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Daily Business Newspaper | A Knowledge Powerhouse in Hindi

01-04-2026

दुनिया खरीद रही तो...तुर्किए क्योंं बेच रहा गोल्ड!

  •  कोविड के बाद से दुनियाभर के देशों के सेंट्रल बैंक सोवरीन रिजर्व बढ़ाने के लिए नया गोल्ड खरीद रहे हैं और विदेशी तिजोरियों में बंद अपने गोल्ड को देश ला रहे हैं। लेकिन तुर्किए ने इस ट्रेंड के उलट पिछले सप्ताहों बड़े पैमाने पर गोल्ड बेचा है। रिपोर्ट्स के अनुसार, तुर्किये के सेंट्रल बैंक ने केवल दो सप्ताह में करीब 58 टन सोना बेच दिया, जिसकी कीमत 8 बिलियन (लगभग 75 हजार करोड़ रुपये) से अधिक है। फाइनेंस डेटा एनालिटिक्स फर्म द कोबिसी लेटर के अनुसार 13 मार्च को समाप्त सप्ताह में 6 टन और 20 मार्च को समाप्त सप्ताह में 52 टन सोना बेचा गया। इस बिक्री के बाद देश का कुल गोल्ड रिजर्व घटकर करीब 513 टन रह गए, जो सात साल का सबसे निचला स्तर है।  इस सेल्स का बड़ा हिस्सा स्वैप डील्स के जरिए इस्तेमाल किया गया, जहां गोल्ड के बदले डॉलर उधार लिए गए, जबकि बाकी गोल्ड खुले बाजार में बेचा गया। इसी अवधि में ग्लोबल ईटीएफ से 43 टन सोने के बराबर होल्डिंग घटी थीं। यानी तुर्किए ने ग्लोबल गोल्ड ईटीएफ में आई कमी से भी ज्यादा गोल्ड बेचा। और इस तरह तुर्किये इन दो सप्ताह में दुनिया का सबसे बड़ा गोल्ड बेचने वाला बन गया। इस बड़े कदम के पीछे मुख्य वजह देश की करेंसी लीरा पर बढ़ता दबाव है। पश्चिम एशिया में वॉर के बाद ऑइल और गैस इंपोर्ट महंगा हो गया, जिससे डॉलर की मांग तेजी से बढ़ी और लीरा कमजोर होने लगी। गिरते लीरा को संभालने के लिए सेंट्रल बैंक ने फोरेंसी एक्सचेंज रिजर्व का उपयोग किया, जिससे कुल फोरेन एक्सचेंज रिजर्व करीब 40 बिलियन घटकर 175 बिलियन रह गया। ऐसी स्थिति में गोल्ड बेचकर डॉलर जुटाना और मार्केट में लिक्विडिटी बनाए रखना जरूरी हो गया। रिपोर्ट के अनुसार, सेंट्रल बैंक ने गोल्ड का उपयोग स्वैप डील्स के जरिए विदेशी मुद्रा हासिल करने के लिए किया, ताकि लीरा को स्थिर रखा जा सके और महंगाई पर नियंत्रण पाया जा सके। इतनी बड़ा मात्रा में गोल्ड इंटरनेशनल मार्केट में आ जाने से गोल्ड प्राइस पर प्रेशर पड़ रहा है। एनेलिस्ट्स का कहना है कि इस कदम से शॉर्ट टर्म में लीरा को सपोर्ट मिल सकता है लेकिन लॉन्ग टर्म में इससे रिस्क बहुत ज्यादा बढ़ सकता है। आपको जानकर शायद आश्चर्य हो लेकिन मिडल इनकम कंट्री (15-16 हजार डॉलर) तुर्किए की इंफ्लेशन वर्ष 2022 में 73% तक पहुंच गई थी जो अब 35% के करीब है। साथ में लगे ग्राफिक्स के अनुसार 2015 में एक अमेरिका डॉलर 2.7 तुर्की लीरा का था जो लेटेस्ट डेटा के अनुसार 40 तुर्की लीरा के बराबर हो गया है।

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दुनिया खरीद रही तो...तुर्किए क्योंं बेच रहा गोल्ड!

