TOP

ई - पेपर Subscribe Now!

ePaper
Subscribe Now!

Download
Android Mobile App

Daily Business Newspaper | A Knowledge Powerhouse in Hindi

09-05-2026

GCC ऐसे बन गया Jackpot!

  •  नैस्कॉम और •िानोव की ताजा रिपोर्ट के अनुसार भारत का ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (जीसीसी) इकोसिस्टम लगातार तेजी से बढ़ रहा है। वित्त वर्ष 2026 में 100 से ज्यादा नए जीसीसी जुड़े और इस तरह देश में कुल कुल जीसीसी की संख्या बढक़र 2,117 हो गई। इन केंद्रों में 23 लाख से अधिक प्रोफेशनल काम कर रहे हैं और इनसे होने वाला कुल रेवेन्यू लगभग 100 बिलियन डॉलर तक पहुंच गया है। भारत में जीसीसी की संख्या वित्त वर्ष 2021 के 1,600 केंद्रों से बढक़र वित्त वर्ष 2026 में अनुमानित 2,117 तक पहुंच गई, जो लगभग 32 परसेंट की ग्रोथ है।  इन्हीं पांच वर्ष में रेवेन्यू 61.4 बिलियन डॉलर से 60 परसेंट बढक़र 98.4 बिलियन डॉलर हो गया। इस दौरान जीसीसी में कर्मचारियों की संख्या 17 लाख के मुकाबले 35 परसेंट बढक़र 23 लाख हो गई। नैसकॉम की 2024 जीसीसी लैंडस्केप रिपोर्ट में वित्त वर्ष 2024 के लिए 1,700 से अधिक जीसीसी का अनुमान लगाया गया था, लेकिन इतने ज्यादा जीसीसी भारत में खुल रहे हैं कि नैस्कॉम को अपना फिगर सुधारकर 1,855 करना पड़ गया। भारत अब एआई के क्षेत्र में भी एक बड़ी ताकत बनकर उभर रहा है। देश में 2.5 लाख से अधिक एआई प्रोफेशनल्स और 1,200 से ज्यादा सेंटर ऑफ एक्सीलेंस मौजूद हैं, जिससे एंटरप्राइज एआई में भारत की नेतृत्व क्षमता मजबूत हो रही है। नैसकॉम के उपाध्यक्ष और सार्वजनिक नीति प्रमुख आशीष अग्रवाल के अनुसार भारत जीसीसी कैपिटल ऑफ द वल्र्ड है।  साथ ही, भारत का जीसीसी इकोसिस्टम अब वैल्यू चेन में ऊपर की ओर बढ़ रहा है। लगभग 46 परसेंट जीसीसी अब पोर्टफोलियो या ट्रांसफॉर्मेशन हब के रूप में काम कर रहे हैं, जबकि वित्त वर्ष 2021 में यह आंकड़ा 42' था। खास बात यह है कि नए जीसीसी में से 27 परसेंट केवल पांच वर्ष के भीतर इस स्तर तक पहुंच जाते हैं, जबकि पहले इसमें लगभग एक दशक लग जाता था। लीडरशिप भूमिकाओं में भी बदलाव देखा जा रहा है। करीब 64 परसेंट साइट हेड्स अब ड्यूल मैंडेट के साथ काम कर रहे हैं, यानी वे एक तरफ ग्लोबल बिजनेस ऑपरेशन्स संभाल रहे हैं और दूसरी तरफ स्थानीय केंद्रों का नेतृत्व भी कर रहे हैं। रिपोर्ट के अनुसार वित्त वर्ष 2030 तक लगभग 75 परसेंट जीसीसी पोर्टफोलियो या ट्रांसफॉर्मेशन हब में बदल सकते हैं। इससे संकेत मिलता है कि यह सेक्टर एंड-टू-एंड ओनरशिप, इंटेलेक्चुुअल प्रॉपर्टी डवलपमेंट और एआई-नेटिव ऑपरेशंस की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। भारत के केंद्रीय बजट 2026 ने आईटी और आईटीईएस क्षेत्र, विशेष रूप से जीसीसी के लिए एक मजबूत नीतिगत बढ़ावा दिया है। ट्रांसफर प्राइसिंग में सेफ हार्बर नियम में संशोधन किया गया है। अब 15.5 परसेंट प्रोफिट मार्जिन घोषित करने वाली कंपनियां ग्रीन चैनल मार्ग के लिए पात्र होंगी, जिससे कर जांच का जोखिम कम हो जाएगा। इस लाभ के लिए टर्नओवर सीमा को 300 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 2,000 करोड़ रुपये कर दिया गया है।

