आरबीआई की लेटेस्ट रिपोर्ट से भारत में सेविंग के बदलते डायनामिक्स को लेकर इनसाइट्स मिलते हैं। रिपोर्ट के अनुसार पिछले कुछ वर्ष से कम इंटरेस्ट वाले सेविंग्स अकाउंट की तुलना में अब अधिक लोग फिक्स्ड डिपॉजिट को प्राथमिकता दे रहे हैं। मार्च 2022 में कुल बैंक डिपॉजिट्स में सेविंग्स डिपॉजिट का शेयर 34.6 परसेंट था, जो मार्च 2026 तक घटकर 28.7 परसेंट रह गया। एक ओर जहां सेविंग डिपॉजिट्स का शेयर घट रहा है वहीं टर्म डिपॉजिट (एफडी) का शेयर इन्हीं सालों 55.2 परसेंट से बढक़र 61.6 परसेंट हो गया। इस बदलाव की सबसे बड़ी वजह ब्याज दरों का अंतर है। बड़े बैंक सेविंग्स अकाउंट पर केवल लगभग 2.5 परसेंट इंटरेस्ट दे रहे हैं, जबकि एक से दो वर्ष की एफडी पर 6.25 से 6.45 परसेंट तक इंटरेस्ट मिल रहा है। पिछले दशक में सेविंग्स डिपॉजिट्स पर 4-6 परसेंट तक इंटरेस्ट मिल रहा था। लेकिन जब सेविंग्स डिपॉजिट पर इंटरेस्ट इंफ्लेशन यानी महंगाई दर से भी कम हो जाता है, तो वास्तविक रिटर्न नकारात्मक हो जाता है। दूसरे शब्दों में कहें तो सेविंग अकाउंट में रखा पैसा देखने भर के लिए बढ़ता है, लेकिन उसकी परचेजिंग पावर घटती जाती है। अप्रैल 2026 में रिटेल इंफ्लेशन 3.48 परसेंट थी, जो मई में बढक़र करीब 4 परसेंट पर पहुंच गई। मंहगाई की यह दर बचत खाते पर मिलने वाले ब्याज से अधिक थी। इसका सीधा अर्थ है कि सेविंग्स अकाउंट में पड़ी आपकी जमा घट रही है। ऐसे में इंवेस्टर्स के लिए एफडी एक बेहतर विकल्प के रूप में सामने आ रही है। आरबीआई के अनुसार मार्च 2026 तक कुल टर्म डिपॉजिट में 1 करोड़ रुपये या उससे अधिक की एफडी का शेयर 46.3 परसेंट था। इनमें भी 5 करोड़ रुपये से अधिक की जमाओं का शेयर 34.8 परसेंट रहा। इससे पता चलता है कि हाई वेल्यू डिपॉजिटर बैंकों की फंडिंग का बड़ा सोर्स बन चुके हैं। दूसरी ओर, 5 लाख रुपये तक की एफडी का शेयर कुल टर्म डिपॉजिट का केवल 17.8 परसेंट था। रिपोर्ट से पता चलता है कि डिपॉजिट्स में मीडियम टर्म (1 से 3 साल) की एफडी का शेयर मार्च 2022 के 50.4 परसेंट था जो मार्च 2026 में 69.8 परसेंट हो गया। वहीं एक वर्ष से कम अवधि वाली एफडी का शेयर 16.7 परसेंट से घटकर 8.8 परसेंट रह गया। रिपोर्ट के अनुसार मार्च 2026 में कुल बैंक डिपॉजिट्स में हाउसहोल्ड का शेयर 59.3 परसेंट था। हालांकि, ज्यादा रिटर्न की तलाश में कुछ लोग म्यूचुअल फंड और शेयर बाजार की ओर भी बढ़ रहे हैं। मार्च 2026 में कुल बैंक जमाओं में सीनियर सिटिजन का शेयर लगभग 20 परसेंट था और चार साल से यह अमूमन स्थिर ही है। सेविंग्स अकाउंट अब ज्यादातर रोजमर्रा खर्च और एमरजेंसी जरूरतों के लिए उपयोग किए जा रहे हैं, जबकि एक लेवल से ज्यादा सेविंग को सीधे बेहतर रिटर्न के लिए एफडी में ट्रांसफर किया जा रहा है।