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Daily Business Newspaper | A Knowledge Powerhouse in Hindi

03-04-2026

गैस पैडल पुश करने से बनेगी बात...

  •  कुकिंग और इंडस्ट्रियल गैस की शॉर्टसप्लाई को पूरा करने के लिए सरकार को दुनियाभर में घोड़े दौड़ाने पड़ रहे हैं। हालांकि एलपीजी की सप्लाई नॉर्मल होने में समय लगेगा लेकिन सरकार घरेलू पीएनजी (पाइप्ड नेचरल गैस) कनेक्शन की रफ्तार बढ़ाने के लिए गैस पैडल दबा (एक्सीलरेट) रही है। पीएनजी कनेक्शन के लिए देशभर में जून तक अभियान चलाया जा रहा है। सरकार का प्लान 60 लाख कंज्यूमर को पीएनजी में शिफ्ट करने का है। जनवरी 2026 तक, भारत में लगभग 1.75 करोड़ पीएनजी कनेक्शन हैं यानी पीएनजी अभी तक केवल 5 परसेंट भारतीय घरों में ही पीएनजी कनेक्शन हैं।  वर्ष 2034 तक 12.63 करोड़ पीएनजी कनेक्शन का टार्गेट है यानी अभी तक केवल 13 परसेंट टार्गेट ही पूरा हो पाया है। हालांकि पिछले पांच वर्ष में लगभग 90 लाख पीएनजी कनेक्शन जोड़े गए हैं। जिस तरह से वेस्ट एशिया में वॉर भडक़ने से कुकिंग गैस सप्लाई की रिस्क बढ़ी है उसे कम करने के लिए भारत सरकार पीएनजी नेटवर्क को फास्ट्रेक करना चाहती है। साथ ही सब्सिडी की कॉस्ट को घटाने का भी टार्गेट है। एलपीजी से पीएनजी की ओर शिफ्टिंग को तेज करने के लिए सरकार ने पीएनजी कनेक्शन वाले कंज्यूमर को 3 महीने में एलपीजी सप्लाई बंद करने का नोटिस भी दे दिया है। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के सचिव नीरज मित्तल ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा मार्च में, भारत ने अपने पीएनजी नेटवर्क में 5.80 लाख नए घरों को जोड़ा, जबकि मार्च 25 में 3.42 लाख नए कनेक्शन दिए गए थे। भारत एलपीजी का दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा इंपोर्टर है, जो अपनी जरूरतों का लगभग 60% विदेशी खरीद से पूरा करता है। भारत ने 2025 में लगभग 22 मिलियन मीट्रिक टन एलपीजी खरीदी, ज्यादातर खाड़ी देशों सेे, जिस पर लगभग 12 बिलियन डॉलर खर्च किए। क्रेडिट रेटिंग एजेंसी इक्रा के प्रशांत वशिष्ठ के अनुसार पीएनजी  सहित अन्य उपायों के कारण 2030 तक भारत का एलपीजी इंपोर्ट लगभग 10 से 15% तक गिर सकता है। भारत सरकार घरेलू एलपीजी पर 56% सब्सिडी देती है जिस पर पिछले वर्ष 3.4 बिलियन डॉलर का खर्च आया था। भारत में 33.37 करोड़ एलपीजी कंज्यूमर हैं जिनमें 10.6 करोड़ कम आय वाले परिवार शामिल हैं।

    30 करोड़ पीएनजी कनेक्शन लायक पीएनजी का घरेलू उत्पादन : पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस नियामक बोर्ड (पीएनजीआरबी) के सचिव अंजन कुमार मिश्रा के अनुसार भारत में वर्तमान में लगभग 1.10-1.20 करोड़ चालू घरेलू पीएनजी कनेक्शन हैं। ये कनेक्शन प्रतिदिन 3 मिलियन मीट्रिक मानक घन मीटर (एमएमएससीएमडी) पीएनजी की खपत करते हैं। भारत में नेचरल गैस का वर्तमान उत्पादन लगभग 90 एमएमएससीएमडी था। इस लिहाज से भारत घरेलू नेचरल गैस उत्पादन से ही आराम से लगभग 30 करोड़ कनेक्शनों की जरूरत को पूरा कर सकता है। मिश्रा के अनुसार हर दिन 20 हजार नए कनेक्शन देने की कोशिश कर रहे हैं। अभी प्रति दिन 8,000-9,000 कनेक्शन दिए जा रहे हैं।

    तो चैलेंज क्या है : एनेलिस्ट्स कहते हैं सबसे बड़ा चैलेंज किराए के घर हैं। जिन्हें पीएनजी कनेक्शन लेने के लिए मकानमालिक से एनओसी लेनी होती है और घर शिफ्ट करने पर नए मकान में भी यही प्रोसेस होता है।

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गैस पैडल पुश करने से बनेगी बात...

