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19-05-2026

जियो-पॉलिटिकल चुनौतियों के बीच इंडिया में सीबीआरएन व साइबर खतरों का जोखिम बढ़ा : रिपोर्ट

  •  भारत की भू-राजनीतिक स्थितियां, तेजी से बढ़ता औद्योगिक विकास एवं शहरीकरण की रफ्तार देश को साइबर हमलों तथा रासायनिक, जैविक, रेडियोलॉजिकल और परमाणु (सीबीआरएन) खतरों के प्रति ज्यादा संवेदनशील बना रही हैं। सोमवार को जारी एक रिपोर्ट में यह बात कही गई। रिपोर्ट में सीबीआरएन सुरक्षा रणनीति को मजबूत करने की तत्काल आवश्यकता पर भी जोर दिया गया है। सीबीआरएन रक्षा एवं ऐसे खतरों से निपटने के उपायों पर यह रिपोर्ट यहां पीएचडी चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (पीएचडीसीसीआई) के एक सम्मेलन में जारी की गई। रिपोर्ट में कहा, ‘ सीबीआरएन सुरक्षा रणनीति को मजबूत करना अब और अधिक जरूरी हो गया है, खासकर तब जब क्षेत्रीय तनाव बढ़ रहे हैं।’’ इसमें कहा कि भारत के लिए इस चुनौती का सामना करने के लिए ऐसी तैयारी की जरूरत है जो बदलते खतरों की गति एवं जटिलता के अनुरूप हो। इसके लिए निवेश, समन्वय, नवाचार और सबसे बढक़र राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े सभी हितधारकों के बीच निरंतर सहयोग आवश्यक है। रिपोर्ट में कहा गया, ‘‘ यूक्रेन संघर्ष यह दर्शाता है कि रासायनिक एजेंट (जिनमें औद्योगिक रसायन भी शामिल हैं जिन्हें पारंपरिक रूप से ‘रासायनिक युद्ध एजेंट’ नहीं माना जाता) आधुनिक संघर्ष में तेजी से हथियार में बदले जा सकते हैं और बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किए जा सकते हैं। भारत की नीतियों, पहचान प्रणालियों व सुरक्षात्मक उपकरणों को इस विस्तारित खतरे के दायरे को ध्यान में रखना होगा जिसमें ड्रोन के जरिये बड़े क्षेत्रों में रसायनों का प्रसार भी शामिल है।’’

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जियो-पॉलिटिकल चुनौतियों के बीच इंडिया में सीबीआरएन व साइबर खतरों का जोखिम बढ़ा : रिपोर्ट

 भारत की भू-राजनीतिक स्थितियां, तेजी से बढ़ता औद्योगिक विकास एवं शहरीकरण की रफ्तार देश को साइबर हमलों तथा रासायनिक, जैविक, रेडियोलॉजिकल और परमाणु (सीबीआरएन) खतरों के प्रति ज्यादा संवेदनशील बना रही हैं। सोमवार को जारी एक रिपोर्ट में यह बात कही गई। रिपोर्ट में सीबीआरएन सुरक्षा रणनीति को मजबूत करने की तत्काल आवश्यकता पर भी जोर दिया गया है। सीबीआरएन रक्षा एवं ऐसे खतरों से निपटने के उपायों पर यह रिपोर्ट यहां पीएचडी चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (पीएचडीसीसीआई) के एक सम्मेलन में जारी की गई। रिपोर्ट में कहा, ‘ सीबीआरएन सुरक्षा रणनीति को मजबूत करना अब और अधिक जरूरी हो गया है, खासकर तब जब क्षेत्रीय तनाव बढ़ रहे हैं।’’ इसमें कहा कि भारत के लिए इस चुनौती का सामना करने के लिए ऐसी तैयारी की जरूरत है जो बदलते खतरों की गति एवं जटिलता के अनुरूप हो। इसके लिए निवेश, समन्वय, नवाचार और सबसे बढक़र राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े सभी हितधारकों के बीच निरंतर सहयोग आवश्यक है। रिपोर्ट में कहा गया, ‘‘ यूक्रेन संघर्ष यह दर्शाता है कि रासायनिक एजेंट (जिनमें औद्योगिक रसायन भी शामिल हैं जिन्हें पारंपरिक रूप से ‘रासायनिक युद्ध एजेंट’ नहीं माना जाता) आधुनिक संघर्ष में तेजी से हथियार में बदले जा सकते हैं और बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किए जा सकते हैं। भारत की नीतियों, पहचान प्रणालियों व सुरक्षात्मक उपकरणों को इस विस्तारित खतरे के दायरे को ध्यान में रखना होगा जिसमें ड्रोन के जरिये बड़े क्षेत्रों में रसायनों का प्रसार भी शामिल है।’’


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