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08-05-2026

गैर-पंजीकृत उद्यमों की संख्या 2025 में 8' बढक़र 7.92 करोड़ पर: सर्वेक्षण

  •   देश में अपंजीकृत या गैर-निगमित उद्यमों की संख्या वर्ष 2025 में करीब आठ प्रतिशत बढक़र 7.92 करोड़ हो गई और इस दौरान इस क्षेत्र में 74.52 लाख नए रोजगार सृजित हुए। अपंजीकृत या गैर-निगमित उद्यम ऐसे छोटे व्यवसाय होते हैं जो कंपनी के रूप में पंजीकृत नहीं होते और जिनका संचालन आमतौर पर व्यक्तिगत या पारिवारिक स्तर पर किया जाता है। सांख्यिकी एवं कार्यक्रम क्रियान्वयन मंत्रालय की तरफ से जारी वार्षिक गैर-निगमित क्षेत्र उद्यम सर्वेक्षण के मुताबिक, इन उद्यमों की संख्या अक्टूबर 2023-सितंबर 2024 के पिछले सर्वे के 7.34 करोड़ से बढक़र 2025 में 7.92 करोड़ हो गई, जो 7.97 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाती है। सर्वेक्षण में कहा गया है कि इन इकाइयों में रोजगार बढक़र 12.81 करोड़ हो गया, जो भारतीय अर्थव्यवस्था में इस क्षेत्र की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित करता है। गैर-कृषि गैर-निगमित क्षेत्र बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन, आजीविका समर्थन और सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में योगदान के लिहाज से अहम माना जाता है। क्षेत्रवार आंकड़ों के मुताबिक, ‘अन्य सेवाएं’ श्रेणी में सबसे अधिक 10.29 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई, जबकि विनिर्माण क्षेत्र में 6.48 प्रतिशत और व्यापार क्षेत्र में 6.18 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई। सर्वे के मुताबिक, वर्ष 2025 के दौरान दौरान सकल मूल्यवर्धन (जीवीए) में मौजूदा कीमतों पर 10.87 प्रतिशत की वृद्धि हुई जिसमें व्यापार क्षेत्र में 16.77 प्रतिशत, विनिर्माण में 8.52 प्रतिशत और अन्य सेवाओं में 7.36 प्रतिशत की वृद्धि प्रमुख रही। राज्यवार आंकड़ों में उत्तर प्रदेश में सबसे अधिक उद्यम दर्ज किए गए और उसके बाद पश्चिम बंगाल एवं महाराष्ट्र का स्थान रहा। इन तीनों राज्यों में कुल कार्यबल का एक-तिहाई से अधिक हिस्सा कार्यरत है। सर्वेक्षण में महिला भागीदारी में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। कुल कार्यबल में महिलाओं की हिस्सेदारी करीब 29 प्रतिशत रही, जिनमें से लगभग 22 प्रतिशत परिधान तैयार करने के क्षेत्र में कार्यरत हैं। इसके अलावा, विनिर्माण क्षेत्र में 60 प्रतिशत से अधिक इकाइयों का संचालन महिला उद्यमियों द्वारा किया जा रहा है। कुल मिलाकर महिला-प्रमुख उद्यमों का अनुपात 2023-24 के 26.17 प्रतिशत से बढक़र 2025 में 26.93 प्रतिशत हो गया। रिपोर्ट के मुताबिक, यह रुझान दर्शाता है कि इस क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी रोजगार और उद्यमिता दोनों स्तरों पर बढ़ रही है, जो महिला सशक्तीकरण के लिहाज से सकारात्मक संकेत है। सर्वे में यह भी पाया गया कि पंजीकृत उद्यमों का प्रतिशत मामूली रूप से बढक़र 37.20 प्रतिशत से 37.50 प्रतिशत हो गया, जो अर्थव्यवस्था को संगठित बनाने की धीमी लेकिन स्थिर प्रक्रिया को दर्शाता है। इस सर्वेक्षण के तहत कुल 6.70 लाख से अधिक उद्यमों से आंकड़े जुटाए गए, जिनमें लगभग 2.94 लाख इकाइयां ग्रामीण क्षेत्रों से थीं।

