TOP

ई - पेपर Subscribe Now!

ePaper
Subscribe Now!

Download
Android Mobile App

Daily Business Newspaper | A Knowledge Powerhouse in Hindi

08-05-2026

शेयर बाजार में घट रहे ब्रोकर : क्या खत्म हो रहा है "पुराना दलाल स्ट्रीट मॉडल"?

  •  भारतीय शेयर बाजार तेजी से बदल रहा है। एक समय था जब लोग शेयर खरीदने या बेचने के लिए अपने लोकल ब्रोकर को फोन करते थे। निवेश से जुड़ी हर सलाह के लिए ब्रोकर पर भरोसा किया जाता था। लेकिन अब मोबाइल ऐप और ऑनलाइन ट्रेडिंग के दौर में यह तस्वीर पूरी तरह बदल चुकी है। यही वजह है कि देश में स्टॉक ब्रोकर्स की संख्या लगातार कम होती जा रही है।सेबी के आंकड़े बताते हैं कि यह गिरावट कितनी बड़ी है। कैश सेगमेंट में 2013-14 में 9,050 ब्रोकर थे, जो 2024-25 तक घटकर सिर्फ 2,746 रह गए। यानी करीब 70 प्रतिशत ब्रोकर बाजार से बाहर हो गए। इक्विटी डेरिवेटिव्स में भी संख्या 3,051 से घटकर 2,317 हो गई, जबकि करेंसी डेरिवेटिव्स में 2,395 से घटकर 1,744 ब्रोकर ही बचे हैं। इस बदलाव की सबसे बड़ी वजह टेक्नोलॉजी है। आज लोग मोबाइल ऐप के जरिए कुछ ही सेकंड में ट्रेडिंग कर लेते हैं। पहले जहां हर काम के लिए ब्रोकर की जरूरत पड़ती थी, अब निवेशक खुद ऑनलाइन शेयर खरीद और बेच सकते हैं। डिस्काउंट ब्रोकिंग प्लेटफॉर्म ने बहुत कम फीस पर ट्रेडिंग की सुविधा देकर बाजार को पूरी तरह बदल दिया है। दूसरी बड़ी वजह सेबी के सख्त नियम हैं। निवेशकों की सुरक्षा के लिए अब ब्रोकर्स को कई नियमों का पालन करना पड़ता है। साइबर सिक्योरिटी, डेटा सुरक्षा और तकनीकी सिस्टम पर काफी खर्च करना पड़ता है। छोटे ब्रोकर्स के लिए यह खर्च उठाना मुश्किल हो गया, इसलिए कई लोगों ने कारोबार बंद कर दिया।बड़े ब्रोकिंग प्लेटफॉर्म भी तेजी से बाजार पर कब्जा कर रहे हैं। उनके पास बेहतर टेक्नोलॉजी, मजबूत ऐप और कम कॉस्ट पर सेवाएं देने की क्षमता है। आज का युवा निवेशक तेज और आसान सुविधा चाहता है। वह ऑफिस जाकर फॉर्म भरने के बजाय मोबाइल पर ही निवेश करना पसंद करता है। हालांकि इस बदलाव का फायदा भी हुआ है। अब निवेश करना आसान और सस्ता हो गया है। छोटे शहरों के लोग भी आसानी से शेयर बाजार में पैसा लगा पा रहे हैं। लेकिन दूसरी तरफ पुराने समय जैसी व्यक्तिगत सलाह और भरोसेमंद लोकल ब्रोकर की भूमिका कम होती जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में ब्रोकिंग इंडस्ट्री और ज्यादा डिजिटल होगी। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और ऑटोमेटेड ट्रेडिंग का इस्तेमाल बढ़ेगा। ऐसे में वही ब्रोकर टिक पाएंगे जो सिर्फ ट्रेडिंग नहीं, बल्कि निवेशकों को सही सलाह और बेहतर सेवाएं देंगे।

Share
शेयर बाजार में घट रहे ब्रोकर : क्या खत्म हो रहा है "पुराना दलाल स्ट्रीट मॉडल"?

