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07-05-2026

सरकार ने एमएसएमई, विमानन कंपनियों के लिए आपातकालीन ऋण गारंटी योजना की घोषणा की

  • सरकार ने एमएसएमई, एयरलाइन और अन्य कंपनियों की कार्यशील पूंजी जरूरतें पूरा करने में मदद के लिए 18,100 करोड़ रुपये के व्यय वाली आपातकालीन ऋण गारंटी योजना (ईसीएलजीएस) की घोषणा की। पश्चिम एशिया संघर्ष से उत्पन्न चुनौतियों के बीच यह कदम उठाया गया है। केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में स्वीकृत इस योजना से 2.55 लाख करोड़ रुपये का अतिरिक्त ऋण प्रवाह उपलब्ध होने की उम्मीद है। इसमें एयरलाइंस के लिए 5,000 करोड़ रुपये शामिल हैं। सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने मंत्रिमंडल के इस निर्णय के बारे में संवाददाताओं से कहा कि 18,100 करोड़ रुपये के व्यय वाली यह योजना पश्चिम एशिया संकट से प्रभावित विमानन क्षेत्र, सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्यम (एमएसएमई) दोनों की मदद करेगी। उन्होंने कहा कि यह योजना इन क्षेत्रों को बैंक और वित्तीय संस्थानों से अतिरिक्त कार्यशील पूंजी उपलब्ध कराने में मदद करेगी। वैष्णव ने कहा कि यात्री विमानन कंपनियों को 1,500 करोड़ रुपये तक की अधिकतम ऋण सीमा का 100 प्रतिशत तक लाभ मिल सकेगा जबकि संस्थानों को 100 करोड़ रुपये तक की फंड-आधारित कार्यशील पूंजी का 20 प्रतिशत तक प्राप्त करने की अनुमति होगी। आधिकारिक बयान के अनुसार, इस योजना से संबंधित कंपनियों को अपनी गतिविधियां जारी रखने, रोजगार सुरक्षित रखने और आपूर्ति शृंखला को सुचारू बनाए रखने में मदद मिलेगी। उल्लेखनीय है कि फरवरी से शुरू हुए पश्चिम एशिया संघर्ष के कारण एमएसएमई और विमानन क्षेत्र पर वित्तीय दबाव काफी बढ़ गया है। बयान के मुताबिक, इस योजना का उद्देश्य एमएसएमई उद्यमों को 100 प्रतिशत और गैर-एमएसएमई एवं विमानन क्षेत्र को 90 प्रतिशत तक ऋण गारंटी कवरेज प्रदान करना है। यह कवरेज राष्ट्रीय ऋण गारंटी ट्रस्टी कंपनी लिमिटेड (एनसीजीटीसी) द्वारा सदस्य ऋण संस्थानों को दिया जाएगा। यह गारंटी उन राशि पर लागू होगी जो अतिरिक्त ऋण सुविधा के तहत पात्र उधारकर्ताओं को दी गई है और जिनमें भुगतान में चूक की स्थिति उत्पन्न होती है, ताकि पश्चिम एशिया संकट के कारण उत्पन्न अल्पकालिक नकदी असंतुलन को दूर किया जा सके। बयान के अनुसार, ऋण की अवधि विमानन क्षेत्र के लिए वितरण तिथि से सात वर्ष होगी, जिसमें दो वर्ष की स्थगन अवधि शामिल होगी। वहीं एमएसएमई और गैर-एमएसएमई के लिए यह अवधि पांच वर्ष होगी, जिसमें एक वर्ष की स्थगन अवधि शामिल होगी। यह योजना उन सभी ऋणों पर लागू होगी जो एनसीजीटीसी द्वारा दिशानिर्देश जारी होने की तिथि से लेकर 31 मार्च, 2027 तक स्वीकृत किए जाएंगे। नागर विमानन मंत्री के. राममोहन नायडू ने कहा कि ईसीएलजीएस विशेषकर विमानन क्षेत्र के लिए एक अत्यंत महत्वपूर्ण पहल है  जो विमानन कंपनियों को अल्पकालिक नकदी संकट से निपटने और वैश्विक व्यवधानों के बीच बिना रुकावट संचालन बनाए रखने में सक्षम बनाएगी। उन्होंने सोशल मीडिया मंच एक्स पर एक पोस्ट में कहा, यह योजना नौकरियों को सुरक्षित रखने, हवाई संपर्क बनाए रखने और विमानन क्षेत्र को मजबूती प्रदान करने के लिए ठोस वित्तीय सहायता सुनिश्चित करेगी। साथ ही, इससे एमएसएमई क्षेत्र को मजबूती मिलेगी। ईसीएलजीएस की शुरुआत पहली बार मई 2020 में कोविड-19 महामारी के दौरान उत्पन्न आर्थिक संकट को कम करने के लिए की गई थी।

