इन दिनों रूस भर में बड़े-बड़े होर्डिंग लगे हैं। 8700 डॉलर यानी करीब 80 लाख रुपये सैलरी के साथ ही दूसरे अन्य फायदे। इन जॉब्स में कम से कम एक साल की सेवा के लिए कॉलेज-यूनिवर्सिटी क्लास से छूट, वापसी पर फीस में छूट, फ्री आवास और अन्य ग्रांट शामिल हैं। इसके अलावा, पहले साल में लगभग 55 लाख रूबल (करीब 68,000 डॉलर) की सैलरी, ट्रेनिंग के बाद 25 लाख (करीब 30 लाख रुपये) का एकमुश्त पेमेंट, हर महीने 2.4 लाख रूबल भत्ता और यूनिवर्सिटी की ओर से 2 लाख रूबल मिलेगा अलग से। एक रूसी रूबल 1.16 भारतीय रुपये के बराबर होता है। रूस की कई बड़ी यूनिवर्सिटी स्टूडेंट्स को ड्रोन ऑपरेटर, इंजीनियर और तकनीकी विशेषज्ञ बनने के लिए प्रोत्साहित कर रही हैं। रूस-यूक्रेन वॉर के पांचवें साल में पहुंचने के बीच प्रेसिडेंट व्लादिमिर पुतिन सेना को नए सिरे से तैयार करने के लिए नए तरीकों पर काम कर रहे है। इसी के तहत स्टूडेंट्स को बड़े पैकेज का लालच देकर ड्रोन यूनिट्स में भर्ती होने के लिए आकर्षित कर रहा है। ये छात्र ड्रोन ऑपरेटर और इंजीनियर के रूप में काम करेंगे, जो आधुनिक युद्ध में बेहद अहम भूमिका निभा रहे हैं। इसके साथ ही, मध्य रूस के रायजान में कंपनियों को भी कर्मचारियों में से सेना में भर्ती के लिए कोटा पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं। रूस सरकार ने साफ किया है कि फिलहाल बड़ी भर्ती का कोई प्लान नहीं है। वॉलंटरी भर्ती प्रणाली अभी भी चालू है जिसके तहत पिछले साल 4 लाख से अधिक लोग सेना में शामिल हुए थे और इस साल अब तक 80 हजार से ज्यादा लोग भर्ती हो चुके हैं। छात्रों को आकर्षित करने का यह कदम इस बात का संकेत है कि रूस अपनी ड्रोन क्षमताओं को और मजबूत करना चाहता है। आज के युद्ध में ड्रोन ऑपरेटर फ्रंटलाइन से कुछ दूरी पर काम करते हैं। रूस के शहरों में जो होर्डिंग लगे हैं उनमें हाई-टेक चश्मा पहने एक युवा ड्रोन ऑपरेटर को नए युग के अपरिहार्य (the new indispensables) के रूप में दिखाया गया है। 300 कर्मचारियों वाली प्राइवेट और सरकारी कंपनियों को 2, 500 कर्मचारियों वाली कंपनी को 3 और 500 से अधिक कर्मचारीं वाली कंपनी को को कम से कम 5 लोगों को सेना में भेजना होगा। यह अभियान अप्रैल से सितंबर तक चलेगा और इसकी निगरानी स्वयं गवर्नर करेंगे।