    लाइफ साइंस का ग्लोबल हब : दुनिया की टॉप 50 लाइफ साइंस कंपनियों में से लगभग आधी ने अब अपने ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (जीसीसी) भारत में स्थापित किए हैं। अन्स्र्ट एंड यंग की लेटेस्ट रिपोर्ट के अनुसार, फिलहाल भारत में करीब 100 लाइफ साइंसेज जीसीसी चल रहे हैं और पांच वर्ष में यह संख्या बढक़र 160 तक पहुंच सकती है।भारत अब केवल कम लागत वाले सपोर्ट बेस तक सीमित नहीं रहा, बल्कि ग्लोबप फार्मा और हेल्थकेयर के लिए इनोवेशन सेंटर बन गया है। भारत में ये कंपनियां क्लिनिकल ट्रायल ऑपरेशंस, फार्माकोविजिलेंस, बायोस्टैटिस्टिक्स, डिजिटल थेरेप्यूटिक्स और रियल-वल्र्ड एविडेंस एनालिटिक्स जैसे ऑपरेशन्स चला रही हैं। भारत में हर साल 20 लाख स्टेम ग्रेजुएट और 1.10 लाख डॉक्टर तैयार होते हैं।

Share
GCC ऐसे बन गया Jackpot!

 नैस्कॉम और •िानोव की ताजा रिपोर्ट के अनुसार भारत का ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (जीसीसी) इकोसिस्टम लगातार तेजी से बढ़ रहा है। वित्त वर्ष 2026 में 100 से ज्यादा नए जीसीसी जुड़े और इस तरह देश में कुल कुल जीसीसी की संख्या बढक़र 2,117 हो गई। इन केंद्रों में 23 लाख से अधिक प्रोफेशनल काम कर रहे हैं और इनसे होने वाला कुल रेवेन्यू लगभग 100 बिलियन डॉलर तक पहुंच गया है। भारत में जीसीसी की संख्या वित्त वर्ष 2021 के 1,600 केंद्रों से बढक़र वित्त वर्ष 2026 में अनुमानित 2,117 तक पहुंच गई, जो लगभग 32 परसेंट की ग्रोथ है।  इन्हीं पांच वर्ष में रेवेन्यू 61.4 बिलियन डॉलर से 60 परसेंट बढक़र 98.4 बिलियन डॉलर हो गया। इस दौरान जीसीसी में कर्मचारियों की संख्या 17 लाख के मुकाबले 35 परसेंट बढक़र 23 लाख हो गई। नैसकॉम की 2024 जीसीसी लैंडस्केप रिपोर्ट में वित्त वर्ष 2024 के लिए 1,700 से अधिक जीसीसी का अनुमान लगाया गया था, लेकिन इतने ज्यादा जीसीसी भारत में खुल रहे हैं कि नैस्कॉम को अपना फिगर सुधारकर 1,855 करना पड़ गया। भारत अब एआई के क्षेत्र में भी एक बड़ी ताकत बनकर उभर रहा है। देश में 2.5 लाख से अधिक एआई प्रोफेशनल्स और 1,200 से ज्यादा सेंटर ऑफ एक्सीलेंस मौजूद हैं, जिससे एंटरप्राइज एआई में भारत की नेतृत्व क्षमता मजबूत हो रही है। नैसकॉम के उपाध्यक्ष और सार्वजनिक नीति प्रमुख आशीष अग्रवाल के अनुसार भारत जीसीसी कैपिटल ऑफ द वल्र्ड है।  