महाराष्ट्र सरकार ने सरकारी जमीन पर 1 जनवरी 2011 या उससे पहले से मौजूद आवासीय अतिक्रमणों को नियमित करने को मंजूरी दे दी है। इस योजना के तहत 500 वर्गफुट तक के अतिक्रमण को बिना किसी शुल्क के नियमित किया जाएगा। इस स्कीम के जरिए सरकार कम आय वाले लाखों परिवारों को घर की सुरक्षा देना चाहती है। हालांकि यह योजना मुंबई और मुंबई उपनगर जिलों पर लागू नहीं होगी। राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने कहा, सरकार का यह स्पष्ट रुख है कि राज्य में कोई भी जरूरतमंद परिवार बिना छत के न रहे। सरकारी प्रस्ताव के अनुसार, 500 वर्गफुट से अधिक के अतिक्रमण पर प्रचलित बाजार मूल्य का 10 परसेंट ऑक्यूपेंसी शुल्क लिया जाएगा हालांकि इस स्कीम के तहत ज्यादा से ज्यादा 1,500 वर्गफुट तक के घरों को फायदा मिलेगा। 1500 वर्गफुट से अधिक के निर्माण को हटाना होगा। साथ ही घर के किसी हिस्से का इस्तेमाल व्यावसायिक रूप से किया जा रहा है, तो उसे बाजार मूल्य का 25 परसेंट चार्ज देकर नियमित किया जा सकेगा। इस स्कीम के तहत जमीन पति और पत्नी के संयुक्त नाम पर ऑक्यूपेंसी क्लास-2 कैटेगरी में रजिस्टर की जाएगी। 1,000 वर्गफुट तक के प्लॉट के लिए 1,000 रुपये का पंजीकरण शुल्क तय किया गया है। वन क्षेत्र, नदी तट, चरागाह, सार्वजनिक स्थान, सडक़ें, श्मशान, खेल के मैदान और स्कूल व अस्पतालों के लिए आरक्षित जमीन जैसे संवेदनशील क्षेत्रों पर बने अतिक्रमण नियमित नहीं किए जाएंगे। ऐसे स्थानों पर रहने वाले पात्र परिवारों को प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत वैकल्पिक आवास दिया जाएगा। पात्रता के लिए आवेदकों को 1 जनवरी 2011 से पहले निवास का प्रमाण देना होगा। इसके लिए मतदाता सूची, बिजली बिल या संपत्ति कर रसीद, साथ ही पिछले एक वर्ष के निरंतर निवास का प्रमाण भी देना होगा।