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गैर-पंजीकृत उद्यमों की संख्या 2025 में 8' बढक़र 7.92 करोड़ पर: सर्वेक्षण

  देश में अपंजीकृत या गैर-निगमित उद्यमों की संख्या वर्ष 2025 में करीब आठ प्रतिशत बढक़र 7.92 करोड़ हो गई और इस दौरान इस क्षेत्र में 74.52 लाख नए रोजगार सृजित हुए। अपंजीकृत या गैर-निगमित उद्यम ऐसे छोटे व्यवसाय होते हैं जो कंपनी के रूप में पंजीकृत नहीं होते और जिनका संचालन आमतौर पर व्यक्तिगत या पारिवारिक स्तर पर किया जाता है। सांख्यिकी एवं कार्यक्रम क्रियान्वयन मंत्रालय की तरफ से जारी वार्षिक गैर-निगमित क्षेत्र उद्यम सर्वेक्षण के मुताबिक, इन उद्यमों की संख्या अक्टूबर 2023-सितंबर 2024 के पिछले सर्वे के 7.34 करोड़ से बढक़र 2025 में 7.92 करोड़ हो गई, जो 7.97 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाती है। सर्वेक्षण में कहा गया है कि इन इकाइयों में रोजगार बढक़र 12.81 करोड़ हो गया, जो भारतीय अर्थव्यवस्था में इस क्षेत्र की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित करता है। गैर-कृषि गैर-निगमित क्षेत्र बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन, आजीविका समर्थन और सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में योगदान के लिहाज से अहम माना जाता है। क्षेत्रवार आंकड़ों के मुताबिक, ‘अन्य सेवाएं’ श्रेणी में सबसे अधिक 10.29 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई, जबकि विनिर्माण क्षेत्र में 6.48 प्रतिशत और व्यापार क्षेत्र में 6.18 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई। सर्वे के मुताबिक, वर्ष 2025 के दौरान दौरान सकल मूल्यवर्धन (जीवीए) में मौजूदा कीमतों पर 10.87 प्रतिशत की वृद्धि हुई जिसमें व्यापार क्षेत्र में 16.77 प्रतिशत, विनिर्माण में 8.52 प्रतिशत और अन्य सेवाओं में 7.36 प्रतिशत की वृद्धि प्रमुख रही। राज्यवार आंकड़ों में उत्तर प्रदेश में सबसे अधिक उद्यम दर्ज किए गए और उसके बाद पश्चिम बंगाल एवं महाराष्ट्र का स्थान रहा। इन तीनों राज्यों में कुल कार्यबल का एक-तिहाई से अधिक हिस्सा कार्यरत है। सर्वेक्षण में महिला भागीदारी में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। कुल कार्यबल में महिलाओं की हिस्सेदारी करीब 29 प्रतिशत रही, जिनमें से लगभग 22 प्रतिशत परिधान तैयार करने के क्षेत्र में कार्यरत हैं। इसके अलावा, विनिर्माण क्षेत्र में 60 प्रतिशत से अधिक इकाइयों का संचालन महिला उद्यमियों द्वारा किया जा रहा है। कुल मिलाकर महिला-प्रमुख उद्यमों का अनुपात 2023-24 के 26.17 प्रतिशत से बढक़र 2025 में 26.93 प्रतिशत हो गया। रिपोर्ट के मुताबिक, यह रुझान दर्शाता है कि इस क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी रोजगार और उद्यमिता दोनों स्तरों पर बढ़ रही है, जो महिला सशक्तीकरण के लिहाज से सकारात्मक संकेत है। सर्वे में यह भी पाया गया कि पंजीकृत उद्यमों का प्रतिशत मामूली रूप से बढक़र 37.20 प्रतिशत से 37.50 प्रतिशत हो गया, जो अर्थव्यवस्था को संगठित बनाने की धीमी लेकिन स्थिर प्रक्रिया को दर्शाता है। इस सर्वेक्षण के तहत कुल 6.70 लाख से अधिक उद्यमों से आंकड़े जुटाए गए, जिनमें लगभग 2.94 लाख इकाइयां ग्रामीण क्षेत्रों से थीं।


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