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18-05-2026

गोल्ड का इंपोर्ट अप्रैल में 82 प्रतिशत बढ़ा, सिल्वर का इंपोर्ट 157 प्रतिशत उछला

  •  सोने की ऊंची कीमतों के बीच अप्रैल में भारत का सोने का इंपोर्ट 81.69 प्रतिशत बढक़र 5.62 अरब डॉलर हो गया। हालांकि, सरकार के इंपोर्ट शुल्क बढ़ाने के बाद आने वाले महीनों में इसमें कमी आने की संभावना जताई गई है। वाणिज्य मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल में चांदी का इंपोर्ट 157.16 प्रतिशत बढक़र 41.1 करोड़ डॉलर हो गया। वित्त वर्ष 2025-26 में सोने का इंपोर्ट मूल्य के लिहाज से 24 प्रतिशत बढक़र रिकॉर्ड 71.98 अरब डॉलर पर पहुंच गया। हालांकि, मात्रा के लिहाज से इंपोर्ट 4.76 प्रतिशत घटकर 721.03 टन रहा। सरकार ने 13 मई से सोने और चांदी जैसी कीमती धातुओं पर इंपोर्ट शुल्क छह प्रतिशत से बढ़ाकर 15 प्रतिशत कर दिया है। वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने कहा कि इंपोर्ट शुल्क बढऩे से वर्ष के दौरान सोने और चांदी के इंपोर्ट पर असर पड़ेगा और इनमें कमी आ सकती है। उन्होंने कहा कि चांदी का औद्योगिक उपयोग अधिक होने के कारण उस पर शुल्क वृद्धि का असर अपेक्षाकृत कम हो सकता है। अग्रवाल ने कहा कि शुल्क बढऩे के बाद उपभोग आधारित मांग में कमी आने की उम्मीद है। संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) से सोने के इंपोर्ट के बारे में उन्होंने कहा कि 2025-26 में मूल्य और मात्रा दोनों के लिहाज से इंपोर्ट घटा है, जिससे भारत के कुल स्वर्ण इंपोर्ट में यूएई की हिस्सेदारी कम हुई है। भारत-यूएई व्यापक आर्थिक भागीदारी समझौते (सीईपीए) के तहत रियायती शुल्क पर सोने के इंपोर्ट के लिए शुल्क दर कोटा (टीआरक्यू) व्यवस्था लागू की गई थी। यह समझौता एक मई, 2022 से प्रभावी हुआ। आंकड़ों के अनुसार, 2023-24 में कुल स्वर्ण इंपोर्ट 795 टन और 2024-25 में 757 टन रहा। इनमें टीआरक्यू व्यवस्था के तहत इंपोर्ट की हिस्सेदारी क्रमश: लगभग पांच प्रतिशत और 18 प्रतिशत रही। वित्त वर्ष 2025-26 में इस व्यवस्था के तहत 8.58 टन सोना इंपोर्ट की अनुमति दी गई थी, जबकि  वित्त वर्ष 2024-25 में भारत ने कुल 721 टन सोना इंपोर्ट किया। वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने कहा, मैं स्पष्ट करना चाहता हूं कि यूएई के साथ सीईपीए समझौते के तहत सोने पर दी गई शुल्क दर कोटा रियायत का 2025-26 में भारत के कुल स्वर्ण इंपोर्ट पर कोई बड़ा असर नहीं पड़ा है। उन्होंने कहा कि इस समझौते के तहत 2025-26 में सोने के इंपोर्ट के लिए जारी कुल टीआरक्यू केवल लगभग आठ टन के बराबर था और यह व्यवस्था जून 2026 तक वैध है। अग्रवाल ने कहा, 31 मार्च तक वास्तविक इंपोर्ट लगभग एक टन सोना ही था। इसलिए सोने के इंपोर्ट के मामले में यूएई सीईपीए का कोई खास प्रभाव नहीं पड़ा है। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में यूएई से सोने-चांदी इंपोर्ट में हुई वृद्धि की भरपाई भारत के प्रमुख स्रोत स्विट्जरलैंड से सोना-चांदी का इंपोर्ट बढऩे से हो गई। वाणिज्य सचिव ने कहा कि देश में शोधन के लिए सोने के डोर (अर्ध-शोधित सोना) का इंपोर्ट सकारात्मक रुख बनाए हुए है और इसका कुल इंपोर्ट सालाना लगभग 250-300 टन रहता है। यह इंपोर्ट अफ्रीका, लैटिन अमेरिका और अमेरिका समेत कई स्रोतों से होता है। इसी तरह, ऊंची कीमतों के कारण पिछले वित्त वर्ष में चांदी का इंपोर्ट लगभग 150 प्रतिशत बढक़र 12 अरब डॉलर हो गया। मात्रा के लिहाज से यह 42 प्रतिशत बढक़र 7,334.96 टन रहा। 

