ईरान वॉर और वित्त वर्ष के अंत के बाद कारोबार में आने वाली सामान्य सुस्ती का असर अब भारत में माल ढुलाई के आंकड़ों में दिखने लगा है। मार्च में रिकॉर्ड स्तर छूने के बाद अप्रैल में ई-वे बिल जनरेशन घट गया। जीएसटीएन द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, राज्यों के भीतर और राज्यों के बीच माल परिवहन के लिए जारी किए जाने वाले इलेक्ट्रॉनिक परमिट यानी ई-वे बिल अप्रैल में 5 परसेंट घटकर 13.33 करोड़ रह गए। मार्च में यह आंकड़ा रिकॉर्ड 14.06 करोड़ पर पहुंच गया था। यह गिरावट ऐसे समय आई है जब दुनियाभर के कारोबार वेस्ट एशिया तनाव के प्रभाव पर करीबी नजर बनाए हुए हैं। सबसे ज्यादा चिंता कच्चे तेल की प्राइस, शिपिंग रूट्स, लॉजिस्टिक्स कॉस्ट और ग्लोबल बिजनस सेंटिमेंट को लेकर है। उद्योग विशेषज्ञों का कहना है कि अप्रैल की गिरावट मुख्य रूप से मौसमी है, लेकिन भू-राजनीतिक अनिश्चितता के कारण कंपनियों ने नए वित्त वर्ष के शुरुआती हफ्तों में इन्वेंटरी मूवमेंट और नई सप्लाई डिस्पैच को लेकर सतर्क रुख भी अपनाया हो सकता है। ई-वे बिल जनरेशन को देशभर में माल की आवाजाही और व्यापक आर्थिक गतिविधियों का महत्वपूर्ण संकेतक माना जाता है। मार्च में आमतौर पर ई-वे बिल संख्या तेज रहती है क्योंकि कंपनियां वित्त वर्ष समाप्त होने से पहले डिस्पैच पूरा करने, बिक्री बढ़ाने, स्टॉक खाली करने और वार्षिक खातों को बंद करने में जुट जाती हैं। अप्रैल में नए वित्त वर्ष 27 की शुरुआत के साथ लॉजिस्टिक्स गतिविधियों में सामान्य नरमी देखी जाती है। हालांकि मासिक आधार पर गिरावट आई, लेकिन अप्रैल के आंकड़े अब भी मजबूत वार्षिक वृद्धि का संकेत दे रहे हैं। ई-वे बिल जनरेशन साल-दर-साल आधार पर 12 परसेंट बढ़ी, जिससे संकेत मिलता है कि घरेलू मांग और औपचारिक आर्थिक गतिविधियां अभी भी मजबूत बनी हुई हैं। ग्रांट थॉर्नटन भारत के पार्टनर मनोज मिश्रा ने कहा कि अप्रैल 2026 में ई-वे बिल जनरेशन में 12 परसेंट की वार्षिक ग्रोथ से पता चलता है कि आर्थिक गतिविधियां मजबूत बनी हुई हैं, माल की आवाजाही अच्छी है। इसका बड़ा कारण ईयर एंड सेल्स प्रेशर, इन्वेंटरी एडजस्टमेंट और बुक्स क्लोजिंग जैसी गतिविधियों के कारण व्यापारिक गतिविधियां आमतौर पर अधिक रहती हैं। उन्होंने यह भी कहा कि ई-वे बिल ट्रेंड घरेलू मांग और मैन्युफैक्चरिंग, लॉजिस्टिक्स और कंज्यूमर इकोनॉमी कर अनुपालन में सुधार का संकेत देते हैं। फिलहाल, ई-वे बिल जनरेशन में डबल डिजिट की ग्रोथ यह संकेत देती है कि वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद भारत की घरेलू व्यापारिक गतिविधियां अभी भी मजबूत बनी हुई हैं।