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11-06-2026

‘यूनिवर्सिटी एज्यूकेशन सिस्टम विश्व स्तर पर हो चुका पुराना’

  •  प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद (ईएसी-पीएम) के सदस्य संजीव सान्याल ने बुधवार को कहा कि यूनिवर्सिटी एज्यूकेशन सिस्टम विश्व स्तर पर पुरानी हो चुकी है और उन्होंने ऐसी शैक्षणिक व्यवस्था पर जोर दिया, जो कौशल विकास पर केंद्रित हो। सान्याल ने ‘इंडिया ग्लोबल इनोवेशन कनेक्ट 2026’ कार्यक्रम में कहा कि आज के डिजिटल युग में ज्ञान तक पहुंच लगभग पूरी तरह से मुक्त और आसान हो चुकी है। ऐसे में शिक्षा के पारंपरिक स्वरूप पर पुनर्विचार करने की आवश्यकता है। सान्याल ने ऐसे शैक्षणिक ढांचे के बारे में विचार किए जाने पर जोर दिया, जिसमें शिक्षा और कौशल विकास मूल रूप से एक दूसरे में विलीन हो जाएं। उन्होंने कहा, हमारी वर्तमान शिक्षा व्यवस्था जिस ढांचे पर आधारित है, वह मूल रूप से 19वीं सदी की अवधारणा है। मैं यहां विशेष रूप से उच्च शिक्षा की बात कर रहा हूं, न कि बुनियादी शिक्षा की। सान्याल ने कहा कि वर्तमान में एक छात्र चार साल या तीन साल का स्नातक पाठ्यक्रम और उसके बाद स्नातकोत्तर डिग्री पूरी करता है। इसके बाद उससे अपेक्षा की जाती है कि वह अपने शेष जीवन के दौरान उस ज्ञान के आधार पर अपना जीवन यापन करे। उन्होंने कहा, ‘‘यह 19वीं सदी में अच्छा विचार था। जब आप शायद 20 साल की उम्र तक पढ़ाई करते थे, फिर 18 साल तक काम करते थे और फिर शायद आपकी मृत्यु हो जाती थी।’’ सान्याल ने कहा, ‘‘लेकिन अब जीवन प्रत्याशा बढ़ गयी है। लोग 80 साल या उससे अधिक तक जीते हैं। अब आप लोगों से उम्मीद कर रहे हैं कि वे मूल रूप से 30-40 साल पहले अर्जित ज्ञान के आधार पर अपना जीवन यापन करेंगे। इसलिए...यह विवि प्रणाली, न केवल भारत में बल्कि विश्व स्तर पर पुरानी हो चुकी है।’’  सान्याल ने सुझाव दिया कि विश्वविद्यालयों को शोध पर केंद्रित ज्ञान की नयी सीमाओं को आगे बढ़ाने की आवश्यकता है।

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‘यूनिवर्सिटी एज्यूकेशन सिस्टम विश्व स्तर पर हो चुका पुराना’

 प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद (ईएसी-पीएम) के सदस्य संजीव सान्याल ने बुधवार को कहा कि यूनिवर्सिटी एज्यूकेशन सिस्टम विश्व स्तर पर पुरानी हो चुकी है और उन्होंने ऐसी शैक्षणिक व्यवस्था पर जोर दिया, जो कौशल विकास पर केंद्रित हो। सान्याल ने ‘इंडिया ग्लोबल इनोवेशन कनेक्ट 2026’ कार्यक्रम में कहा कि आज के डिजिटल युग में ज्ञान तक पहुंच लगभग पूरी तरह से मुक्त और आसान हो चुकी है। ऐसे में शिक्षा के पारंपरिक स्वरूप पर पुनर्विचार करने की आवश्यकता है। सान्याल ने ऐसे शैक्षणिक ढांचे के बारे में विचार किए जाने पर जोर दिया, जिसमें शिक्षा और कौशल विकास मूल रूप से एक दूसरे में विलीन हो जाएं। उन्होंने कहा, हमारी वर्तमान शिक्षा व्यवस्था जिस ढांचे पर आधारित है, वह मूल रूप से 19वीं सदी की अवधारणा है। मैं यहां विशेष रूप से उच्च शिक्षा की बात कर रहा हूं, न कि बुनियादी शिक्षा की। सान्याल ने कहा कि वर्तमान में एक छात्र चार साल या तीन साल का स्नातक पाठ्यक्रम और उसके बाद स्नातकोत्तर डिग्री पूरी करता है। इसके बाद उससे अपेक्षा की जाती है कि वह अपने शेष जीवन के दौरान उस ज्ञान के आधार पर अपना जीवन यापन करे। उन्होंने कहा, ‘‘यह 19वीं सदी में अच्छा विचार था। जब आप शायद 20 साल की उम्र तक पढ़ाई करते थे, फिर 18 साल तक काम करते थे और फिर शायद आपकी मृत्यु हो जाती थी।’’ सान्याल ने कहा, ‘‘लेकिन अब जीवन प्रत्याशा बढ़ गयी है। लोग 80 साल या उससे अधिक तक जीते हैं। अब आप लोगों से उम्मीद कर रहे हैं कि वे मूल रूप से 30-40 साल पहले अर्जित ज्ञान के आधार पर अपना जीवन यापन करेंगे। इसलिए...यह विवि प्रणाली, न केवल भारत में बल्कि विश्व स्तर पर पुरानी हो चुकी है।’’  सान्याल ने सुझाव दिया कि विश्वविद्यालयों को शोध पर केंद्रित ज्ञान की नयी सीमाओं को आगे बढ़ाने की आवश्यकता है।


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