जगलिंग यानी कलाबाजी। भारत सरकार ने इकोनॉमी को शॉक से बचाने के लिए गोल्ड-सिल्वर पर इंपोर्ट ड्यूटी 6 परसेंट से बढ़ाकर 15 परसेंट कर दी। लेकिन एनेलिस्ट्स का कहना है कि जरूरी नहीं सरकार का यह कदम सिल्वर बुलट साबित हो। सिल्वर बुलट यानी रामबाण ईलाज। वित्त वर्ष26 में भारत का गोल्ड और सिल्वर इंपोर्ट रिकॉर्ड 84 बिलियन डॉलर रहा जो एक दशक पहले केवल 35.5 बिलियन डॉलर था। ईवी, इलेक्ट्रॉनिक्स और सोलर एनर्जी बूम से भी सिल्वर की डिमांड भी बढ़ रही है। पिछले एक वर्ष में गोल्ड और सिल्वर की डिमांड फैमिली ज्यूलरी के बजाय इंवेस्टमेंट के कारण अधिक बढ़ी है। सिल्वर ईटीएफ में इंवेस्टमेंट रिकॉर्ड लेवल पर पहुंच गया है। पिछले दस वर्ष में गोल्ड प्राइस 443 परसेंट बढऩे के बावजूद औसत सालाना डिमांड करीब 718 टन रही। 2012-13 में भी गोल्ड पर इंपोर्ट ड्यूटी 2 परसेंट से बढ़ाकर 10 परसेंट की गई थी लेकिन डिमांड पर कोई असर नहीं पड़ा। अकेले 2025 में ही गोल्ड प्राइस 76.5 परसेंट बढ़ चुकी है ऐसे में एनेलिस्ट कहते हैं कि केवल 9 परसेंट एक्स्ट्रा टैरिफ से गोल्ड खरीदना बंद हो जाएगा ऐसा लगता नहीं है। भारत में गोल्ड की कुल डिमांड में 75 परसेंट शेयर ज्यूलरी का है। एनेलिस्ट्स कहते हैं प्राइस बढऩे के कारण गोल्ड की ज्यूलरी डिमांड कमजोर पड़ रही थी। टैरिफ बढऩे से शॉर्ट टर्म में ज्यूलरी की डिमांड और घट सकती है। लेकिन टैरिफ बढऩे से प्राइस बढ़ती हैं और गोल्ड एक ऐसा आकर्षक असैट बन जाता है जिसका वेल्यूएशन तेजी से बढ़ रहा है। यानी इंपोर्ट ड्यूटी बढ़ाने और आगे भी प्राइस बढऩे की आशंका के चलते अच्छे रिटर्न की उम्मीद में नए इंवेस्टर मार्केट में आ सकते हैं। मार्च तिमाही में पहली बार गोल्ड की इंवेस्टमेंट डिमांड ने ज्यूलरी डिमांड को पीछे छोड़ दिया। शेयर मार्केट में कमजोर रिटर्न के कारण भी इंवेस्टर गोल्ड पर दांव बढ़ा रहे हैं। गोल्ड पर ग्रे मार्केट ऑपरेटरों का मार्जिन पहले 9 परसेंट था जो इंपोर्ट ड्यूटी बढऩे से लगभग 18 परसेंट हो गया है। यानी गोल्ड की स्मगलिंग बढऩे का खतरा है। 2023 तक ग्रे चैनल से 100 टन से ज्यादा गोल्ड आ रहा था लेकिन 2024 में जैसे ही सरकार ने ड्यूटी घटाई स्मगलिंग भी घट गई। वर्ष 2023 में 156.1 टन की तुलना में 2024 में स्मगलिंग घटकर 69.2 टन रह गई और 2025 में केवल 20.4 टन। एनेलिस्ट कहते हैं कि 1 किलो गोल्ड पर स्मगलिंग मार्जिन रिकॉर्ड 30 लाख रुपये तक पहुंच गया है यानी यह ग्रे चैनल ऑपरेटरों के लिए खुला आमंत्रण है। फाउंडेशन फॉर इकोनॉमिक डवलपमेंट के राहुल अहलूवालिया का मानना है ट्रेड पॉलिसी से कंज्यूमर और इंडस्ट्री के बाइंग पैटर्न को माइक्रोमैनेज करने से बचना चाहिए। इंपोर्ट ड्यूटी बढऩे से ज्वेलरी सेक्टर में जॉब्स और एक्सपोर्ट पर असर पड़ सकता है और इंवेस्टमेंट की क्षमता भी घटेगी। एनेलिस्ट सचिन सावरिकर के अनुसार प्रेशियस मेटल्स (गोल्ड, सिल्वर) की डिमांड साइकलिक नहीं बल्कि स्ट्रक्चरल है। गोल्ड-सिल्वर की डिमांड भारतीयों की बचत की कल्चर. फेस्टिवल बाइंग और करोड़ों परिवारों के निवेश व्यवहार से जुड़ी हुई है। जब वैध चैनल से खरीद महंगी हो जाती है, तो ग्रे मार्केट उस खाली जगह को भर देता है।
