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Daily Business Newspaper | A Knowledge Powerhouse in Hindi

11-05-2026

‘पिछले 10 वर्ष में 10 गुना से ज्यादा बढ़ा एसआईपी इंवेस्टमेंट’

  •  भारत में निवेश का तरीका और सोच दोनों तेजी से बदल रहे हैं। अब निवेश केवल बड़े शहरों या चुनिंदा लोगों तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि छोटे शहरों, युवाओं और महिलाओं की भागीदारी भी तेजी से बढ़ रही है। पिछले एक दशक में भारत के खुदरा निवेश पारिस्थितिकी तंत्र में बड़ा बदलाव आया है और म्यूचुअल फंड एसआईपी का दायरा 10 गुना से अधिक बढ़ गया है। ये बातें ग्रो के सीईओ और सह-संस्थापक ललित केशरे ने ग्रो इंडिया इन्वेस्टर फेस्टिवल 2026 के दौरान कहीं। ललित केशरे ने कहा, भारत में खुदरा निवेश का दायरा महानगरों से आगे बढक़र काफी व्यापक हो गया है, जिसमें युवा और महिला निवेशकों की भी अहम भागादारी रही है। ग्रो के सीईओ ने आगे कहा कि भारत के खुदरा निवेश पारिस्थितिकी तंत्र में पिछले दशक में व्यापक परिवर्तन आया है, जिसके चलते म्यूचुअल फंड के प्रबंधन के तहत परिसंपत्तियां (एयूएम) 2016 में करीब 12 लाख करोड़ रुपए से बढक़र वर्तमान में 80 लाख करोड़ रुपए से अधिक हो गई हैं। वहीं, मासिक एसआईपी निवेश भी एक दशक पहले के लगभग 3,000 करोड़ रुपए से बढक़र अब 10 गुना से अधिक हो गया है। उन्होंने कहा कि भारत में लोगों की सोच में बड़ा बदलाव आया है। अब लोग केवल कमाई तक सीमित नहीं हैं, बल्कि भविष्य के लिए संपत्ति और धन निर्माण पर ध्यान दे रहे हैं। उनके मुताबिक, निवेश अब आम भारतीय परिवारों की वित्तीय योजना का अहम हिस्सा बनता जा रहा है। केशरे ने कहा, पहले शेयर बाजार और म्यूचुअल फंड में निवेश मुख्य रूप से मुंबई, बेंगलुरु जैसे टियर-1 शहरों तक सीमित था। लेकिन अब उत्तर प्रदेश, बिहार, पूर्वोत्तर राज्यों और देश के अन्य छोटे शहरों से भी बड़ी संख्या में लोग निवेश कर रहे हैं। इससे यह साफ होता है कि वित्तीय जागरूकता तेजी से बढ़ रही है। उन्होंने बताया कि टियर-2 और टियर-3 शहरों में डिजिटल प्लेटफॉर्म्स और आसान निवेश विकल्पों के कारण निवेश का विस्तार हुआ है। इससे आम लोगों के लिए निवेश करना पहले के मुकाबले कहीं ज्यादा आसान हो गया है। केशरे ने यह भी बताया कि अब बाजार में आने वाले नए निवेशकों में लगभग एक चौथाई महिलाएं हैं। उन्होंने इसे भारतीय वित्तीय बाजारों की बढ़ती परिपक्वता का संकेत बताया। उनके अनुसार, महिलाओं की बढ़ती भागीदारी यह दिखाती है कि अब परिवारों में वित्तीय निर्णयों में महिलाओं की भूमिका भी मजबूत हो रही है। उन्होंने बताया कि भारत में भविष्य का सबसे बड़ा मूल्य निर्माण डीप-टेक सेक्टर से होगा। उनका कहना है कि टेक्नोलॉजी, रिसर्च और इनोवेशन आने वाले वर्षों में भारत की आर्थिक प्रगति को नई दिशा देंगे।

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‘पिछले 10 वर्ष में 10 गुना से ज्यादा बढ़ा एसआईपी इंवेस्टमेंट’

 भारत में निवेश का तरीका और सोच दोनों तेजी से बदल रहे हैं। अब निवेश केवल बड़े शहरों या चुनिंदा लोगों तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि छोटे शहरों, युवाओं और महिलाओं की भागीदारी भी तेजी से बढ़ रही है। पिछले एक दशक में भारत के खुदरा निवेश पारिस्थितिकी तंत्र में बड़ा बदलाव आया है और म्यूचुअल फंड एसआईपी का दायरा 10 गुना से अधिक बढ़ गया है। ये बातें ग्रो के सीईओ और सह-संस्थापक ललित केशरे ने ग्रो इंडिया इन्वेस्टर फेस्टिवल 2026 के दौरान कहीं। ललित केशरे ने कहा, भारत में खुदरा निवेश का दायरा महानगरों से आगे बढक़र काफी व्यापक हो गया है, जिसमें युवा और महिला निवेशकों की भी अहम भागादारी रही है। ग्रो के सीईओ ने आगे कहा कि भारत के खुदरा निवेश पारिस्थितिकी तंत्र में पिछले दशक में व्यापक परिवर्तन आया है, जिसके चलते म्यूचुअल फंड के प्रबंधन के तहत परिसंपत्तियां (एयूएम) 2016 में करीब 12 लाख करोड़ रुपए से बढक़र वर्तमान में 80 लाख करोड़ रुपए से अधिक हो गई हैं। वहीं, मासिक एसआईपी निवेश भी एक दशक पहले के लगभग 3,000 करोड़ रुपए से बढक़र अब 10 गुना से अधिक हो गया है। उन्होंने कहा कि भारत में लोगों की सोच में बड़ा बदलाव आया है। अब लोग केवल कमाई तक सीमित नहीं हैं, बल्कि भविष्य के लिए संपत्ति और धन निर्माण पर ध्यान दे रहे हैं। उनके मुताबिक, निवेश अब आम भारतीय परिवारों की वित्तीय योजना का अहम हिस्सा बनता जा रहा है। केशरे ने कहा, पहले शेयर बाजार और म्यूचुअल फंड में निवेश मुख्य रूप से मुंबई, बेंगलुरु जैसे टियर-1 शहरों तक सीमित था। लेकिन अब उत्तर प्रदेश, बिहार, पूर्वोत्तर राज्यों और देश के अन्य छोटे शहरों से भी बड़ी संख्या में लोग निवेश कर रहे हैं। इससे यह साफ होता है कि वित्तीय जागरूकता तेजी से बढ़ रही है। उन्होंने बताया कि टियर-2 और टियर-3 शहरों में डिजिटल प्लेटफॉर्म्स और आसान निवेश विकल्पों के कारण निवेश का विस्तार हुआ है। इससे आम लोगों के लिए निवेश करना पहले के मुकाबले कहीं ज्यादा आसान हो गया है। केशरे ने यह भी बताया कि अब बाजार में आने वाले नए निवेशकों में लगभग एक चौथाई महिलाएं हैं। उन्होंने इसे भारतीय वित्तीय बाजारों की बढ़ती परिपक्वता का संकेत बताया। उनके अनुसार, महिलाओं की बढ़ती भागीदारी यह दिखाती है कि अब परिवारों में वित्तीय निर्णयों में महिलाओं की भूमिका भी मजबूत हो रही है। उन्होंने बताया कि भारत में भविष्य का सबसे बड़ा मूल्य निर्माण डीप-टेक सेक्टर से होगा। उनका कहना है कि टेक्नोलॉजी, रिसर्च और इनोवेशन आने वाले वर्षों में भारत की आर्थिक प्रगति को नई दिशा देंगे।


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