 भारतीय शेयर बाजार तेजी से बदल रहा है। एक समय था जब लोग शेयर खरीदने या बेचने के लिए अपने लोकल ब्रोकर को फोन करते थे। निवेश से जुड़ी हर सलाह के लिए ब्रोकर पर भरोसा किया जाता था। लेकिन अब मोबाइल ऐप और ऑनलाइन ट्रेडिंग के दौर में यह तस्वीर पूरी तरह बदल चुकी है। यही वजह है कि देश में स्टॉक ब्रोकर्स की संख्या लगातार कम होती जा रही है।सेबी के आंकड़े बताते हैं कि यह गिरावट कितनी बड़ी है। कैश सेगमेंट में 2013-14 में 9,050 ब्रोकर थे, जो 2024-25 तक घटकर सिर्फ 2,746 रह गए। यानी करीब 70 प्रतिशत ब्रोकर बाजार से बाहर हो गए। इक्विटी डेरिवेटिव्स में भी संख्या 3,051 से घटकर 2,317 हो गई, जबकि करेंसी डेरिवेटिव्स में 2,395 से घटकर 1,744 ब्रोकर ही बचे हैं। इस बदलाव की सबसे बड़ी वजह टेक्नोलॉजी है। आज लोग मोबाइल ऐप के जरिए कुछ ही सेकंड में ट्रेडिंग कर लेते हैं। पहले जहां हर काम के लिए ब्रोकर की जरूरत पड़ती थी, अब निवेशक खुद ऑनलाइन शेयर खरीद और बेच सकते हैं। डिस्काउंट ब्रोकिंग प्लेटफॉर्म ने बहुत कम फीस पर ट्रेडिंग की सुविधा देकर बाजार को पूरी तरह बदल दिया है। दूसरी बड़ी वजह सेबी के सख्त नियम हैं। निवेशकों की सुरक्षा के लिए अब ब्रोकर्स को कई नियमों का पालन करना पड़ता है। साइबर सिक्योरिटी, डेटा सुरक्षा और तकनीकी सिस्टम पर काफी खर्च करना पड़ता है। छोटे ब्रोकर्स के लिए यह खर्च उठाना मुश्किल हो गया, इसलिए कई लोगों ने कारोबार बंद कर दिया।बड़े ब्रोकिंग प्लेटफॉर्म भी तेजी से बाजार पर कब्जा कर रहे हैं। उनके पास बेहतर टेक्नोलॉजी, मजबूत ऐप और कम कॉस्ट पर सेवाएं देने की क्षमता है। आज का युवा निवेशक तेज और आसान सुविधा चाहता है। वह ऑफिस जाकर फॉर्म भरने के बजाय मोबाइल पर ही निवेश करना पसंद करता है। हालांकि इस बदलाव का फायदा भी हुआ है। अब निवेश करना आसान और सस्ता हो गया है। छोटे शहरों के लोग भी आसानी से शेयर बाजार में पैसा लगा पा रहे हैं। लेकिन दूसरी तरफ पुराने समय जैसी व्यक्तिगत सलाह और भरोसेमंद लोकल ब्रोकर की भूमिका कम होती जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में ब्रोकिंग इंडस्ट्री और ज्यादा डिजिटल होगी। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और ऑटोमेटेड ट्रेडिंग का इस्तेमाल बढ़ेगा। ऐसे में वही ब्रोकर टिक पाएंगे जो सिर्फ ट्रेडिंग नहीं, बल्कि निवेशकों को सही सलाह और बेहतर सेवाएं देंगे।


Label

PREMIUM

CONNECT WITH US

X
Login
X

Login

X

Click here to make payment and subscribe
X

Please subscribe to view this section.

X

Please become paid subscriber to read complete news