे में प्रीमियम क्वालिटी का देसी ही 8000 बन सकता है। अभी लिक्विड दूध के भाव 64 रुपए प्रति लीटर के आसपास चल रहे हैं, लेकिन खरीद में प्रतिस्पर्धा हो रही है, क्योंकि अधिकतर प्लांटों के अपने पॉलिपैक की सप्लाई है, इसलिए बढिय़ा दूध छंट कर उसमें चला जाता है। इसके अलावा दिवाली तक गुलाब जामुन पाउडर सहित अन्य पनीर फ्लेवर मिल्क में लिक्विड दूध खपना है, इसलिए देसी घी का उत्पादन नवंबर में ही बढ़ेगा। दूसरी बात यह है कि अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अभी भी बटर के ऊंचे भाव चल रहे हैं, जिस कारण  आगे भी देसी घी में ज्यादा मंदा रहने वाला नहीं है। हम मानते हैं कि मिलावटी देसी घी, बढिय़ा निर्माताओं को परेशान जरूर करते हैं, लेकिन अब देश के उपभोक्ता बढिय़ा कंपनियों के देसी घी ही पसंद कर रहे हैं।, इसलिए आराम से देसी घी का व्यापार करना चाहिए। अभी अक्टूबर के अंत तक कोई रिस्क नहीं है तथा वर्तमान में जीएसटी घटाकर कंपनियां दे रही है, इसमें माल की खरीद करनी चाहिए।


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