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11-05-2026

हत्या या मदद करने के आरोपी व्यक्ति को पीडि़त की संपत्ति विरासत में नहीं मिल सकती : कोर्ट

  •  सुप्रीम कोर्ट ने व्यवस्था दी है कि जो व्यक्ति किसी की हत्या करता है या हत्या में मदद करता है, तो उसे मृतक की संपत्ति पर अधिकार नहीं मिलेगा, क्योंकि कानून ऐसे व्यक्ति को विरासत पाने से रोकता है। न्यायमूर्ति जे बी पारदीवाला और न्यायमूर्ति आर महादेवन की पीठ ने साफ किया कि अगर किसी व्यक्ति पर हत्या करने या हत्या के लिए उकसाने का आरोप है, तो वह मृतक की संपत्ति नहीं पा सकता। यह नियम तब भी लागू होगा जब मृतक ने वसीयत नहीं छोड़ी हो और तब भी, जब वसीयत बनाई गई हो। अदालत ने कहा है कि मुकदमा जारी रहने पर भी यह रोक लागू रहेगी। बिना वसीयत के उत्तराधिकार व्यक्तिगत कानून के नियमों के अनुसार होता है, जबकि वसीयत के माध्यम से उत्तराधिकार तब लागू होता है, जब संपत्ति एक उत्तराधिकार के माध्यम से दिया जाता है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा, ‘‘यदि किसी व्यक्ति पर उस इंसान की हत्या का आरोप हो, जिसकी संपत्ति में वह हिस्सा मांग रहा है, तो उसे उस संपत्ति पर अधिकार जताने का हक नहीं मिलेगा। यह रोक केवल हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम की धारा 25 के कारण ही नहीं, बल्कि न्याय, निष्पक्षता और नैतिक समानता के सिद्धांतों के आधार पर भी लागू होती है।’’ हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम की धारा 25 का हवाला देते हुए, पीठ ने कहा कि यह प्रावधान हत्या करने वाले या हत्या में सहायता करने वाले व्यक्ति को मृतक की संपत्ति का उत्तराधिकारी बनने से रोकता है। यह फैसला कर्नाटक उच्च न्यायालय के उस आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर आया, जिसमें संपत्ति के उत्तराधिकार से संबंधित बेंगलुरु की एक सिविल अदालत के फैसले को रद्द कर दिया गया था।

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हत्या या मदद करने के आरोपी व्यक्ति को पीडि़त की संपत्ति विरासत में नहीं मिल सकती : कोर्ट

 सुप्रीम कोर्ट ने व्यवस्था दी है कि जो व्यक्ति किसी की हत्या करता है या हत्या में मदद करता है, तो उसे मृतक की संपत्ति पर अधिकार नहीं मिलेगा, क्योंकि कानून ऐसे व्यक्ति को विरासत पाने से रोकता है। न्यायमूर्ति जे बी पारदीवाला और न्यायमूर्ति आर महादेवन की पीठ ने साफ किया कि अगर किसी व्यक्ति पर हत्या करने या हत्या के लिए उकसाने का आरोप है, तो वह मृतक की संपत्ति नहीं पा सकता। यह नियम तब भी लागू होगा जब मृतक ने वसीयत नहीं छोड़ी हो और तब भी, जब वसीयत बनाई गई हो। अदालत ने कहा है कि मुकदमा जारी रहने पर भी यह रोक लागू रहेगी। बिना वसीयत के उत्तराधिकार व्यक्तिगत कानून के नियमों के अनुसार होता है, जबकि वसीयत के माध्यम से उत्तराधिकार तब लागू होता है, जब संपत्ति एक उत्तराधिकार के माध्यम से दिया जाता है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा, ‘‘यदि किसी व्यक्ति पर उस इंसान की हत्या का आरोप हो, जिसकी संपत्ति में वह हिस्सा मांग रहा है, तो उसे उस संपत्ति पर अधिकार जताने का हक नहीं मिलेगा। यह रोक केवल हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम की धारा 25 के कारण ही नहीं, बल्कि न्याय, निष्पक्षता और नैतिक समानता के सिद्धांतों के आधार पर भी लागू होती है।’’ हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम की धारा 25 का हवाला देते हुए, पीठ ने कहा कि यह प्रावधान हत्या करने वाले या हत्या में सहायता करने वाले व्यक्ति को मृतक की संपत्ति का उत्तराधिकारी बनने से रोकता है। यह फैसला कर्नाटक उच्च न्यायालय के उस आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर आया, जिसमें संपत्ति के उत्तराधिकार से संबंधित बेंगलुरु की एक सिविल अदालत के फैसले को रद्द कर दिया गया था।


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