भारत का सेकंड हैंड या यूज्ड कार बाजार 2031 तक बढक़र लगभग 70 बिलियन डॉलर तक पहुंच सकता है। जो पिछले वित्त वर्ष के 35 बिलियन डॉलर के यूज्ड कार मार्केट के मुकाबले करीब दोगुना है। मार्केट कन्सल्टेंट रेडसीर की रिपोर्ट में कहा गया कि बढ़ती अफोर्डेबिलिटी, तेज होते रिप्लेसमेंट साइकल सहित कई फैक्टर मिलकर भारत को दुनिया के सबसे आकर्षक यूज्ड कार मार्केट्स में शामिल कर रहे हैं। रिपोर्ट के अनुसार वर्तमान में भारत ग्लोबल यूज्ड कार बाजार में पांचवें स्थान पर है और इस दशक के अंत तक अमेरिका और चीन के बाद तीसरा सबसे बड़ा बाजार बनने का अनुमान है। रिपोर्ट के मुताबिक तकनीकी अपग्रेड, रेगुलेटरी बदलाव और बदलती पसंद के कारण यूजर अब गाड़ी पहले से कम समय चला रहे हैं और जल्दी-जल्दी अपग्रेड कर रहे हैं। इससे यूज्ड कार इकोसिस्टम में सप्लाई और रीसेल का दायरा तेजी से बढ़ेगा। रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि वित्त वर्ष31 तक सालाना रिटेल यूज्ड कार सेल्स 90 लाख से 1 करोड़ यूनिट तक पहुंच सकती है। वहीं औसत सेल्स प्राइस (टिकट साइज) बढक़र लगभग 6.5 लाख से 6.9 लाख रुपये तक हो सकती है। इसका कारण प्रीमियम वाहनों की बढ़ती मांग और बेहतर क्वॉलिटी वाली इन्वेंट्री की सप्लाई होना है। रिपोर्ट के अनुसार विकसित देशों के यूज्ड कार मार्केट्स फ्लैट ग्रोथ से बढ़ रहे हैं वहीं भारत बड़े ऑटो मार्केट्स में सबसे तेजी से बढऩे वाला बाजार बना हुआ है। इसका कारण बढ़ती आमदनी, प्रीमियमाइजेशन और तेजी से बढ़ता कार बाजार है, जिसके वित्त वर्ष31 तक 5 करोड़ वाहनों से अधिक होने का अनुमान है। इस ग्रोथ के पीछे सबसे बड़ा स्ट्रक्चरल शिफ्ट वाहन बदलने की अवधि (रिप्लेसमेंट) में कमी है। वित्त वर्ष21 में जहां कार औसत 7-8 साल चलाने के बाद ही कार बदली जा रही थी वहीं वित्त वर्ष31 तक इसके घटकर 4-5 वर्ष होने की उम्मीद है। मेट्रो और टियर-1 शहरों में तो रिप्लेसमेंट साइकल और भी तेज है। रेडसीर स्ट्रैटेजी कंसल्टेंट्स के एसोसिएट पार्टनर कुशल भटनागर के अनुसार अनऑर्गेनाइज्ड से ऑर्गेनाइज्ड और प्राइस बेस्ड सिस्टम से ट्रस्ट बेस्ड इकोसिस्टम में बदल रहा है। घटती रिप्लेसमेंट अवधि, बढ़ती आय और फाइनेंसिंग डिमांड और सप्लाई दोनों को बढ़ा रही है। वित्त वर्ष31 तक रिप्लेसमेंट साइकल घटकर 4-5 वर्ष रह जाएगा, जिससे मार्केट में सप्लाई तेज होगी। रिपोर्ट के मुताबिक वित्त वर्ष31 तक लगभग 28 करोड़ परिवार यूज्ड कार खरीदने में सक्षम होंगे। इनमें से करीब 65 परसेंट फस्र्ट टाइम कार बायर होंगे। रेडसीर के कन्सल्टेंट कुशल भटनागर के अनुसार अब यूज्ड कार अब केवल मजबूरी का सस्ता विकल्प नहीं बल्कि बेहतर वैल्यू, भरोसेमंद गुणवत्ता और संगठित प्लेटफॉम्र्स की सुविधा के कारण मेनस्ट्रीम हो रहा है। जैसे-जैसे फुल-स्टैक ऑर्गेनाइज्ड प्लेटफॉम्र्स का विस्तार होगा और लंबे समय से मौजूद भरोसे की कमी दूर होगी।रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि यूज्ड कार फाइनेंसिंग की पहुंच बढक़र 30-40 परसेंट तक हो सकती है, जिससे खरीदारी और अधिक आसान होगी। हालांकि अभी भी लगभग 80 परसेंट लेनदेन अनऑर्गेनाइज्ड सैक्टर में होते हैं जिससे भरोसेमंद और ऑर्गेनाइज्ड प्लेटफॉम्र्स के लिए बड़ी संभावनाएं मौजूद हैं। इसके बावजूद भारत में यूज्ड-टू-न्यू कार अनुपात अभी केवल 1.3-1.4 है, जो ग्रोथ की बड़ी संभावनाओं की ओर इशारा करता है। रिपोर्ट के अनुसार वित्त वर्ष31 तक फुल-स्टैक कंपनियों का मार्केट शेयर 5-6 परसेंट और उनका ग्रॉस मर्चेंडाइज वैल्यू (जीएमवी) लगभग 4 बिलियन डॉलर तक पहुंच सकता है। महानगरों में उनकी हिस्सेदारी करीब 15 परसेंट रहने का अनुमान है। रिपोर्ट में कहा गया कि मौजूदा गति से बढऩे पर वित्त वर्ष 31 तक भारत का यूज्ड-टू-न्यू कार अनुपात 1.6-1.7 तक पहुंच सकता है, जो विकसित बाजारों से अब भी काफी कम होगा। इससे स्पष्ट है कि भारत का यूज्ड कार मार्केट अभी भी अपनी वास्तविक क्षमता से कम प्रदर्शन कर रहा है।