 कोविड के बाद से दुनियाभर के देशों के सेंट्रल बैंक सोवरीन रिजर्व बढ़ाने के लिए नया गोल्ड खरीद रहे हैं और विदेशी तिजोरियों में बंद अपने गोल्ड को देश ला रहे हैं। लेकिन तुर्किए ने इस ट्रेंड के उलट पिछले सप्ताहों बड़े पैमाने पर गोल्ड बेचा है। रिपोर्ट्स के अनुसार, तुर्किये के सेंट्रल बैंक ने केवल दो सप्ताह में करीब 58 टन सोना बेच दिया, जिसकी कीमत 8 बिलियन (लगभग 75 हजार करोड़ रुपये) से अधिक है। फाइनेंस डेटा एनालिटिक्स फर्म द कोबिसी लेटर के अनुसार 13 मार्च को समाप्त सप्ताह में 6 टन और 20 मार्च को समाप्त सप्ताह में 52 टन सोना बेचा गया। इस बिक्री के बाद देश का कुल गोल्ड रिजर्व घटकर करीब 513 टन रह गए, जो सात साल का सबसे निचला स्तर है।  इस सेल्स का बड़ा हिस्सा स्वैप डील्स के जरिए इस्तेमाल किया गया, जहां गोल्ड के बदले डॉलर उधार लिए गए, जबकि बाकी गोल्ड खुले बाजार में बेचा गया। इसी अवधि में ग्लोबल ईटीएफ से 43 टन सोने के बराबर होल्डिंग घटी थीं। यानी तुर्किए ने ग्लोबल गोल्ड ईटीएफ में आई कमी से भी ज्यादा गोल्ड बेचा। और इस तरह तुर्किये इन दो सप्ताह में दुनिया का सबसे बड़ा गोल्ड बेचने वाला बन गया। इस बड़े कदम के पीछे मुख्य वजह देश की करेंसी लीरा पर बढ़ता दबाव है। पश्चिम एशिया में वॉर के बाद ऑइल और गैस इंपोर्ट महंगा हो गया, जिससे डॉलर की मांग तेजी से बढ़ी और लीरा कमजोर होने लगी। गिरते लीरा को संभालने के लिए सेंट्रल बैंक ने फोरेंसी एक्सचेंज रिजर्व का उपयोग किया, जिससे कुल फोरेन एक्सचेंज रिजर्व करीब 40 बिलियन घटकर 175 बिलियन रह गया। ऐसी स्थिति में गोल्ड बेचकर डॉलर जुटाना और मार्केट में लिक्विडिटी बनाए रखना जरूरी हो गया। रिपोर्ट के अनुसार, सेंट्रल बैंक ने गोल्ड का उपयोग स्वैप डील्स के जरिए विदेशी मुद्रा हासिल करने के लिए किया, ताकि लीरा को स्थिर रखा जा सके और महंगाई पर नियंत्रण पाया जा सके। इतनी बड़ा मात्रा में गोल्ड इंटरनेशनल मार्केट में आ जाने से गोल्ड प्राइस पर प्रेशर पड़ रहा है। एनेलिस्ट्स का कहना है कि इस कदम से शॉर्ट टर्म में लीरा को सपोर्ट मिल सकता है लेकिन लॉन्ग टर्म में इससे रिस्क बहुत ज्यादा बढ़ सकता है। आपको जानकर शायद आश्चर्य हो लेकिन मिडल इनकम कंट्री (15-16 हजार डॉलर) तुर्किए की इंफ्लेशन वर्ष 2022 में 73% तक पहुंच गई थी जो अब 35% के करीब है। साथ में लगे ग्राफिक्स के अनुसार 2015 में एक अमेरिका डॉलर 2.7 तुर्की लीरा का था जो लेटेस्ट डेटा के अनुसार 40 तुर्की लीरा के बराबर हो गया है।


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