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सरकार ने एमएसएमई, विमानन कंपनियों के लिए आपातकालीन ऋण गारंटी योजना की घोषणा की

सरकार ने एमएसएमई, एयरलाइन और अन्य कंपनियों की कार्यशील पूंजी जरूरतें पूरा करने में मदद के लिए 18,100 करोड़ रुपये के व्यय वाली आपातकालीन ऋण गारंटी योजना (ईसीएलजीएस) की घोषणा की। पश्चिम एशिया संघर्ष से उत्पन्न चुनौतियों के बीच यह कदम उठाया गया है। केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में स्वीकृत इस योजना से 2.55 लाख करोड़ रुपये का अतिरिक्त ऋण प्रवाह उपलब्ध होने की उम्मीद है। इसमें एयरलाइंस के लिए 5,000 करोड़ रुपये शामिल हैं। सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने मंत्रिमंडल के इस निर्णय के बारे में संवाददाताओं से कहा कि 18,100 करोड़ रुपये के व्यय वाली यह योजना पश्चिम एशिया संकट से प्रभावित विमानन क्षेत्र, सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्यम (एमएसएमई) दोनों की मदद करेगी। उन्होंने कहा कि यह योजना इन क्षेत्रों को बैंक और वित्तीय संस्थानों से अतिरिक्त कार्यशील पूंजी उपलब्ध कराने में मदद करेगी। वैष्णव ने कहा कि यात्री विमानन कंपनियों को 1,500 करोड़ रुपये तक की अधिकतम ऋण सीमा का 100 प्रतिशत तक लाभ मिल सकेगा जबकि संस्थानों को 100 करोड़ रुपये तक की फंड-आधारित कार्यशील पूंजी का 20 प्रतिशत तक प्राप्त करने की अनुमति होगी। आधिकारिक बयान के अनुसार, इस योजना से संबंधित कंपनियों को अपनी गतिविधियां जारी रखने, रोजगार सुरक्षित रखने और आपूर्ति शृंखला को सुचारू बनाए रखने में मदद मिलेगी। उल्लेखनीय है कि फरवरी से शुरू हुए पश्चिम एशिया संघर्ष के कारण एमएसएमई और विमानन क्षेत्र पर वित्तीय दबाव काफी बढ़ गया है। बयान के मुताबिक, इस योजना का उद्देश्य एमएसएमई उद्यमों को 100 प्रतिशत और गैर-एमएसएमई एवं विमानन क्षेत्र को 90 प्रतिशत तक ऋण गारंटी कवरेज प्रदान करना है। यह कवरेज राष्ट्रीय ऋण गारंटी ट्रस्टी कंपनी लिमिटेड (एनसीजीटीसी) द्वारा सदस्य ऋण संस्थानों को दिया जाएगा। यह गारंटी उन राशि पर लागू होगी जो अतिरिक्त ऋण सुविधा के तहत पात्र उधारकर्ताओं को दी गई है और जिनमें भुगतान में चूक की स्थिति उत्पन्न होती है, ताकि पश्चिम एशिया संकट के कारण उत्पन्न अल्पकालिक नकदी असंतुलन को दूर किया जा सके। बयान के अनुसार, ऋण की अवधि विमानन क्षेत्र के लिए वितरण तिथि से सात वर्ष होगी, जिसमें दो वर्ष की स्थगन अवधि शामिल होगी। वहीं एमएसएमई और गैर-एमएसएमई के लिए यह अवधि पांच वर्ष होगी, जिसमें एक वर्ष की स्थगन अवधि शामिल होगी। यह योजना उन सभी ऋणों पर लागू होगी जो एनसीजीटीसी द्वारा दिशानिर्देश जारी होने की तिथि से लेकर 31 मार्च, 2027 तक स्वीकृत किए जाएंगे। नागर विमानन मंत्री के. राममोहन नायडू ने कहा कि ईसीएलजीएस विशेषकर विमानन क्षेत्र के लिए एक अत्यंत महत्वपूर्ण पहल है  जो विमानन कंपनियों को अल्पकालिक नकदी संकट से निपटने और वैश्विक व्यवधानों के बीच बिना रुकावट संचालन बनाए रखने में सक्षम बनाएगी। उन्होंने सोशल मीडिया मंच एक्स पर एक पोस्ट में कहा, यह योजना नौकरियों को सुरक्षित रखने, हवाई संपर्क बनाए रखने और विमानन क्षेत्र को मजबूती प्रदान करने के लिए ठोस वित्तीय सहायता सुनिश्चित करेगी। साथ ही, इससे एमएसएमई क्षेत्र को मजबूती मिलेगी। ईसीएलजीएस की शुरुआत पहली बार मई 2020 में कोविड-19 महामारी के दौरान उत्पन्न आर्थिक संकट को कम करने के लिए की गई थी।


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