वल्र्ड बैंक के अनुसार दुनिया के 26 देशों का पर कैपिटा जीडीपी अमेरिका के मुकाबले आधा होने से पहले ही उनकी आबादी बूढ़ी होने लगी थी। लेकिन इसके बावजूद इनकी इकोनॉमी ग्रोथ बनी रही इसलिए घटती आबादी और एजिंग पॉपुलेशन के बावजूद चीन भी ऐसा कर सकता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार जब 7 परसेंट पॉपुलेशन 65 वर्ष से अधिक आयु की हो जाती है तो इकोनॉमी में एजिंग की शुरुआत होती है। चीन इस लेवल को 1998 में ही पार कर चुका है। 2023 में 65 वर्ष से अधिक आयु के चीनी लोगों की हिस्सेदारी बढक़र 15.4 परसेंट हो गई। ऐतिहासिक रूप से, किसी भी देश ने एजिंग पॉपुलेशन 15 परसेंट होने के बाद अगले 12 वर्ष में 4 परसेंट ग्रोथ हासिल नहीं की है। इस दौरान हाई इनकम देशों की ग्रोथ रेट केवल 1.8 परसेंट रही है। एजिंग पॉपुलेशन और घटती लेबर फोर्स के कारण स्पेन, ग्रीस और पुर्तगाल में प्रति व्यक्ति जीडीपी क्रमश: 2008 में अमेरिका के लेवल के 73 परसेंट, 66 परसेंट और 51 परसेंट से गिरकर 39 परसेंट, 27 परसेंट और 32 परसेंट रह गई। साउथ कोरिया और ताईवान के भी फिर से हाई इनकम से गिरकर मिडल इनकम कैटेगरी में आ जाने का रिस्क है। जापान और जर्मनी की पर कैपिटा जीडीपी वर्ष 1995 में अमेरिका के मुकाबले क्रमश: 154 और 110 परसेंट थी जो 2023 तक गिरकर क्रमश: अमेरिकी लेवल की 41 परसेंट और 64 परसेंट रह गई।