साथ ही, भारत का जीसीसी इकोसिस्टम अब वैल्यू चेन में ऊपर की ओर बढ़ रहा है। लगभग 46 परसेंट जीसीसी अब पोर्टफोलियो या ट्रांसफॉर्मेशन हब के रूप में काम कर रहे हैं, जबकि वित्त वर्ष 2021 में यह आंकड़ा 42' था। खास बात यह है कि नए जीसीसी में से 27 परसेंट केवल पांच वर्ष के भीतर इस स्तर तक पहुंच जाते हैं, जबकि पहले इसमें लगभग एक दशक लग जाता था। लीडरशिप भूमिकाओं में भी बदलाव देखा जा रहा है। करीब 64 परसेंट साइट हेड्स अब ड्यूल मैंडेट के साथ काम कर रहे हैं, यानी वे एक तरफ ग्लोबल बिजनेस ऑपरेशन्स संभाल रहे हैं और दूसरी तरफ स्थानीय केंद्रों का नेतृत्व भी कर रहे हैं। रिपोर्ट के अनुसार वित्त वर्ष 2030 तक लगभग 75 परसेंट जीसीसी पोर्टफोलियो या ट्रांसफॉर्मेशन हब में बदल सकते हैं। इससे संकेत मिलता है कि यह सेक्टर एंड-टू-एंड ओनरशिप, इंटेलेक्चुुअल प्रॉपर्टी डवलपमेंट और एआई-नेटिव ऑपरेशंस की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। भारत के केंद्रीय बजट 2026 ने आईटी और आईटीईएस क्षेत्र, विशेष रूप से जीसीसी के लिए एक मजबूत नीतिगत बढ़ावा दिया है। ट्रांसफर प्राइसिंग में सेफ हार्बर नियम में संशोधन किया गया है। अब 15.5 परसेंट प्रोफिट मार्जिन घोषित करने वाली कंपनियां ग्रीन चैनल मार्ग के लिए पात्र होंगी, जिससे कर जांच का जोखिम कम हो जाएगा। इस लाभ के लिए टर्नओवर सीमा को 300 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 2,000 करोड़ रुपये कर दिया गया है।

लाइफ साइंस का ग्लोबल हब : दुनिया की टॉप 50 लाइफ साइंस कंपनियों में से लगभग आधी ने अब अपने ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (जीसीसी) भारत में स्थापित किए हैं। अन्स्र्ट एंड यंग की लेटेस्ट रिपोर्ट के अनुसार, फिलहाल भारत में करीब 100 लाइफ साइंसेज जीसीसी चल रहे हैं और पांच वर्ष में यह संख्या बढक़र 160 तक पहुंच सकती है।भारत अब केवल कम लागत वाले सपोर्ट बेस तक सीमित नहीं रहा, बल्कि ग्लोबप फार्मा और हेल्थकेयर के लिए इनोवेशन सेंटर बन गया है। भारत में ये कंपनियां क्लिनिकल ट्रायल ऑपरेशंस, फार्माकोविजिलेंस, बायोस्टैटिस्टिक्स, डिजिटल थेरेप्यूटिक्स और रियल-वल्र्ड एविडेंस एनालिटिक्स जैसे ऑपरेशन्स चला रही हैं। भारत में हर साल 20 लाख स्टेम ग्रेजुएट और 1.10 लाख डॉक्टर तैयार होते हैं।


Label

PREMIUM

CONNECT WITH US

X
Login
X

Login

X

Click here to make payment and subscribe
X

Please subscribe to view this section.

X

Please become paid subscriber to read complete news