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Daily Business Newspaper | A Knowledge Powerhouse in Hindi

13-06-2026

लगाए 10 करोड़, कमाए 1 लाख करोड़ रुपए

  •  तमिलनाडु की सबसे सफल सरकारी निवेश की कहानी घड़ी की टिक टिक से जुड़ी है। इस वॉच कंपनी में राज्य सरकार की संस्था ने 1984 में 10 करोड़ रुपये से भी कम निवेश किया था और आज उसकी वेल्यू लगभग 1 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच चुकी है। यह कंपनी है टाइटन और इंवेस्टर है टिडको (Tamil Nadu Industrial Development Corporation)। ...मेड इन इंडिया-अ टाइटन स्टोरी में जेआरडी टाटा और जेरजीज देसाई की इस स्टोरी को अमेजन की सीरीज में दिखाया है। 1984 में भारत पर लाइसेंस राज का कब्जा था। घडिय़ां लक्जरी थी और मार्केट पर एचएमटी का दबदबा था। घड़ी मेन्युफैक्चरिंग के लिए केंद्र सरकार से लाइसेंस, विदेशी तकनीक की मंजूरी और मशीनरी इंपोर्ट के लिए अनुमति लेनी होती थी। कंपनी का नाम भी Tata Industries व Tamil Nadu के मेल से बना।  मेकेनिकल घडिय़ों के दौर में टाइटन को शुरुआती सफलता क्वॉर्ट्ज घडिय़ों से मिली। अनुभवी इंजीनियर, प्रोफेशनल मैनेजर व स्किल्ड वर्कर के दम पर मजबूत मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम तैयार किया। 1989 में कंपनी ने क्वॉर्टज घडिय़ां लॉन्च कीं, लेकिन असली बदलाव 1996 में आया जब टाइटन ने तनिष्क ब्रांड के जरिए ज्यूलरी मार्केट में एंट्री ली। लोकल ज्यूलर के उस दौर में तनिष्क ने क्वॉलिटी, ट्रांसपेरेंसी व डिजाइन के दम धीरे-धीरे बायर का भरोसा जीता। बाद में •ाोया, मिया और  कैरेटलेन जैसे ब्रांड्स ने इस सफलता को और बढ़ाया। बड़ी बात यह रही कि टिडको  (टिडको तमिलनाडु सरकार की कंपनी) ने हिस्सेदारी कभी नहीं बेची। उसने आईपीओ के बाद भी निवेश बनाए रखा, उदारीकरण के दौर में भी धैर्य रखा और कंपनी की ग्रोथ का फायदा उठाया। आज टिडको की 27.88' हिस्सेदारी की कीमत 1 लाख करोड़ रु. के आसपास है। टाइटन की कहानी केवल एक कॉर्पोरेट सफलता नहीं है। यह दिखाती है कि यदि सरकार सही पार्टनर चुने, रिस्क शेयर करे और बिजनस में ज्यादा दखलअंदाजी ना करे तो पीपीपी के दम पर आश्चर्यजनक वेल्थ क्रिएशन किया जा सकता है। 10 करोड़ रु. का यह इंवेस्टमेंट आज भारत के सबसे सफल सरकारी निवेशों में गिना जाता है।

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लगाए 10 करोड़, कमाए 1 लाख करोड़ रुपए

 तमिलनाडु की सबसे सफल सरकारी निवेश की कहानी घड़ी की टिक टिक से जुड़ी है। इस वॉच कंपनी में राज्य सरकार की संस्था ने 1984 में 10 करोड़ रुपये से भी कम निवेश किया था और आज उसकी वेल्यू लगभग 1 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच चुकी है। यह कंपनी है टाइटन और इंवेस्टर है टिडको (Tamil Nadu Industrial Development Corporation)। ...मेड इन इंडिया-अ टाइटन स्टोरी में जेआरडी टाटा और जेरजीज देसाई की इस स्टोरी को अमेजन की सीरीज में दिखाया है। 1984 में भारत पर लाइसेंस राज का कब्जा था। घडिय़ां लक्जरी थी और मार्केट पर एचएमटी का दबदबा था। घड़ी मेन्युफैक्चरिंग के लिए केंद्र सरकार से लाइसेंस, विदेशी तकनीक की मंजूरी और मशीनरी इंपोर्ट के लिए अनुमति लेनी होती थी। कंपनी का नाम भी Tata Industries व Tamil Nadu के मेल से बना।  मेकेनिकल घडिय़ों के दौर में टाइटन को शुरुआती सफलता क्वॉर्ट्ज घडिय़ों से मिली। अनुभवी इंजीनियर, प्रोफेशनल मैनेजर व स्किल्ड वर्कर के दम पर मजबूत मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम तैयार किया। 1989 में कंपनी ने क्वॉर्टज घडिय़ां लॉन्च कीं, लेकिन असली बदलाव 1996 में आया जब टाइटन ने तनिष्क ब्रांड के जरिए ज्यूलरी मार्केट में एंट्री ली। लोकल ज्यूलर के उस दौर में तनिष्क ने क्वॉलिटी, ट्रांसपेरेंसी व डिजाइन के दम धीरे-धीरे बायर का भरोसा जीता। बाद में •ाोया, मिया और  कैरेटलेन जैसे ब्रांड्स ने इस सफलता को और बढ़ाया। बड़ी बात यह रही कि टिडको  (टिडको तमिलनाडु सरकार की कंपनी) ने हिस्सेदारी कभी नहीं बेची। उसने आईपीओ के बाद भी निवेश बनाए रखा, उदारीकरण के दौर में भी धैर्य रखा और कंपनी की ग्रोथ का फायदा उठाया। आज टिडको की 27.88' हिस्सेदारी की कीमत 1 लाख करोड़ रु. के आसपास है। टाइटन की कहानी केवल एक कॉर्पोरेट सफलता नहीं है। यह दिखाती है कि यदि सरकार सही पार्टनर चुने, रिस्क शेयर करे और बिजनस में ज्यादा दखलअंदाजी ना करे तो पीपीपी के दम पर आश्चर्यजनक वेल्थ क्रिएशन किया जा सकता है। 10 करोड़ रु. का यह इंवेस्टमेंट आज भारत के सबसे सफल सरकारी निवेशों में गिना जाता है।


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