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21-05-2026

आईबीसी के तहत दिसंबर तक 8,800 से अधिक मामले स्वीकृत, 4.11 लाख करोड़ की वसूली : नागराजू

  •  वित्तीय सेवा सचिव एम. नागराजू ने कहा कि दिवाला एवं ऋणशोधन अक्षमता संहिता (आईबीसी) के तहत दिसंबर, 2025 तक कर्ज समाधान प्रक्रिया के 8,800 से अधिक मामले स्वीकार किए गए और उनके जरिये ऋणदाताओं को 4.11 लाख करोड़ रुपये से अधिक राशि प्राप्त हुई। नागराजू ने आईबीसी संशोधन अधिनियम, 2026 पर आयोजित एक कार्यशाला में कहा कि इस कानून के तहत 4,000 से अधिक कॉरपोरेट देनदारों का समाधान, समझौते, वापसी या अपील से जुड़े मामलों के जरिये पुनरुद्धार किया जा चुका है। वित्त मंत्रालय के बयान के मुताबिक, नागराजू ने कहा कि आईबीसी ने देश में समयबद्ध और लेनदार-केंद्रित दिवाला समाधान ढांचा स्थापित किया है, जिससे ऋण अनुशासन मजबूत हुआ है और तनावग्रस्त कंपनियों के परिसमापन की बजाय उनके पुनरुद्धार और परिसंपत्ति मूल्य अधिकतम करने पर ध्यान केंद्रित हुआ है। उन्होंने कहा कि आईबीसी कानून में हाल के सुधारों से समाधान प्रक्रिया अधिक प्रभावी और तेज होगी। कर्यशाला में इस कानून में हुए हाल के संशोधनों जैसे समूह दिवाला, सीमा-पार दिवाला और ऋणदाता-प्रेरित समाधान प्रक्रिया पर चर्चा की गई। भारतीय दिवाला एवं ऋणशोधन अक्षमता बोर्ड (आईबीबीआई) के चेयरपर्सन रवि मित्तल ने कहा कि आईबीसी ने संस्थागत क्षमता बढ़ाने, कर्जदाताओं का विश्वास मजबूत करने और पारदर्शिता बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई है। कार्यशाला में कॉरपोरेट मामलों के मंत्रालय, सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों और वित्तीय संस्थानों के वरिष्ठ अधिकारी एवं कानूनी विशेषज्ञ भी शामिल हुए। चर्चा का उद्देश्य संशोधित प्रावधानों के क्रियान्वयन और उनके प्रभाव को स्पष्ट करना था।

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आईबीसी के तहत दिसंबर तक 8,800 से अधिक मामले स्वीकृत, 4.11 लाख करोड़ की वसूली : नागराजू

 वित्तीय सेवा सचिव एम. नागराजू ने कहा कि दिवाला एवं ऋणशोधन अक्षमता संहिता (आईबीसी) के तहत दिसंबर, 2025 तक कर्ज समाधान प्रक्रिया के 8,800 से अधिक मामले स्वीकार किए गए और उनके जरिये ऋणदाताओं को 4.11 लाख करोड़ रुपये से अधिक राशि प्राप्त हुई। नागराजू ने आईबीसी संशोधन अधिनियम, 2026 पर आयोजित एक कार्यशाला में कहा कि इस कानून के तहत 4,000 से अधिक कॉरपोरेट देनदारों का समाधान, समझौते, वापसी या अपील से जुड़े मामलों के जरिये पुनरुद्धार किया जा चुका है। वित्त मंत्रालय के बयान के मुताबिक, नागराजू ने कहा कि आईबीसी ने देश में समयबद्ध और लेनदार-केंद्रित दिवाला समाधान ढांचा स्थापित किया है, जिससे ऋण अनुशासन मजबूत हुआ है और तनावग्रस्त कंपनियों के परिसमापन की बजाय उनके पुनरुद्धार और परिसंपत्ति मूल्य अधिकतम करने पर ध्यान केंद्रित हुआ है। उन्होंने कहा कि आईबीसी कानून में हाल के सुधारों से समाधान प्रक्रिया अधिक प्रभावी और तेज होगी। कर्यशाला में इस कानून में हुए हाल के संशोधनों जैसे समूह दिवाला, सीमा-पार दिवाला और ऋणदाता-प्रेरित समाधान प्रक्रिया पर चर्चा की गई। भारतीय दिवाला एवं ऋणशोधन अक्षमता बोर्ड (आईबीबीआई) के चेयरपर्सन रवि मित्तल ने कहा कि आईबीसी ने संस्थागत क्षमता बढ़ाने, कर्जदाताओं का विश्वास मजबूत करने और पारदर्शिता बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई है। कार्यशाला में कॉरपोरेट मामलों के मंत्रालय, सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों और वित्तीय संस्थानों के वरिष्ठ अधिकारी एवं कानूनी विशेषज्ञ भी शामिल हुए। चर्चा का उद्देश्य संशोधित प्रावधानों के क्रियान्वयन और उनके प्रभाव को स्पष्ट करना था।


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