 कुकिंग और इंडस्ट्रियल गैस की शॉर्टसप्लाई को पूरा करने के लिए सरकार को दुनियाभर में घोड़े दौड़ाने पड़ रहे हैं। हालांकि एलपीजी की सप्लाई नॉर्मल होने में समय लगेगा लेकिन सरकार घरेलू पीएनजी (पाइप्ड नेचरल गैस) कनेक्शन की रफ्तार बढ़ाने के लिए गैस पैडल दबा (एक्सीलरेट) रही है। पीएनजी कनेक्शन के लिए देशभर में जून तक अभियान चलाया जा रहा है। सरकार का प्लान 60 लाख कंज्यूमर को पीएनजी में शिफ्ट करने का है। जनवरी 2026 तक, भारत में लगभग 1.75 करोड़ पीएनजी कनेक्शन हैं यानी पीएनजी अभी तक केवल 5 परसेंट भारतीय घरों में ही पीएनजी कनेक्शन हैं।  वर्ष 2034 तक 12.63 करोड़ पीएनजी कनेक्शन का टार्गेट है यानी अभी तक केवल 13 परसेंट टार्गेट ही पूरा हो पाया है। हालांकि पिछले पांच वर्ष में लगभग 90 लाख पीएनजी कनेक्शन जोड़े गए हैं। जिस तरह से वेस्ट एशिया में वॉर भडक़ने से कुकिंग गैस सप्लाई की रिस्क बढ़ी है उसे कम करने के लिए भारत सरकार पीएनजी नेटवर्क को फास्ट्रेक करना चाहती है। साथ ही सब्सिडी की कॉस्ट को घटाने का भी टार्गेट है। एलपीजी से पीएनजी की ओर शिफ्टिंग को तेज करने के लिए सरकार ने पीएनजी कनेक्शन वाले कंज्यूमर को 3 महीने में एलपीजी सप्लाई बंद करने का नोटिस भी दे दिया है। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के सचिव नीरज मित्तल ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा मार्च में, भारत ने अपने पीएनजी नेटवर्क में 5.80 लाख नए घरों को जोड़ा, जबकि मार्च 25 में 3.42 लाख नए कनेक्शन दिए गए थे। भारत एलपीजी का दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा इंपोर्टर है, जो अपनी जरूरतों का लगभग 60% विदेशी खरीद से पूरा करता है। भारत ने 2025 में लगभग 22 मिलियन मीट्रिक टन एलपीजी खरीदी, ज्यादातर खाड़ी देशों सेे, जिस पर लगभग 12 बिलियन डॉलर खर्च किए। क्रेडिट रेटिंग एजेंसी इक्रा के प्रशांत वशिष्ठ के अनुसार पीएनजी  सहित अन्य उपायों के कारण 2030 तक भारत का एलपीजी इंपोर्ट लगभग 10 से 15% तक गिर सकता है। भारत सरकार घरेलू एलपीजी पर 56% सब्सिडी देती है जिस पर पिछले वर्ष 3.4 बिलियन डॉलर का खर्च आया था। भारत में 33.37 करोड़ एलपीजी कंज्यूमर हैं जिनमें 10.6 करोड़ कम आय वाले परिवार शामिल हैं।

30 करोड़ पीएनजी कनेक्शन लायक पीएनजी का घरेलू उत्पादन : पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस नियामक बोर्ड (पीएनजीआरबी) के सचिव अंजन कुमार मिश्रा के अनुसार भारत में वर्तमान में लगभग 1.10-1.20 करोड़ चालू घरेलू पीएनजी कनेक्शन हैं। ये कनेक्शन प्रतिदिन 3 मिलियन मीट्रिक मानक घन मीटर (एमएमएससीएमडी) पीएनजी की खपत करते हैं। भारत में नेचरल गैस का वर्तमान उत्पादन लगभग 90 एमएमएससीएमडी था। इस लिहाज से भारत घरेलू नेचरल गैस उत्पादन से ही आराम से लगभग 30 करोड़ कनेक्शनों की जरूरत को पूरा कर सकता है। मिश्रा के अनुसार हर दिन 20 हजार नए कनेक्शन देने की कोशिश कर रहे हैं। अभी प्रति दिन 8,000-9,000 कनेक्शन दिए जा रहे हैं।

तो चैलेंज क्या है : एनेलिस्ट्स कहते हैं सबसे बड़ा चैलेंज किराए के घर हैं। जिन्हें पीएनजी कनेक्शन लेने के लिए मकानमालिक से एनओसी लेनी होती है और घर शिफ्ट करने पर नए मकान में भी यही प्रोसेस होता है।


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