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गोल्ड का इंपोर्ट अप्रैल में 82 प्रतिशत बढ़ा, सिल्वर का इंपोर्ट 157 प्रतिशत उछला

 सोने की ऊंची कीमतों के बीच अप्रैल में भारत का सोने का इंपोर्ट 81.69 प्रतिशत बढक़र 5.62 अरब डॉलर हो गया। हालांकि, सरकार के इंपोर्ट शुल्क बढ़ाने के बाद आने वाले महीनों में इसमें कमी आने की संभावना जताई गई है। वाणिज्य मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल में चांदी का इंपोर्ट 157.16 प्रतिशत बढक़र 41.1 करोड़ डॉलर हो गया। वित्त वर्ष 2025-26 में सोने का इंपोर्ट मूल्य के लिहाज से 24 प्रतिशत बढक़र रिकॉर्ड 71.98 अरब डॉलर पर पहुंच गया। हालांकि, मात्रा के लिहाज से इंपोर्ट 4.76 प्रतिशत घटकर 721.03 टन रहा। सरकार ने 13 मई से सोने और चांदी जैसी कीमती धातुओं पर इंपोर्ट शुल्क छह प्रतिशत से बढ़ाकर 15 प्रतिशत कर दिया है। वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने कहा कि इंपोर्ट शुल्क बढऩे से वर्ष के दौरान सोने और चांदी के इंपोर्ट पर असर पड़ेगा और इनमें कमी आ सकती है। उन्होंने कहा कि चांदी का औद्योगिक उपयोग अधिक होने के कारण उस पर शुल्क वृद्धि का असर अपेक्षाकृत कम हो सकता है। अग्रवाल ने कहा कि शुल्क बढऩे के बाद उपभोग आधारित मांग में कमी आने की उम्मीद है। संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) से सोने के इंपोर्ट के बारे में उन्होंने कहा कि 2025-26 में मूल्य और मात्रा दोनों के लिहाज से इंपोर्ट घटा है, जिससे भारत के कुल स्वर्ण इंपोर्ट में यूएई की हिस्सेदारी कम हुई है। भारत-यूएई व्यापक आर्थिक भागीदारी समझौते (सीईपीए) के तहत रियायती शुल्क पर सोने के इंपोर्ट के लिए शुल्क दर कोटा (टीआरक्यू) व्यवस्था लागू की गई थी। यह समझौता एक मई, 2022 से प्रभावी हुआ। आंकड़ों के अनुसार, 2023-24 में कुल स्वर्ण इंपोर्ट 795 टन और 2024-25 में 757 टन रहा। इनमें टीआरक्यू व्यवस्था के तहत इंपोर्ट की हिस्सेदारी क्रमश: लगभग पांच प्रतिशत और 18 प्रतिशत रही। वित्त वर्ष 2025-26 में इस व्यवस्था के तहत 8.58 टन सोना इंपोर्ट की अनुमति दी गई थी, जबकि  वित्त वर्ष 2024-25 में भारत ने कुल 721 टन सोना इंपोर्ट किया। वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने कहा, मैं स्पष्ट करना चाहता हूं कि यूएई के साथ सीईपीए समझौते के तहत सोने पर दी गई शुल्क दर कोटा रियायत का 2025-26 में भारत के कुल स्वर्ण इंपोर्ट पर कोई बड़ा असर नहीं पड़ा है। उन्होंने कहा कि इस समझौते के तहत 2025-26 में सोने के इंपोर्ट के लिए जारी कुल टीआरक्यू केवल लगभग आठ टन के बराबर था और यह व्यवस्था जून 2026 तक वैध है। अग्रवाल ने कहा, 31 मार्च तक वास्तविक इंपोर्ट लगभग एक टन सोना ही था। इसलिए सोने के इंपोर्ट के मामले में यूएई सीईपीए का कोई खास प्रभाव नहीं पड़ा है। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में यूएई से सोने-चांदी इंपोर्ट में हुई वृद्धि की भरपाई भारत के प्रमुख स्रोत स्विट्जरलैंड से सोना-चांदी का इंपोर्ट बढऩे से हो गई। वाणिज्य सचिव ने कहा कि देश में शोधन के लिए सोने के डोर (अर्ध-शोधित सोना) का इंपोर्ट सकारात्मक रुख बनाए हुए है और इसका कुल इंपोर्ट सालाना लगभग 250-300 टन रहता है। यह इंपोर्ट अफ्रीका, लैटिन अमेरिका और अमेरिका समेत कई स्रोतों से होता है। इसी तरह, ऊंची कीमतों के कारण पिछले वित्त वर्ष में चांदी का इंपोर्ट लगभग 150 प्रतिशत बढक़र 12 अरब डॉलर हो गया। मात्रा के लिहाज से यह 42 प्रतिशत बढक़र 7,334.96 टन रहा। 


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